21 अक्टूबर 2026 को देश में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर चिंताजनक तस्वीर पेश की।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, खोरा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) एक दिन में 89 अंक उछलकर 317 पर पहुंच गया। यह हवा की ‘बेहद खराब’ स्थिति को दर्शाता है।
बरौत (288), ग्रेटर नोएडा (280), हापुड़ (258) और खुर्जा (257) भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में आठ उत्तर प्रदेश के हैं, जो इस क्षेत्र में गहराते प्रदूषण संकट की ओर इशारा करते हैं।
दिल्ली में भी हवा तेजी से बिगड़ी। यहां एक्यूआई 179 से बढ़कर 245 हो गया, यानी 24 घंटे में 66 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
इसके उलट बल्लभगढ़ में प्रदूषण का स्तर 310 से घटकर 216 पर आ गया। देश के 256 शहरों के आंकड़ों से पता चला कि 24 शहरों में हवा ‘खराब’ श्रेणी में रही, जबकि एक दिन पहले ऐसे शहरों की संख्या 12 थी। केवल 22 शहरों में हवा ‘बेहतर’ रही, जबकि 111 शहरों में वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ दर्ज की गई।
प्रदूषण के महीन कण पीएम2.5 और पीएम10 कई शहरों की हवा को दूषित कर रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि साफ हवा का संकट अब कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि देश के अनेक हिस्सों में लोगों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 21 अक्टूबर 2026 को देश में खोरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 317 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (20 अक्टूबर) को खोरा में सूचकांक 228 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 89 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि खोरा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
खोरा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में बेतिया की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 27 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर खोरा की तुलना बेतिया से करें तो वहां स्थिति 11.7 गुणा खराब है।
इससे पहले कल बल्लभगढ़ में एक्यूआई 310 दर्ज किया गया। हालांकि आज 94 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 216 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में भारी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 179 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 245 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 66 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 120 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 123 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 3 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 21 अक्टूबर 2026 को 256 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 8.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 43.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 48 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 7.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। वहीं आज 24 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती 12 रिकॉर्ड की गई थी।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बरौत (288) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (280) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह हापुड़ (258) चौथे स्थान पर है। खुर्जा – खोरा (257) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बागपत (254) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में श्री गंगानगर (253), नोएडा (249) और चरखी दादरी (248) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के आठ शहर (खोरा, बरौत, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, खुर्जा, मुजफ्फरनगर, बागपत और नोएडा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि खोरा, बरौत, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, खुर्जा, मुजफ्फरनगर, बागपत, नोएडा, चरखी दादरी, दिल्ली, मानेसर, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, हनुमानगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, खैरथल, बुलंदशहर, करनाल, जालंधर, मेहसाणा, जींद, पानीपत, भावनगर, रोहतक, यमुनानगर, कानपुर, पीथमपुर, कोटा, हिंगोली, लुधियाना, सागर, विशाखापत्तनम, अंबाला, कुरुक्षेत्र, आगरा, राजकोट, सवाई माधोपुर, पिंपरी-चिंचवड़, मालेगांव, चित्तौड़गढ़, जालना, पाली, कैथल, मुरादाबाद, लखनऊ, वातवा, अररिया, पुणे, धारूहेड़ा, मुंबई, उज्जैन, बरेली, अमृतसर, अंकलेश्वर, अलवर, डूंगरपुर, पटना, नवी मुंबई और देवास आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं श्री गंगानगर, भिवाड़ी, बीकानेर, बल्लभगढ़, बर्नीहाट (मेघालय), सिरसा, भरतपुर, वृंदावन, टोंक, नारनौल, नागौर, पारादीप, सीकर, ग्वालियर, हिसार, अगरतला, सतारा, दौसा, बठिंडा, बूंदी, मंडीदीप, जालोर, बेलापुर, सासाराम, श्रीकाकुलम, फतेहाबाद, मथुरा, जैसलमेर, मंडी गोबिंदगढ़, भिवानी, चुरू, अहमदाबाद, जोधपुर, वाराणसी, फरीदाबाद, झुंझुनू, गांधीनगर, भोपाल, शामली, भिवंडी, नागपुर, भीलवाड़ा, करौली, गोरखपुर, दमोह, बद्दी, जबलपुर, राजमहेंद्रवरम, सूरत, धौलपुर, गया, अहमदनगर, झांसी, बारां और छपरा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 8.6 फीसदी यानी 22 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, हावेरी, कलबुर्गी, क्योंझर, किशनगंज, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मिलुपारा, मैसूरु, नाहरलागुन, पंचकूला, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 111 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, कटक, दरभंगा, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कारवार, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, मैहर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नांदेड़, नासिक, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, परभणी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 98 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अंबाला, अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, बद्दी, बारां, बारबिल, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), छपरा, चित्तौड़गढ़, चुरू, दमोह, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्वालियर, हिंगोली, हिसार, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कानपुर, करौली, करनाल, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, नागौर, नागपुर, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पानीपत, पारादीप, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रोहतक, सागर, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिरसा, श्रीकाकुलम, सूरत, टोंक, उज्जैन, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यमुनानगर शामिल हैं।
इसी तरह बरौत, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, खुर्जा, मुजफ्फरनगर, बागपत, श्री गंगानगर, नोएडा, चरखी दादरी, दिल्ली, भिवाड़ी, मानेसर, अंगुल, फतेहपुर सीकरी, बीकानेर, गजरौला, हनुमानगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, बल्लभगढ़, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, खैरथल और बुलंदशहर में स्थिति खराब जबकि खोरा (317) में बेहद खराब दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 256 में से 22 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 111 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 20 अक्टूबर को यह आंकड़ा 120 दर्ज किया गया था।
98 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज खोरा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 317 दर्ज किया गया, जोकि ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (20 अक्टूबर) को खोरा में सूचकांक 228 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 89 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल बल्लभगढ़ में एक्यूआई 310 दर्ज किया गया। हालांकि आज 94 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 216 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में भारी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 179 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 245 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 66 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 120 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 123 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 3 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 21 अक्टूबर को हापुड़ (258) चौथे स्थान पर है, वहीं बरौत (288) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (280) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 156, गाजियाबाद में 223, गुवाहाटी में 79, गुरूग्राम में 216, नोएडा में 249, ग्रेटर नोएडा में 280 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 113 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 124, चेन्नई में 54, चंडीगढ़ में 65, हैदराबाद में 70, जयपुर में 131 और पटना में 104 दर्ज किया गया।
देश के जिन 22 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बेतिया, बक्सर, चामराजनगर, गंगटोक, हावेरी, कलबुर्गी, क्योंझर, किशनगंज, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मिलुपारा, मैसूरु, नाहरलागुन, पंचकूला, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, कटक, दरभंगा, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कारवार, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, मैहर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नांदेड़, नासिक, नयागढ़, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, परभणी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सांगली, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, सोनीपत, श्रीनगर, सुआकाती, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उडुपी, उल्हासनगर, वडोदरा, विजयवाड़ा और विरार आदि 111 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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