महासागरों में ऑक्सीजन तेजी से घट रही है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और रासायनिक चक्रों में बड़े बदलाव हो रहे हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
जलवायु

पांच दशकों में महासागरों में ऑक्सीजन की मात्रा में दो प्रतिशत की आई कमी, समुद्री जीवन पर बड़ा खतरा

महासागरों में घटती ऑक्सीजन से बढ़ रहा सल्फर चक्र का महत्व, कम ऑक्सीजन में सूक्ष्म जीवों की भूमिका और समुद्री पारिस्थितिकी पर गहरा प्रभाव सामने आया।

Dayanidhi

  • महासागरों में ऑक्सीजन तेजी से घट रही है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और रासायनिक चक्रों में बड़े बदलाव हो रहे हैं।

  • गर्म होते महासागर पानी में ऑक्सीजन घुलने की क्षमता घटा रहे हैं, जिससे गहरे समुद्र में ऑक्सीजन की भारी कमी बढ़ी।

  • कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्रों में सल्फर यौगिक अधिक महत्वपूर्ण हो रहे हैं, जो सूक्ष्म जीवों के जीवन को प्रभावित करते हैं।

  • टॉरिन जैसे कार्बनिक सल्फर यौगिकों का उपयोग कम ऑक्सीजन में बढ़ जाता है, जिससे समुद्री सूक्ष्म जीवों की गतिविधि बदलती है।

  • वैज्ञानिकों ने पाया कि फ्लेवोबैक्टीरिया जैसे सूक्ष्म जीव ऑक्सीजन-घटित क्षेत्रों में टॉरिन को ऊर्जा स्रोत के रूप में अधिक उपयोग करते हैं।

दुनिया के महासागर धीरे-धीरे लेकिन तेजी से अपनी ऑक्सीजन खो रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण समुद्रों का गर्म होना है। जब समुद्र का पानी गर्म होता है तो उसमें ऑक्सीजन घुलने की क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा गर्मी के कारण समुद्र की परतें अलग-अलग हो जाती हैं, जिससे ऊपर और नीचे का पानी ठीक से मिल नहीं पाता। इस प्रक्रिया को “स्तरीकरण” कहा जाता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि 1960 से 2010 के बीच केवल 50 वर्षों में समुद्रों की ऑक्सीजन की मात्रा में लगभग दो प्रतिशत की कमी आई है। इसी दौरान ऑक्सीजन रहित क्षेत्रों यानी “एनोक्सिक जोन” का आकार चार गुना तक बढ़ गया है। यह बदलाव समुद्री जीवन के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।

कम ऑक्सीजन में बदलते रासायनिक चक्र

समुद्र में ऑक्सीजन की कमी केवल जीवों को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि यह पानी के भीतर होने वाले रासायनिक चक्रों को भी बदल देती है। जब ऑक्सीजन कम हो जाती है, तो समुद्री सूक्ष्म जीव (माइक्रोऑर्गेनिज्म) अन्य रसायनों का उपयोग करने लगते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे हालात में सल्फर (गंधक) से जुड़े यौगिक बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। कम ऑक्सीजन वाले पानी में ये यौगिक अधिक मात्रा में जमा होने लगते हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं था कि ऐसा क्यों होता है और इसका पूरा प्रभाव क्या है।

टॉरिन नामक यौगिक पर विशेष अध्ययन

हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक खास सल्फर यौगिक “टॉरिन” पर अध्ययन किया है। टॉरिन एक प्राकृतिक कार्बनिक पदार्थ है, जो मांसाहारी भोजन और एनर्जी ड्रिंक्स में भी पाया जाता है। लेकिन यह केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

समुद्र में मौजूद कई सूक्ष्म जीव टॉरिन का उपयोग ऊर्जा बनाने, पोषण लेने और अपनी वृद्धि के लिए करते हैं। हालांकि पहले यह स्पष्ट नहीं था कि ऑक्सीजन की मात्रा इस प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करती है।

डेनमार्क के फ्योर्ड में हुआ शोध

आईएसएमई नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने डेनमार्क के “मारीएगर फ्योर्ड” से पानी के नमूने लिए। यह स्थान इसलिए खास है क्योंकि गर्मियों में यहां ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाती है। समुद्र का पानी एक उथले मार्ग से जुड़ा होने के कारण गहराई में ताजा ऑक्सीजन युक्त पानी आसानी से नहीं पहुंच पाता।

गर्मियों में तापमान बढ़ने पर पानी की परतें और अधिक स्थिर हो जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी और बढ़ जाती है। यही कारण है कि यह जगह वैज्ञानिकों के लिए एक प्राकृतिक प्रयोगशाला की तरह काम करती है।

प्रयोग और वैज्ञानिक निष्कर्ष

शोधकर्ताओं ने फ्योर्ड से लिए गए पानी के नमूनों में अलग-अलग परिस्थितियां बनाई। कुछ नमूनों में ऑक्सीजन की मात्रा कम रखी गई, जबकि कुछ में अधिक ऑक्सीजन दी गई। इसके बाद उन्होंने विशेष प्रकार के चिह्नित (लेबल किए गए) पदार्थ मिलाए ताकि यह देखा जा सके कि कौन से सूक्ष्म जीव कौन से तत्वों का उपयोग करते हैं।

नतीजों से पता चला कि टॉरिन का उपयोग मुख्य रूप से केवल उन परिस्थितियों में हुआ जहां ऑक्सीजन कम थी। यानी कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में ही कुछ विशेष सूक्ष्म जीव टॉरिन को अधिक सक्रिय रूप से उपयोग करते हैं।

भविष्य के लिए संकेत

शोध में यह भी पाया गया कि “फ्लेवोबैक्टीरिया” नामक सूक्ष्म जीव टॉरिन के उपयोग में मुख्य भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे-जैसे समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी बढ़ेगी, वैसे-वैसे ऐसे सूक्ष्म जीव और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएंगे।

इस बदलाव का असर समुद्र के कार्बन और सल्फर चक्रों पर भी पड़ेगा, जो पूरी पृथ्वी की जलवायु और समुद्री जीवन को प्रभावित कर सकते हैं

यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे समुद्री तंत्र को बदल रही है। आने वाले समय में यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो समुद्री जीवन और पृथ्वी के प्राकृतिक चक्रों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।