महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक के बाद दो और राज्य गुजरात व राजस्थान ने भी सूखे की आधिकारिक घोषणा कर दी है। गुजरात और राजस्थान ने कुल 18 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। गुजरात सरकार ने फसलें बर्बाद होने वाले किसानों के लिए राहत पैकेज की भी घोषणा की है।
राजस्थान सरकार ने अपने 41 जिलों में से 14 में सूखे की घोषणा की है, जबकि गुजरात ने चार जिलों देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ को सूखाग्रस्त घोषित किया है।
राजस्थान में सूखे से प्रभावित जिलों में चूरू, जैसलमेर, जालोर, पाली, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और बालोतरा सहित अन्य जिले शामिल हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, राजस्थान में 1 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच मानसून के दौरान 340.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 435.6 मिलीमीटर होती है। इस तरह राज्य में सामान्य से 22 प्रतिशत कम बारिश हुई।
26 अक्टूबर को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सूखे से प्रभावित चार जिलों के किसानों के लिए राहत उपायों की घोषणा की।
गांधीनगर में पटेल ने कहा, “इस मौसम में राज्य में कुल मिलाकर सामान्य बारिश का लगभग 89 प्रतिशत दर्ज किया गया है। हालांकि, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, कच्छ और जामनगर जिलों में इससे भी कम बारिश हुई है।”
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कम बारिश से प्रभावित किसानों को सहायता देने का फैसला किया है।
पटेल के अनुसार, यह निर्णय केंद्र सरकार के सूखा प्रबंधन दिशानिर्देश, 2016 के अनुरूप लिया गया है। इन चार जिलों के किसानों को फसल नुकसान के लिए राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के मानकों के तहत मुआवजा दिया जाएगा।
राज्य सरकार किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपए की आर्थिक सहायता देगी। हालांकि, यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक सीमित होगी।
इसके अलावा, सरकार ने 2 रुपए प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर पशु चारा उपलब्ध कराना भी शुरू कर दिया है।
घोषित अन्य उपायों में प्रभावित जिलों में 1 नवंबर से विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी वीबी ग्राम जी के तहत 150 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराना शामिल है।सरकार पशुओं के रखरखाव के लिए गोशालाओं को प्रति पशु 80 रुपए की आर्थिक सहायता भी देगी।
भारत का लगभग आधा भूभाग सूखे की चपेट में
गुजरात और राजस्थान अब उन राज्यों में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने सूखे की घोषणा की है। इससे पहले कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश भी अपने कुछ हिस्सों में सूखे की घोषणा कर चुके हैं।
आईआईटी गांधीनगर के इंडिया ड्राउट मॉनिटर के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 तक भारत का 46.7 प्रतिशत भूभाग सूखे की स्थिति का सामना कर रहा था।