गुजरात के कच्छ में तटीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच व्हाइटवाइब साल्ट प्राइवेट लिमिटेड के अवैध बांधों को हटाने का काम शुरू हो गया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कंपनी को आठ सप्ताह के भीतर सभी बांध हटाने का निर्देश दिया है और स्पष्ट किया है कि जब तक ये बांध पूरी तरह नहीं हटाए जाते, तब तक उसे तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) की मंजूरी नहीं मिलेगी।
गुजरात तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, तीन स्थानों पर बांध के 100 से 110 फीट लंबे हिस्से तोड़े जा चुके हैं, जबकि एक अन्य स्थान पर काम जारी है।
इस मामले में आरोप है कि कच्छ की लखपत तहसील के चार गांवों में करीब 1,514 हेक्टेयर क्षेत्र में नमक, ब्रोमीन और समुद्री रसायनों के उत्पादन के लिए बिना आवश्यक अनुमति जमीन भरने और बांध बनाने का काम किया गया।
इन बांधों ने समुद्र के ज्वारीय प्रवाह को बाधित किया, जिससे संवेदनशील मडफ्लैट्स यानी ज्वार के साथ डूबने-उभरने वाले तटीय मैदानों की प्राकृतिक स्थिति प्रभावित होने की आशंका है। अब चुनौती केवल अवैध निर्माण हटाने की नहीं, बल्कि समुद्र के प्राकृतिक प्रवाह और नाजुक तटीय पारिस्थितिकी की रक्षा सुनिश्चित करने की भी है।
गुजरात के कच्छ जिले में व्हाइटवाइब साल्ट प्राइवेट लिमिटेड के अवैध बांधों को तोड़ने का काम शुरू हो गया है। इन बांधों ने समुद्र के ज्वार के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया है और संवेदनशील तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाने की आशंका पैदा की है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कंपनी को आठ सप्ताह के भीतर नमक बनाने के लिए बनाए सभी बांधो को हटाने की समयसीमा का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।
12 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में एनजीटी को बताया गया कि कंपनी ने बांधों को तोड़ने का काम शुरू कर दिया है। कंपनी के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र काफी बड़ा है, इसलिए पूरी कार्रवाई में करीब आठ सप्ताह लग सकते हैं।
गुजरात तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (जीसीजेडएमए) ने 8 अक्टूबर की अपनी रिपोर्ट में बताया था कि तीन स्थानों पर बांध के करीब 100 से 110 फीट लंबे हिस्से को तोड़ा जा चुका है। एक अन्य स्थान पर भी बांध हटाने का काम जारी है।
आवेदक की ओर से पेश वकील ने भी अवैध बांधों को तोड़ने की जारी कार्रवाई पर संतोष जताया और उम्मीद व्यक्त की कि यह काम जल्द पूरा हो जाएगा।
हालांकि, एनजीटी ने स्पष्ट किया कि कंपनी को निर्धारित समयसीमा का हर हाल में पालन करना होगा। ट्रिब्यूनल ने व्हाइटवाइब साल्ट प्राइवेट लिमिटेड से आठ सप्ताह के भीतर सभी बांध हटाने को कहा है।
साथ ही, जीसीजेडएमए को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि बांधों को हटाने की कार्रवाई पूरी हो। जब तक बांध पूरी तरह नहीं हटाए जाते, तब तक कंपनी को तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) की मंजूरी नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि इस मामले में 5 जून 2026 को गढ़वी हिंगलदान प्रभुदान ने एनजीटी की पश्चिमी पीठ में आवेदन दायर किया था। इसमें आरोप लगाया गया कि व्हाइटवाइब साल्ट ने तटीय विनियमन क्षेत्र के संवेदनशील हिस्सों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से जमीन भरने और उसे विकसित करने का काम किया है।
आवेदन के मुताबिक, गुजरात के कच्छ जिले की लखपत तहसील के धुनाय, कैयारी, कपुराशी और फतेहपुर गांवों की बिना सर्वे वाली जमीनों पर करीब 1,514 हेक्टेयर क्षेत्र में नमक, ब्रोमीन और समुद्री रसायनों के उत्पादन के लिए यह गतिविधियां की गईं। आरोप है कि इसके लिए गुजरात तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण से पहले पूर्व अनुमति नहीं ली गई।
आवेदन में यह भी दावा किया गया कि सीआरजेड-आई(ए), सीआरजेड-आई(बी) और सीआरजेड-III के नो-डेवलपमेंट जोन (एनडीजेड) में बनाए गए अवैध बांधों ने समुद्र के ज्वार के पानी के प्राकृतिक प्रवाह को रोक दिया। इससे जैविक गतिविधियों से भरपूर मडफ्लैट्स यानी ज्वार के साथ डूबने-उभरने वाले कीचड़युक्त तटीय मैदानों की प्राकृतिक स्थिति प्रभावित हुई।
बता दें कि ये तटीय क्षेत्र समुद्री जीवन और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में प्राकृतिक ज्वारीय प्रवाह में रुकावट केवल पानी के आने-जाने का मामला नहीं है, बल्कि इससे उन संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों पर भी असर पड़ सकता है, जिन पर तटीय पर्यावरण का संतुलन निर्भर करता है।
ऐसे में अब सबकी निगाहें अगले आठ सप्ताह की कार्रवाई पर हैं। बांध हटाने का काम शुरू होना एक अहम कदम है, लेकिन तटीय पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई और समुद्र के प्राकृतिक प्रवाह की बहाली सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।