देश में मानसून पर अल नीनो का असर, एक जून से तीन अगस्त तक बारिश 12 फीसदी कम, कई राज्यों में भारी कमी दर्ज। फोटो साभार: आईस्टॉक
जलवायु

मानसून 2026: मेघालय में 58 फीसदी कम तो लद्दाख में 184 फीसदी अधिक बरसे बादल

पूरे देश में एक जून से तीन अगस्त, 2026 तक बारिश में 12 फीसदी तक की कमी देखी गई, दो राज्यों में सामान्य से बहुत अधिक बारिश हुई, 16 राज्य ऐसे हैं जहां बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है।

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  • देश में मानसून पर अल नीनो का असर, एक जून से तीन अगस्त तक बारिश 12 फीसदी कम, कई राज्यों में भारी कमी दर्ज।

  • मेघालय में बारिश 58 फीसदी घटी, जबकि लद्दाख में सामान्य से 184 फीसदी अधिक वर्षा ने बनाया नया रिकॉर्ड।

  • पूर्वोत्तर भारत में मानसून संकट गहराया, कुल बारिश 29 फीसदी कम; बिहार और झारखंड में भी भारी कमी।

  • मध्य भारत में राहत: ओडिशा और दादरा-नगर हवेली में ज्यादा बारिश, क्षेत्र में चार फीसदी बढ़ोतरी।

  • जलवायु परिवर्तन और अल नीनो का असर, देशभर में कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे जैसे हालात बने।

मौसम विभाग ने साल 2026 के मानसून सीजन में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया था। इस दौरान जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के प्रभाव के कारण बारिश का पैटर्न असामान्य रहा। कई क्षेत्रों में बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी चरम मौसमी घटनाएं भी देखने को मिलीं।

एक जून से तीन अगस्त, 2026 के दौरान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के मेघालय में 58 फीसदी बारिश की कमी जबकि इसी दौरान केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख में 184 फीसदी बारिश दर्ज की गई है, जोकि सामान्य से बहुत अधिक है।

मानसून का तीसरा महीना चल रहा है। मौसम विभाग के बारिश संबंधी आंकड़ों के मुताबिक, मात्र दो ही राज्य ऐसे हैं जहां सामान्य से बहुत अधिक बारिश दर्ज की गई है, इन राज्यों में केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख और दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव शामिल हैं।

मौसम विभाग के राज्यवार बारिश का ताजा अपडेट देखें तो एक जून से तीन अगस्त, 2026 तक पूरे देश में बारिश में 12 फीसदी तक की कमी देखी जा रही है। जबकि दो राज्य ऐसे हैं जहां सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश हुई, वहीं दो और राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। 16 राज्य ऐसे है जहां सामान्य की करीब बादल बरसे हैं। 16 अन्य राज्यों को बारिश में भारी कमी का सामना करना पड़ा है, जो देश के 30 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं।

पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में कितने बरसे बादल?

देश के अलग-अलग हिस्सों में अब तक हुई बारिश पर नजर डालें तो पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश में एक जून से तीन अगस्त, 2026 के दौरान सामान्य से 37 फीसदी बारिश कम हुई, इस बीच यहां सामान्य रूप से 1015.8 मिमी तक बारिश होती है जबकि पानी मात्र 640.5 मिमी ही बरसा। वहीं असम में बारिश में 26 फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई, यहां भी आमतौर पर 891.7 मिमी बारिश होती है जबकि यहां, इस दौरान 660.2 मिमी तक ही बारिश हुई।

मेघालय में 58 फीसदी की कमी, नागालैंड में दो फीसदी ज्यादा बरसे बादल, विभाग ने मेघालय को बारिश में कमी की श्रेणी में जबकि नागालैंड को सामान्य श्रेणी के रूप में रखा है। मणिपुर में 42 फीसदी की कमी, जबकि मिजोरम में 24 फीसदी की कमी के साथ बारिश की कमी के दायरे में रखा है। वहीं, त्रिपुरा में 15 फीसदी की कमी को भी बारिश में कमी की श्रेणी के रूप में रखा गया है। सिक्किम में दो फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, पूर्वोत्तर भारत के इस राज्य को भी बारिश की सामान्य श्रेणी में रखा गया है।

एक जून से तीन अगस्त, 2026 के दौरान पश्चिम बंगाल में सामान्य बारिश हुई। वहीं, झारखंड में सामान्य से 32 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि बिहार में सामान्य के मुकाबले बारिश में 43 फीसदी की गिरवाट रिकॉर्ड की गई है, विभाग ने इन दोनों राज्यों को बारिश में कमी की श्रेणी में स्थान दिया है।

कुल मिलाकर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में एक जून से तीन अगस्त तक सामान्य रूप से 785.3 मिमी बारिश होती है, जबकि इस बार 557.1 मिमी बारिश हुई। यानी इस क्षेत्र में कुल 29 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई।

उत्तर पश्चिम भारत में कितनी हुई बारिश ?

एक जून से तीन अगस्त, 2026 के दौरान उत्तर पश्चिम भारत में बारिश की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सामान्य की तुलना में 28 फीसदी की कमी देखी गई है, जिसे बारिश की कमी के रूप में रखा गया है। वहीं पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में छह फीसदी की कमी रिकॉर्ड की गई जिसे सामान्य बारिश माना जा रहा है, यानी इस दौरान यहां 637.2 मिमी तक बारिश होती है जबकि 601.3 मिमी तक ही बादल बरसे।

हरियाणा में सामान्य से 32 फीसदी बारिश में कमी दर्ज की गई, जबकि चंडीगढ़ में सामान्य की अपेक्षा 24 फीसदी तक बारिश में गिरावट दर्ज की गई, मौसम विभाग ने इन दोनों राज्यों को बारिश में कमी की श्रेणी में रखा है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस अवधि के दौरान बारिश में सामान्य के मुकाबले 10 फीसदी की कमी रिकॉर्ड की गई है, यहां इस दौरान आमतौर पर 271.7 मिमी तक बारिश होती है, जबकि केवल 244 मिमी ही बरसे बादल। वहीं पंजाब में सामान्य से 39 फीसदी बारिश कम दर्ज की गई जिसे बारिश के कमी की श्रेणी में शामिल किया गया है।

वहीं उत्तर भारत के दो और पहाड़ी राज्यों में से एक हिमाचल प्रदेश में बारिश में सामान्य की अपेक्षा आठ फीसदी की कमी दर्ज की गई, वहीं, जम्मू और कश्मीर में 15 फीसदी की बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई है। केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख में 184 फीसदी, यानी सामान्य के मुकाबले बहुत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि राजस्थान में सामान्य से 17 फीसदी तक बारिश में कमी दर्ज की गई, यानी इस राज्य को सामान्य की श्रेणी में रखा गया है।

उत्तर पश्चिम भारत में एक जून से तीन अगस्त के दौरान 308.9 मिमी बारिश होती है जबकि इस बार इसी अवधि में 267.9 मिमी ही बरसे बादल, कुल मिलाकर यहां बारिश में 13 फीसदी की कमी दर्ज की गई।

मध्य भारत में क्या रहा बारिश का हाल?

मध्य भारत में बारिश संबंधी मौसम विभाग के एक जून से तीन अगस्त, 2026 तक के आंकड़े देखें तो ओडिशा में इस दौरान सामान्य से 27 फीसदी अधिक बारिश बारिश दर्ज की गई, यहां अमूमन इस दौरान 586.3 मिमी तक बारिश होती है, जबकि 745.4 मिमी पानी बरसा, यानी यहां सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। वहीं मध्य प्रदेश में 16 फीसदी की कमी देखी गई, यानी इसे भी बारिश के सामान्य की श्रेणी में रखा गया है।

इसी अवधि के दौरान गुजरात में सामान्य की अपेक्षा 21 फीसदी, यानी अधिक बारिश बारिश हुई। वहीं, केन्द्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव सामान्य से 82 फीसदी बारिश दर्ज की गई, यानी बारिश को लेकर इसे सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश की श्रेणी में रखा गया है।

गोवा में बारिश में सामान्य से 37 फीसदी की कमी दर्ज की गई, मौसम विभाग ने इसे बारिश की कमी की श्रेणी में स्थान दिया है। जबकि महाराष्ट्र में सामान्य के मुकाबले सात फीसदी तथा छत्तीसगढ़ में बारिश में सामान्य से पांच फीसदी कम बारिश हुई इन दोनों राज्यों को बारिश के लिए सामान्य श्रेणी में रखा गया है। मध्य भारत में एक जून से तीन अगस्त के दौरान 524.7 मिमी बरसते थे बादल, जबकि इस बार इसी अवधि में 546.7 मिमी तक बरसे बादल, कुल मिलाकर यहां बादल मेहरबान रहे और चार फीसदी की बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई।

भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में कितने बरसे बादल?

भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में एक जून से तीन अगस्त, 2026 के दौरान बादलों के बरसने की बात करें तो, केंद्र शासित प्रदेश अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह में इस दौरान सामान्य की अपेक्षा दो फीसदी अधिक बारिश हुई, यहां आमतौर पर 844 मिमी बारिश होती हैं जबकि इस दौरान सामान्य से अधिक यानी 860.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

आंध्र प्रदेश में सामान्य के मुकाबले बारिश में 36 फीसदी बारिश कम हुई, जिसे बारिश की कमी के रूप में स्थान दिया गया है। जबकि तेलंगाना में सामान्य से सात फीसदी कम बरसे बादल, इसे सामान्य की श्रेणी में स्थान दिया गया है। तमिलनाडु में सामान्य की अपेक्षा 13 फीसदी की कमी रिकॉर्ड की गई। पुडुचेरी में भारी कमी, यानी 55 फीसदी कम गिरा पानी, यानी इस राज्यों को बारिश की भारी कमी की श्रेणी में रखा गया है।

दक्षिण भारत के कर्नाटक में सामान्य की अपेक्षा बारिश में 19 फीसदी की कमी, हालांकि मौसम विभाग ने इसे सामान्य की श्रेणी में रखा है। जिस राज्य में हर बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत होती है, यानी केरल में 23 फीसदी की कमी के साथ इसे बारिश में कमी की श्रेणी में स्थान दिया गया है।

लक्षद्वीप में सामान्य के मुकाबले 31 फीसदी बादल कम बरसे हैं, यहां एक जून से तीन अगस्त, तक अमूमन 647.3 मिमी तक बारिश होती है जबकि 446.3 फीसदी बारिश रिकॉर्ड की गई, यानी इस राज्य में भी बारिश में कमी दर्ज की गई है। कुल मिलाकर भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में एक जून से लेकर तीन अगस्त तक 385.7 मिमी तक बारिश होती है, जबकि 311 मिमी ही बादल बरसे।

कुछ राज्यों में अधिक, कहीं बहुत ज्यादा तो कहीं बहुत कम बरसे बादल। बदलती जलवायु व अल नीनो के असर से आसमान बारिश के पैर्टन को देखा जा सकता है।