2050 तक जलवायु लक्ष्य पूरे करने के लिए सालाना अरबों टन कार्बन डाइऑक्साइड हटाना जरूरी है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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कार्बन डाइऑक्साइड हटाने में “पूरी पारदर्शिता” बहुत जरूरी: शोध

कार्बन हटाने में पारदर्शिता जरूरी है, जिससे विज्ञान सीख सके, निवेश बढ़े और जलवायु परिवर्तन से सुरक्षा संभव हो सके।

Dayanidhi

  • 2050 तक जलवायु लक्ष्य पूरे करने के लिए सालाना अरबों टन कार्बन डाइऑक्साइड हटाना जरूरी।

  • वर्तमान सीडीआर निवेश यह जानने पर आधारित हैं कि कौन-सी तकनीकें सुरक्षित, प्रभावी, किफायती और समाज के लिए फायदेमंद हैं।

  • कंपनियों को अपने पूरे प्रक्रिया के आंकड़ों, लागत और ऊर्जा खपत साझा करनी चाहिए ताकि तेजी से सीख और भरोसा बढ़े।

  • विविध तकनीकें: वनीकरण, तटीय संरक्षण, बायोचार, बीईसीसीएस और जियोकेमिकल तरीके सभी के लिए बड़े पैमाने पर निगरानी, रिपोर्टिंग और सत्यापन जरूरी है।

  • सीडीआर को आगे बढ़ाने के लिए नीति समर्थन और कॉर्पोरेट पारदर्शिता आवश्यक है, जिससे प्रमाणित और समाजहितकारी कार्बन हटाना संभव हो।

जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए दुनिया को अब बहुत बड़े स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड हटाने (कार्बन डाइऑक्साइड रिमूवल -सीडीआर) की जरूरत है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें 2050 तक सालाना अरबों टन कार्बन डाइऑक्साइड को हटाना होगा। यह केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने से ही संभव नहीं होगा, बल्कि कार्बन को हटाने और पृथ्वी पर सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने की तकनीकों पर भी काम करना होगा।

येल सेंटर फॉर नेचुरल कार्बन कैप्चर (वाईसीएनसीसी) के वैज्ञानिक और पृथ्वी एवं ग्रह विज्ञान के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक शोध के माध्यम से बताया कि कार्बन हटाने के प्रयासों में “रैडिकल ट्रांसपेरेंसी” यानी पूर्ण पारदर्शिता कितनी जरूरी है।

पूर्ण पारदर्शिता क्यों जरूरी है?

एनपीजे क्लाइमेट एक्शन नामक पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार, अगले 10-15 सालों में हमें यह पता लगाना होगा कि कौन-सी तकनीकें सुरक्षित, प्रभावी और किफायती हैं। साथ ही, ये तकनीकें समाज और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद हों। इसका मतलब है कि कार्बन हटाने के क्षेत्र में निवेश का मुख्य उद्देश्य सीखना और भविष्य के लिए क्षमता बढ़ाना होना चाहिए।

इस सीखने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। यदि कंपनियां अपने कार्बन हटाने के तरीकों, लागत और ऊर्जा खपत के आंकड़ों को साझा करेंगी, तो वैज्ञानिक और नीति निर्माता तेजी से सीख पाएंगे कि कौन-सी तकनीक काम कर रही है और कौन-सी नहीं।

पूर्ण पारदर्शिता का मतलब क्या है?

अधिकतर कार्बन हटाने का निवेश निजी कंपनियों में जाता है। इन कंपनियों का उद्देश्य न केवल कार्बन हटाना है, बल्कि मुनाफा कमाना भी है। शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि यदि हम वास्तव में सीखना चाहते हैं कि कौन-सी तकनीकें कारगर हैं, तो कंपनियों को अपने पूरे आंकड़े साझा करने चाहिए, जिसमें उनके द्वारा खर्च किए गए पैसे और ऊर्जा की जानकारी भी शामिल हो।

वे कहते हैं कि यह पारदर्शिता इतनी “उग्र” नहीं है, बल्कि वर्तमान प्रथाओं की तुलना में यह काफी अलग और नई है।

सीखने और क्षमता बढ़ाने में पारदर्शिता कैसे मदद करती है?

कार्बन हटाने की तकनीकें बहुत अलग-अलग हैं, जैसे वनीकरण, पुनर्योजी कृषि (रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर), तटीय बहाली, बायोमास कार्बन निष्कासन (जैसे बायोचार और बीईसीसीएस) और जियोकेमिकल तकनीकें जैसे उन्नत अपक्षय (एन्हांस्ड वेदरिंग) और महासागर क्षारीयता संवर्धन (ओशन अल्कलिनिटी एन्हांसमेंट)।

हर तकनीक में अलग-अलग तरह की चुनौतियां हैं। उदाहरण के लिए, वनीकरण परियोजनाओं में यह देखना जरूरी है कि कार्बन कितने समय तक सुरक्षित रहता है। जियोकेमिकल सीडीआर में हम जानते हैं कि कार्बन हट रहा है, लेकिन इसे बड़े पैमाने पर निगरानी करने, रिपोर्टिंग और सत्यापन (एमआरवी) के तरीके विकसित करना जरूरी है।

यदि कंपनियां अपने आंकड़ों को साझा करेंगी, तो हम अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ व्यावसायिक परियोजनाओं से भी सीख सकते हैं और तेजी से यह पता लगा सकते हैं कि कौन-सी तकनीक भविष्य में सबसे अच्छी होगी।

गोपनीयता और साझा लाभ का संतुलन

कंपनियों को अपनी तकनीक और व्यापारिक रणनीति गोपनीय रखने का अधिकार है। लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि कंपनी के पास मजबूत और किफायती कार्बन हटाने की तकनीक है और इसके लाभ स्पष्ट हैं, तो पारदर्शिता रखना व्यावसायिक रूप से भी फायदेमंद है। खरीदार और निवेशक उन परियोजनाओं को पसंद करेंगे, जिनमें सत्यापन योग्य और समाज के लिए लाभकारी कार्बन हटाने की क्षमता हो।

वाईसीएनसीसी में पारदर्शिता की भूमिका

वाईसीएनसीसी में पारदर्शिता एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। उदाहरण के लिए, वाईएएसएसपी और शिफ्ट-सीएम प्रोग्राम्स में वास्तविक परियोजना आंकड़े की जरूरत होती है, जो केवल व्यावसायिक परियोजनाओं से हासिल किया जा सकता है। इसी तरह, जियोकेमिकल सीडीआर अध्ययन में यह देखने की कोशिश की जा रही है कि तकनीक के कृषि और पर्यावरणीय फायदे कितने हैं।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहना है कि पूर्ण पारदर्शिता अपने आप नहीं आएगी। इसे सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं को सक्रिय रूप से इसे अपनाने और इसके लिए संघर्ष करने की आवश्यकता है। पारदर्शिता केवल सही आंकड़ों को साझा करने का मामला नहीं है, बल्कि यह भरोसा बनाने और कार्बन हटाने के प्रयासों को बड़े पैमाने पर सफल बनाने का जरिया है।

यदि कार्बन हटाने की तकनीकें पारदर्शी और विश्वसनीय होंगी, तो दुनिया को जलवायु परिवर्तन से बचाने में सफलता मिल सकती है।