1 अक्टूबर 2026 को देश के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 247 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण में उत्तर प्रदेश प्रदूषण के नए हॉटस्पॉट के रूप में उभरता दिखाई दिया।
फतेहपुर सीकरी में एक्यूआई 324 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है। इसके साथ ही मथुरा (269), खोरा (264) और बुलंदशहर (239) भी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के सात शहरों की मौजूदगी इस क्षेत्र में बिगड़ती हवा की गंभीरता को रेखांकित करती है।
फतेहपुर सीकरी में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 600 फीसदी अधिक रहा और वहां पीएम10 प्रदूषण प्रमुख रहा। इसके उलट आइजोल में एक्यूआई महज 26 दर्ज किया गया। यानी दोनों शहरों की हवा की गुणवत्ता में 12 गुने से अधिक का अंतर रहा।
देशभर में 33 शहरों में हवा ‘बेहतर’, 110 में ‘संतोषजनक’ और 99 शहरों में ‘मध्यम’ रही। दिल्ली में एक्यूआई 129 से बढ़कर 166 पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में 101 से घटकर 75 हो गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में प्रदूषण का दबाव लगातार बदल रहा है और स्थानीय स्तर पर निगरानी व नियंत्रण की जरूरत बनी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 01 अक्टूबर 2026 को देश में फतेहपुर सीकरी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 324 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (30 सितम्बर) को सरकारी आंकड़ों में फतेहपुर सीकरी का जिक्र नहीं था।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि फतेहपुर सीकरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
फतेहपुर सीकरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 600 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर फतेहपुर सीकरी की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 12.4 गुणा खराब है।
इससे पहले देश में पलवल की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 259 रिकॉर्ड किया गया। लेकिन आज 129 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 130 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 129 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 166 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 37 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 101 दर्ज किया गया था, जो आज 26 अंकों के सुधार के साथ घटकर 75 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में आ गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 01 अक्टूबर 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 13.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 44.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 42.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 3.1 फीसदी की वृद्धि हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 17.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 12.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मथुरा (269) दूसरे जबकि खोरा (264) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बुलंदशहर (239) चौथे स्थान पर है। गुम्मिडीपूंडी (222) – नोएडा (194) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
भिवाड़ी (193) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (191), मंडीदीप (190) और वृंदावन (184) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के सात शहर (फतेहपुर सीकरी, मथुरा, खोरा, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद और वृंदावन) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मथुरा, गुम्मिडीपूंडी, गाजियाबाद, गुरुग्राम, चरखी दादरी, तालचेर, अंकलेश्वर, जींद, मंडी गोबिंदगढ़, हिसार, मेरठ, हापुड़, वडोदरा, मोदीनगर, ब्रजराजनगर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), कानपुर, जालंधर, तिरुमाला, धौलपुर, यमुना नगर, मुंगेर, गांधीनगर, कोलकाता, धारूहेड़ा और लखनऊ आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं फतेहपुर सीकरी, खोरा, बुलंदशहर, नोएडा, भिवाड़ी, मंडीदीप, वृंदावन, कटनी, बागपत, दिल्ली, नारनौल, विशाखापत्तनम, पीथमपुर, सवाई माधोपुर, बर्नीहाट (मेघालय), सिरसा, बहादुरगढ़, चंद्रपुर, दौसा, अगरतला, सीकर, गजरौला, खुर्जा, सूरत, अंबाला, झुंझुनू, फतेहाबाद, पाली, भिवानी, पलवल, श्री गंगानगर, चूरू, जैसलमेर, शामली, टोंक, भावनगर, बद्दी, बीकानेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), नागौर, बिलाईपाड़ा, हनुमानगढ़, परभणी, गोरखपुर, कुरुक्षेत्र, पारादीप, मुजफ्फरनगर, ग्रेटर नोएडा, जोरापोखर, उदयपुर, जयपुर, अहमदाबाद, हावड़ा, भीलवाड़ा, भोपाल, छपरा, देवास, आगरा, भरतपुर, पिंपरी-चिंचवाड़, बूंदी, हिंगोली, कैथल, बारीपाड़ा, पुणे, सागर, सतारा, कोटा, सासाराम, ग्वालियर, जलना, हल्दिया और बैरकपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 13.4 फीसदी यानी 33 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, फिरोजाबाद, गंगटोक, हावेरी, हुबली, कलबुर्गी, करौली, क्योंझर, कोल्हापुर, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नयागढ़, पंचगांव, पंचकुला, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 110 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, बदलापुर, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बाड़मेर, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, बिलासपुर, बोइसर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छाल, चित्तौड़गढ़, दमोह, देहरादून, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, करनाल, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लुधियाना, महाद, मैहर, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 99 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंगुल, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बारीपाड़ा, बैरकपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, एलूर, फतेहाबाद, गजरौला, गांधीनगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कैथल, कानपुर, कटनी, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मोदीनगर, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नारनौल, नोएडा, पाली, पलवल, पारादीप, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, सागर, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, तिरुमाला, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यमुना नगर शामिल हैं।
वहीं देश में आज मथुरा (269), खोरा (264), बुलंदशहर (239) और गुम्मिडीपूंडी (222) में स्थिति खराब, जबकि फतेहपुर सीकरी (324) में बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से 33 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 110 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 30 सितम्बर को यह आंकड़ा 133 दर्ज किया गया था।
99 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज फतेहपुर सीकरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 324 दर्ज किया गया, जोकि ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (30 सितम्बर) को सरकारी आंकड़ों में फतेहपुर सीकरी का जिक्र नहीं था।
इससे पहले देश में पलवल की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 259 रिकॉर्ड किया गया। लेकिन आज 129 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 130 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 129 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 166 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 37 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 101 दर्ज किया गया था, जो आज 26 अंकों के सुधार के साथ घटकर 75 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में आ गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 01 अक्टूबर को बुलंदशहर (239) चौथे स्थान पर है, वहीं मथुरा (269) दूसरे, जबकि खोरा (264) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 105, गाजियाबाद में 191, गुवाहाटी में 58, गुरूग्राम में 182, नोएडा में 194, ग्रेटर नोएडा में 116 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 79 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 103, चेन्नई में 93, चंडीगढ़ में 49, हैदराबाद में 80, जयपुर में 115 और पटना में 79 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 33 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बठिंडा, बेलगाम, बेतिया, चामराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, फिरोजाबाद, गंगटोक, हावेरी, हुबली, कलबुर्गी, करौली, क्योंझर, कोल्हापुर, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नयागढ़, पंचगांव, पंचकुला, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह और उडुपी शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अकोला, अलवर, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, बदलापुर, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बाड़मेर, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, बिलासपुर, बोइसर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छाल, चित्तौड़गढ़, दमोह, देहरादून, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, करनाल, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लुधियाना, महाद, मैहर, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, सतना, सिरोही, सोलापुर, सोनीपत, श्रीनगर, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा और विरार आदि 110 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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