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वायु

सिर्फ 24 घंटों में बदली तस्वीर: बांसवाड़ा सबसे प्रदूषित, बढ़कर 241 तक पहुंचा एक्यूआई

दिल्ली में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 64 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 73 पर पहुंच गया।

Lalit Maurya

  • सिर्फ 24 घंटों में देश की हवा की तस्वीर तेजी से बदल गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 23 जुलाई 2026 को राजस्थान का बांसवाड़ा देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 से उछलकर 241 पर पहुंच गया।

  • यानी महज एक दिन में प्रदूषण 115 अंक बढ़ गया और शहर की हवा विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 435 फीसदी अधिक प्रदूषित हो गई।

  • इसके विपरीत गंगटोक 13 एक्यूआई के साथ देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जिससे दोनों शहरों के बीच प्रदूषण का अंतर 18.5 गुना तक पहुंच गया।

  • राहत की बात यह है कि देश के 245 में से 134 शहरों (54.7 फीसदी) में हवा 'बेहतर' और 96 शहरों (39.2 फीसदी) में 'संतोषजनक' रही, हालांकि मध्यम श्रेणी वाले शहरों की संख्या में 40 फीसदी की बढ़ोतरी चिंता बढ़ाती है।

  • दिल्ली में भी एक दिन में एक्यूआई 64 से बढ़कर 73 हो गया, जबकि फरीदाबाद में 96 से घटकर 88 दर्ज किया गया।

  • आंकड़े यह भी बताते हैं कि कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे सूक्ष्म कण प्रदूषण की मुख्य वजह बने हुए हैं। इससे साफ है कि मानसूनी मौसम के बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों में वायु गुणवत्ता तेजी से बदल रही है और स्थानीय प्रदूषण स्रोत अब भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 23 जुलाई 2026 को देश में बांसवाड़ा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 241 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल (22 जुलाई) को बांसवाड़ा में एक्यूआई 126 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 115 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि बांसवाड़ा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

बांसवाड़ा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 435 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बांसवाड़ा की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 18.5 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में सासाराम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 295 दर्ज किया गया। आज सरकारी रुझानों में सासाराम में एक्यूआई 168 दर्ज किया गया। मतलब की 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 127 अंकों का भारी सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 64 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 73 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 9 अंकों का उछाल आया है। हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।  

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 22 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 96 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 88 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 8 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 23 जुलाई 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 54.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 39.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 6.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 2.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों में 5.5 फीसदी का उछाल आया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 40 फीसदी की वृद्धि देखी गई, जोकि चिंता का विषय है।   

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में नारनौल (177) दूसरे जबकि सासाराम (168) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पानीपत (164) चौथे स्थान पर है। करनाल (121) – मंडी गोबिंदगढ़ (121) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

विशाखापत्तनम सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सिलीगुड़ी (118), सोनीपत (112) और गुवाहाटी (106) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (नारनौल, पानीपत, करनाल, सोनीपत) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि नारनौल, सासाराम, पानीपत, करनाल, गुम्मिडीपूंडी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बांसवाड़ा, मंडी गोबिंदगढ़, विशाखापत्तनम, सोनीपत, ग्रेटर नोएडा, सिवान आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 54.7 फीसदी यानी 134 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्कमगलुरु, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, दौसा, देहरादून, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गया, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जलना, झालावाड़, जींद, जोधपुर, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कारवार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैहर, मंडीदीप, मैंगलोर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, रायपुर आदि शामिल हैं।

इसीतरहदेशके96 शहरोंमेंवायुगुणवत्तासंतोषजनकदर्जकीगई।इनमेंगोरखपुर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हिसार, हावड़ा, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालौर, झांसी, झुंझुनू, जोरापोखर, कडप्पा, कानपुर, खन्ना, किशनगंज, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पटना, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, सतना, शामली, सिलचर, सिरसा, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वातवा आदिशहरशामिलहैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 14 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें धनबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, करनाल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, नारनौल, पानीपत, सासाराम, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं। वहीं बांसवाड़ा (241) में स्थिति खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से 134 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 96 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 22 जुलाई को यह आंकड़ा 91 दर्ज किया गया था।

14 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज बांसवाड़ा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 241 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (22 जुलाई) बांसवाड़ा में एक्यूआई 126 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 115 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

इससे पहले कल देश में सासाराम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 295 दर्ज किया गया। आज सरकारी रुझानों में सासाराम में एक्यूआई 168 दर्ज किया गया। मतलब की 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 127 अंकों का भारी सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 64 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 73 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 9 अंकों का उछाल आया है। हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।  

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 96 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 88 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 8 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 23 जुलाई को पानीपत (164) चौथे स्थान पर है, वहीं नारनौल (177) दूसरे, जबकि सासाराम (168) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 59, गाजियाबाद में 59, गुवाहाटी में 106, गुरूग्राम में 90, नोएडा में 61, ग्रेटर नोएडा में 105 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 38 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 55, चेन्नई में 100, चंडीगढ़ में 32, हैदराबाद में 45, जयपुर में 57 और पटना में 58 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 134 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बारबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्कमगलुरु, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, दौसा, देहरादून, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गया, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जलना, झालावाड़, जींद, जोधपुर, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कारवार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैहर, मंडीदीप, मैंगलोर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सवाई माधोपुर, शिलांग, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बारां, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेंगलुरु, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, कटक, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हिसार, हावड़ा, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालौर, झांसी, झुंझुनू, जोरापोखर, कडप्पा, कानपुर, खन्ना, किशनगंज, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पटना, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, सतना, शामली, सिलचर, सिरसा, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वातवा, विजयवाड़ा, यमुना नगर आदि 96 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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