नमक की मात्रा महासागर की घनत्व, धाराओं और समुद्र स्तर को प्रभावित करती है, जो गर्म पानी को पूर्वी प्रशांत की ओर धकेलती है। फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स, ब्रोकन इनाग्लोरी
जलवायु

सर्दियों में पश्चिमी प्रशांत महासागर का खारा पानी है मजबूत अल नीनो की चाबी

पश्चिमी प्रशांत महासागर में वसंतकालीन खारापन पैटर्न एल नीनो की तीव्रता बढ़ाने और गंभीर वैश्विक मौसम घटनाओं को प्रभावित करता है।

Dayanidhi

  • अनमक की मात्रा महासागर की घनत्व, धाराओं और समुद्र स्तर को प्रभावित करती है, जो गर्म पानी को पूर्वी प्रशांत की ओर धकेलती है।

  • पारंपरिक मॉडल केवल तापमान और हवाओं पर ध्यान देते हैं, लेकिन आधुनिक अध्ययन नमक को एल नीनो में मुख्य भूमिका बताते हैं।

  • अत्यधिक एल नीनो से अमेरिका में भारी वर्षा और ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया में सूखा जैसी वैश्विक मौसम प्रभावों का खतरा बढ़ता है।

  • नमक को शामिल करने वाले आधुनिक मॉडल भविष्यवाणी को सटीक बनाते हैं, जिससे कृषि, जल प्रबंधन और आपदा तैयारी में मदद मिलती है।

वैज्ञानिकों ने लंबे समय से अल नीनो को समझने के लिए महासागर का तापमान और हवाओं के पैटर्न पर गौर किया है। अल नीनो प्रशांत महासागर में होने वाला एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, जिसमें गर्म पानी पूर्व की ओर फैलता है और दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करता है

हाल ही में जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित एक अध्ययन ने यह दिखाया है कि पश्चिमी प्रशांत महासागर के पानी में नमक की मात्रा भी अल नीनो की ताकत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

खारापन क्यों महत्वपूर्ण है?

समुद्र विज्ञान में खारापन सिर्फ पानी का स्वाद नहीं है। यह उस पानी में घुले हुए खारा (नमक) की मात्रा को बताता है। नमक ज्यादा होने पर पानी घना हो जाता है, जिससे महासागर की परतें और धाराएं प्रभावित होती हैं। घनत्व में अंतर से समुद्र का स्तर और गर्मी का परिवहन भी प्रभावित होता है।

अध्ययन के अनुसार, जब उत्तरी भूमध्य रेखा के पास का पानी अधिक खारा होता है और भूमध्यरेखा के पास का पानी अपेक्षाकृत मीठा होता है, तो समुद्र में एक खास पैटर्न बनता है। यह पैटर्न समुद्र की स्तरीय ऊंचाई में अंतर पैदा करता है, जो महासागर की धाराओं को पूर्व की ओर धकेलता है और गर्म सतही पानी को मध्य प्रशांत की ओर ले जाता है। यह बदलाव अल नीनो की शुरुआत को प्रबल करता है

एल नीनो पर असर

अल नीनो तब होता है जब गर्म सतही पानी प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में फैलता है। इससे मौसम पर बड़े प्रभाव पड़ते हैं। उदाहरण के लिए -

  • अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश

  • ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में सूखा

  • चक्रवात, आग और कृषि पर असर

अध्ययन से पता चला है कि इस नमक से प्रेरित प्रक्रिया से एल नीनो की तीव्रता लगभग 20 फीसदी तक बढ़ सकती है। इसके अलावा, अत्यधिक मजबूत एल नीनो की संभावना दोगुनी हो जाती है।

पारंपरिक विचार और नया नजरिया

परंपरागत मॉडल मुख्य रूप से ध्यान देते हैं -

  • हवाओं की दिशा और ताकत

  • समुद्र का तापमान

  • समुद्र की गहराई

लेकिन नमक को अक्सर महत्व नहीं दिया गया क्योंकि इसे मापना और मॉडलिंग करना कठिन है। नई तकनीक और आधुनिक मॉडलिंग अब इसे बेहतर तरीके से दिखा सकते हैं। शोधकर्ताओं ने हर वर्ष वसंत (मार्च से मई) में पश्चिमी प्रशांत में एक सुसंगत नमक पैटर्न पाया जो मजबूत एल नीनो की भविष्यवाणी कर सकता है।

वैश्विक महत्व

अअल नीनो सिर्फ प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं है। इसके प्रभाव पूरे विश्व में महसूस किए जाते हैं। नमक के इस प्रभाव को समझकर हम मौसमी भविष्यवाणी बेहतर बना सकते हैं। इसका लाभ कई क्षेत्रों में होगा -

  • कृषि: फसल की योजना और सिंचाई

  • जल प्रबंधन: सूखे और बाढ़ की तैयारी

  • आपदा प्रबंधन: समय रहते चेतावनी और बचाव कार्य

अतः यह शोध अल नीनो की समझ में एक नया आयाम जोड़ता है। नमक सिर्फ एक रासायनिक तत्व नहीं है, बल्कि यह महासागर और वायुमंडल के बीच के जटिल संबंधों में सक्रिय भूमिका निभाता है।

भविष्य में क्या हो सकता है?

अगले दशक में, जलवायु परिवर्तन और महासागरीय तापमान में बदलाव के कारण एल नीनो की तीव्रता और आवृत्ति बदल सकती है। इस स्थिति में, सभी कारणों - हवा, तापमान, नमक और महासागर धाराओं को समझना और निगरानी करना बेहद जरूरी होगा।

शोध यह दिखाता है कि नमक की छोटी-छोटी बदलते पैटर्न भी एल नीनो जैसी बड़ी प्राकृतिक घटनाओं को प्रभावित कर सकती हैं। यही कारण है कि अब वैज्ञानिक समुद्र में घुली रसायनिक संरचना को नजरअंदाज नहीं कर सकते।

  • पश्चिमी प्रशांत महासागर में वसंत के समय का खारापन पैटर्न मजबूत एल नीनो के लिए महत्वपूर्ण है।

  • यह पैटर्न सागर की धाराओं और गर्म पानी के फैलाव को प्रभावित करता है।

  • एल नीनो के प्रभाव दुनिया भर में महसूस होते हैं और इससे कृषि, जल प्रबंधन और आपदा तैयारी पर असर पड़ता है।

  • आधुनिक मॉडल अब इस प्रभाव को शामिल कर भविष्यवाणी को अधिक सटीक बना सकते हैं।

अतः समुद्र का खारापन अब सिर्फ समुद्र का एक रासायनिक गुण नहीं रहा, यह हमारे मौसम और जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक बन गया है।