इंफोग्राफिक: तरुण सहगल और विनीत त्रिपाठी
विकास

आंकड़े एक लोकतांत्रिक औजार

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर डाउन टू अर्थ, हिंदी का विशेषांक पर्यावरण की दशा-दिशा 2026 में आंकड़ों के माध्यम से देश व दुनिया के विकास व पर्यावरण की हकीकत सामने रखी गई है

Kiran Pandey

आंकड़ों की मदद से कही गई बात में वजन होता है क्योंकि आंकड़े तथ्यों को सामने रखते हैं। आंकड़े शासन द्वारा अपनी बात समझाने या किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का आधार बनते हैं। सभी देश अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आंकड़ों के पीछे ही भाग रहे हैं। डाउन टू अर्थ का मौजूदा अंक पर्यावरण व विकास कार्यक्रमों का आंकड़ों पर आधारित वार्षिक मूल्यांकन का एक अदद प्रयास है। हम लगातार 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर प्रकाशित होने वाले अपने अंक में आंकड़ों के माध्यम से विकास की पड़ताल कर रहे हैं।

इस अंक में हम जटिल से जटिल आंकड़ों को ऐसे पेश करते हैं कि हमारे पाठक आसानी से उन्हें समझ सकें। हमारी पत्रकारिता जमीनी होने के साथ आंकड़ों पर भी निर्भर रही है। हम आंकड़ों के जाल से ऐसे नंबर छांटते हैं जो आमतौर पर जनमानस के समक्ष नहीं लाए जाते। हमारा उद्देश्य है कि हमारे पाठक आंकड़ों की इस पड़ताल से खुद को सशक्त बनाएं। यह आंकड़े उन्हें मुद्दों और विषयों को ठीक से देखने का नजरिया देते हैं। यह साफ है कि आंकड़े आज के दौर में सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक औजार हैं। यह अंक आपको समर्पित है