यह रिपोर्ट एक तीखा विरोधाभास सामने लाती है—एक ओर राजधानी दिल्ली ने 08 जुलाई 2026 को राहत की सांस ली और 59 के एक्यूआई के साथ साल का सबसे साफ दिन दर्ज किया, तो दूसरी ओर बिहार का आरा लगातार देश का सबसे प्रदूषित शहर बना रहा, जहां एक्यूआई 253 तक पहुंच गया।
बीते 24 घंटों में दिल्ली की हवा में 54 अंकों का सुधार दर्ज हुआ और वह ‘मध्यम’ से ‘संतोषजनक’ श्रेणी में लौट आई। वहीं फरीदाबाद में भी मामूली सुधार के साथ हवा ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी रही। लेकिन आरा की तस्वीर अब भी चिंताजनक है—यहां पीएम2.5 का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,580 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
देशभर के 229 शहरों के आंकड़े बताते हैं कि 41 फीसदी शहरों में हवा साफ और 48 फीसदी में संतोषजनक रही, यानी ज्यादातर भारत ने अपेक्षाकृत बेहतर हवा का अनुभव किया।
फिर भी तस्वीर पूरी तरह राहतभरी नहीं है, क्योंकि ‘खराब’ श्रेणी वाले शहरों की संख्या में एक दिन में 50 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
सहरसा, बद्दी और सिलीगुड़ी जैसे शहर भी प्रदूषण की मार झेलते दिखे, जबकि नाहरलागुन देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा। कुल मिलाकर, यह तस्वीर बताती है कि भारत की हवा में सुधार और संकट साथ-साथ चल रहे हैं—कहीं राहत है, तो कहीं सांस लेना अब भी खतरे से खाली नहीं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 08 जुलाई 2026 को देश में एक बार फिर आरा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 253 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (07 जुलाई) को आरा में सूचकांक 284 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 31 अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि आरा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
आरा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,580 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में नाहरलागुन की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर आरा की तुलना नाहरलागुन से करें तो वहां स्थिति 18 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 113 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 59 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 54 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गया है।
इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 120 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 118 पर पहुंच गया। इसके साथ ही दो अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 जुलाई 2026 को 229 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 41 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 11 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 5.1 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 7.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 26.7 फीसदी की कमी देखी गई। वहीं दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सहरसा (243) दूसरे जबकि बद्दी (204) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सिलीगुड़ी (183) चौथे स्थान पर है। जैसलमेर (166)– राजसमंद (153) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बांसवाड़ा (149) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुम्मिडीपूंडी (147), नारनौल (139) और भिवानी (133) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (जैसलमेर, राजसमंद, बांसवाड़ा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि आरा, बांसवाड़ा, गुम्मिडीपूंडी, नारनौल, भिवानी, पानीपत, गुरुग्राम, अनंतपुर, फरीदाबाद, करनाल, रूपनगर, मानेसर, यमुना नगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सहरसा, बद्दी, जैसलमेर, विशाखापत्तनम, जोरापोखर, वातवा, छपरा, अगरतला, मैहर, अमृतसर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 41 फीसदी यानी 94 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, दमोह, दौसा, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गडग, गया, गाजियाबाद, गुवाहाटी, हाजीपुर, हापुड़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कारवार, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खैरथल, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नोएडा, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़ आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 110 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बालासोर, बल्लभगढ़, बरबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चूरू, कटक, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जालंधर, जालोर, जोधपुर, कडप्पा, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मंडीखेड़ा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटना, पीथमपुर, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राउरकेला, समस्तीपुर, सतना आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 22 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अंकलेश्वर, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, चरखी दादरी, छपरा, धनबाद, फतेहाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, करनाल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मेहसाणा, नारनौल, पानीपत, तालचेर, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह आरा (253), सहरसा (243) और बद्दी (204) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 229 में से 94 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 110 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 07 जुलाई को यह आंकड़ा 102 दर्ज किया गया था।
22 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर आरा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 253 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (07 जुलाई) को आरा में सूचकांक 284 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 31 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 113 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 59 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 54 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गया है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 120 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 118 पर पहुंच गया। इसके साथ ही दो अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 08 जुलाई को सिलीगुड़ी (183) चौथे स्थान पर है, वहीं सहरसा (243) दूसरे, जबकि बद्दी (204) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 58, गाजियाबाद में 49, गुवाहाटी में 45, गुरूग्राम में 128, नोएडा में 42, ग्रेटर नोएडा में 57 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 57 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 53, चेन्नई में 73, चंडीगढ़ में 47, हैदराबाद में 45, जयपुर में 66 और पटना में 64 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 94 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बागपत, बारां, बरेली, बेलापुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बुलंदशहर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गडग, गया, गाजियाबाद, गुवाहाटी, हाजीपुर, हापुड़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कारवार, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खैरथल, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नोएडा, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, सागर, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, ठाणे, उलहासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, वृंदावन शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंगुल, अररिया, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बरबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चूरू, कटक, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जालंधर, जालोर, जोधपुर, कडप्पा, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मंडीखेड़ा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटना, पीथमपुर, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राउरकेला, समस्तीपुर, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, विजयवाड़ा आदि 110 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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