कैंसर, विकलांगता, जन्मजात बीमारियां और पर्यावरणीय आपदाएं इन परमाणु परीक्षणों के दुष्परिणाम रहे।  फोटो साभार: आईस्टॉक
पर्यावरण

अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोध दिवस : शांति के संकल्प का दिन है आज

परमाणु हथियारों के परीक्षण का पर्यावरण और जलवायु पर गहरा असर पड़ता है, खेत बंजर हो जाते हैं और पानी जहरीला हो जाता है।

Dayanidhi

हर साल 29 अगस्त को पूरी दुनिया अंतर्राष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोध दिवस मनाती है। यह दिन हमें यह याद दिलाने के लिए है कि मानव सभ्यता का भविष्य हथियारों के अंधेरे में नहीं, बल्कि शांति के उजाले में छिपा है। जीवन का असली प्रकाश शांति का है, न कि हथियारों की चमक का।

🔆 परमाणु परीक्षणों की भयावह शुरुआत

29 अगस्त 1949 को सोवियत संघ ने कजाखस्तान के सेमिपालातिंस्क क्षेत्र में अपना पहला परमाणु बम परीक्षण किया। यह घटना इतिहास में एक खौफनाक शुरुआत थी। इसके बाद अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और अन्य देशों ने भी परमाणु हथियारों के परीक्षण शुरू किए। नतीजा यह हुआ कि लाखों लोग इन प्रयोगों से प्रभावित हुए।

कैंसर, विकलांगता, जन्मजात बीमारियां और पर्यावरणीय आपदाएं इन परीक्षणों के दुष्परिणाम रहे। जो लोग परीक्षण स्थलों के पास रहते थे, उन्हें पीढ़ियों तक इस त्रासदी को झेलनी पड़ी।

🌱 संयुक्त राष्ट्र की पहल

इसी पृष्ठभूमि में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दो दिसम्बर 2009 को अपनी 64वीं बैठक में प्रस्ताव संख्या 64/35 पारित कर 29 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोध दिवस घोषित किया। इस प्रस्ताव को कजाखस्तान ने पेश किया था। इसका मकसद था उस दिन को याद रखना जब 1991 में सेमिपालातिंस्क परमाणु परीक्षण स्थल को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।

साल 2010 से इस दिन को हर साल विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जा रहा है। इनमें संगोष्ठियां, प्रदर्शनी, व्याख्यान, मीडिया अभियान और प्रकाशन शामिल हैं। उद्देश्य केवल एक है - दुनिया को यह बताना कि परमाणु हथियार मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।

🔆 हिरोशिमा और नागासाकी की चेतावनी

जब हम परमाणु बम की बात करते हैं तो सबसे पहले जापान के शहर हिरोशिमा और नागासाकी की याद आती है। अगस्त 1945 में अमेरिका द्वारा गिराए गए दो बमों ने इन शहरों को राख में बदल दिया। लाखों लोग तत्काल मारे गए और उससे कहीं अधिक लोग आने वाले वर्षों में विकिरण और बीमारियों से पीड़ित हुए।

आज भी इन शहरों में उस दर्द की गूंज सुनाई देती है। यही कारण है कि पूरी दुनिया यह मानती है कि एक भी परमाणु हथियार का इस्तेमाल मानव सभ्यता का अंत साबित हो सकता है।

🔆 परमाणु हथियारों के खतरे

एक अकेला बम कुछ ही पलों में लाखों लोगों की जान ले सकता है। विकिरण का असर दशकों तक रहता है, जिससे नई पीढ़ियां भी बीमारियों का शिकार होती हैं। पर्यावरण और जलवायु पर गहरा असर पड़ता है, खेत बंजर हो जाते हैं और पानी जहरीला हो जाता है। यह हथियार मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है, क्योंकि यह निर्दोष नागरिकों की जान लेता है।

🌱 शांति और सृजन का संदेश

इस दिवस का मुख्य संदेश यही है कि सच्ची ताकत विनाश में नहीं, बल्कि सृजन में है। विकास, विज्ञान, कला और शांति ही वो रास्ते हैं जिनसे सभ्यता आगे बढ़ सकती है। हथियार केवल विनाश और भय फैलाते हैं।

🌍 वैश्विक प्रयास और चुनौतियां

1996 में व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) बनाई गई थी। इसका उद्देश्य था कि कोई भी परमाणु परीक्षण पूरी तरह बंद हो जाएं। लेकिन दुख की बात यह है कि आज तक यह संधि प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाई है।

हालांकि सिविल सोसाइटी, गैर-सरकारी संगठन और कई देशों की सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने आगे बढ़कर 26 सितम्बर को परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन का अंतरराष्ट्रीय दिवस भी घोषित किया है।

☮️ आज का संकल्प

29 अगस्त का यह दिन केवल कैलेंडर पर अंकित एक तारीख नहीं है। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम कैसी दुनिया आने वाली पीढ़ियों को सौंपना चाहते हैं।

➡️ क्या हम उन्हें डर और विनाश से भरी दुनिया देंगे?

➡️ या फिर उन्हें शांति, विकास और सहयोग से भरी धरती सौंपेंगे?

हमारा उत्तर साफ है। हमें शांति चाहिए। हमें एक ऐसी दुनिया चाहिए जहां विज्ञान जीवन को बचाने के लिए काम करे, न कि उसे खत्म करने के लिए।

इसलिए इस दिन हम सबको यह संकल्प लेना चाहिए कि हम परमाणु हथियारों के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करेंगे। हम विकास और सृजन को ही सच्ची ताकत मानेंगे। हम आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और परमाणु-मुक्त धरती देंगे।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोध दिवस केवल अतीत की गलतियों को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का दिन है। यह हमें बताता है कि दुनिया में असली शक्ति हथियारों से नहीं, बल्कि शांति, सहयोग और मानवता से आती है।