देश में हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और हरियाणा का चरखी दादरी लगातार चौथे दिन सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा है।
21 मई 2026 को चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 336 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। हालत इतनी गंभीर है कि यहां पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि लोग हर सांस के साथ बीमारी को अपने शरीर में उतार रहे हैं।
राजधानी दिल्ली में भी हालात तेजी से बिगड़े हैं। पिछले 24 घंटों में दिल्ली का एक्यूआई 168 से बढ़कर 209 पहुंच गया, जिससे हवा फिर ‘खराब’ श्रेणी में चली गई। देश के कुल 239 शहरों के विश्लेषण में सामने आया कि करीब 48 फीसदी शहरों की हवा चिंताजनक बनी हुई है, जबकि साफ हवा वाले शहरों की संख्या लगातार घट रही है।
सिंगरौली, ग्रेटर नोएडा, श्रीगंगानगर, मेरठ और नोएडा भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
खास बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर शामिल हैं। दूसरी तरफ मदिकेरी, मुंबई और शिलांग जैसे शहर राहत की सांस ले रहे हैं, जहां हवा अपेक्षाकृत साफ बनी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 21 मई 2026 को देश में एक बार फिर चरखी दादरी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 336 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 308 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 28 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 24 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 168 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 209 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 41 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से एक बार फिर खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 210 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 201 पर पहुंच गया। हालांकि वहां वायु गुणवत्ता आज भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 21 मई 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 11.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 40.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 47.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 3.4 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 5.8 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से 5.2 फीसदी की कमी आई है। वहीं दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 58.3 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (336) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (314) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह श्री गंगानगर (305) चौथे स्थान पर है। मंडी गोबिंदगढ़- मेरठ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 296 और 282 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
नोएडा (272) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बुलंदशहर (257), गाजियाबाद (251) और पंचगांव (243) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (ग्रेटर नोएडा, मेरठ, नोएडा, बुलंदशहर, गाजियाबाद) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, मंडी गोबिंदगढ़, पंचगांव, बिलीपाड़ा, जींद, हाजीपुर, बहादुरगढ़, करनाल, अंबाला, बर्नीहाट (असम), मानेसर, मंडीदीप, भिवानी, बिहार शरीफ, राजकोट, पंचकुला, खन्ना, बिलासपुर, लुधियाना, राजगीर, धारूहेड़ा, बक्सर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सिंगरौली, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, नोएडा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, नयागढ़, मंगुराहा, बल्लभगढ़, पानीपत, मुजफ्फरनगर, दिल्ली, बागपत, चंद्रपुर, फरीदाबाद, दौसा, भिवाड़ी, गुरुग्राम, बाड़मेर, कुरुक्षेत्र, चुरू, जैसलमेर, यमुना नगर, कटक, अंगुल, बारबिल, जोरापोखर, सीकर, बेगूसराय, झुंझुनू, खुर्जा, सुआकाती, विशाखापत्तनम, हनुमानगढ़, गया, जयपुर, जोधपुर, पीथमपुर, लखनऊ, टोंक, देवास, मुरादाबाद, मेहसाणा, पाली, करौली, वातवा, रोहतक, नागौर, कटनी, वाराणसी, भीलवाड़ा, अहमदाबाद, आगरा, अलवर, भोपाल, पटियाला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), रायपुर, सवाई माधोपुर, उदयपुर, बारां, वृंदावन, फतेहाबाद, छपरा, प्रतापगढ़, अमृतसर, भागलपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 11.7 फीसदी यानी 28 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुणे, राजसमंद, रामनगर, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 97 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भरतपुर, भावनगर, भिलाई, भिवंडी, बोइसर, बूंदी, चंडीगढ़, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीखेड़ा, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, पलवल, पंपोर, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 91 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बेगूसराय, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छपरा, चुरू, कटक, दौसा, देहरादून, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, करौली, करनाल, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंडीदीप, मानेसर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, पाली, पंचकुला, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, ऋषिकेश, रोहतक, सागर, सवाई माधोपुर, सीकर, सुआकाती, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, बल्लभगढ़, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, चंद्रपुर, दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, हाजीपुर, हापुड़, जींद, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नयागढ़, नोएडा, पंचगांव, पानीपत में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं चरखी दादरी (336), ग्रेटर नोएडा (314), सिंगरौली (317) और श्री गंगानगर (305) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से 28 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 97 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 20 मई को यह आंकड़ा 103 दर्ज किया गया था।
91 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज फिर चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 336 दर्ज किया गया। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 308 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 28 अंकों का इजाफा हुआ है। आज भी चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 168 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 209 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 41 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से एक बार फिर खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 210 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 201 पर पहुंच गया। हालांकि वहां वायु गुणवत्ता आज भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 21 मई को श्री गंगानगर चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (317) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (314) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 95, गाजियाबाद में 251, गुवाहाटी में 96, गुरूग्राम में 194, नोएडा में 272, ग्रेटर नोएडा में 314 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 41 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 135, चेन्नई में 154, चंडीगढ़ में 88, हैदराबाद में 72, जयपुर में 138 और पटना में 107 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 28 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, बागलकोट, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, गंगटोक, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुणे, राजसमंद, रामनगर, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर, विरुधुनगर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भिलाई, भिवंडी, बोइसर, बूंदी, चंडीगढ़, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीखेड़ा, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, पलवल, पंपोर, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विरार आदि 97 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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