वायु

हवा की बदली तस्वीर: जैसलमेर में 390 पर पहुंचा एक्यूआई, 254 अंकों के साथ दूसरे पायदान पर रायबरेली

दिल्ली-फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 65 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 140 पर पहुंच गया है।

Lalit Maurya

  • देश में 11 जुलाई 2026 को वायु गुणवत्ता की तस्वीर में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 248 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार राजस्थान का जैसलमेर लगातार दूसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 390 तक पहुंच गया।

  • महज 24 घंटों में यहां प्रदूषण 137 अंक बढ़ा और पीएम10 कणों के कारण स्थिति विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 760 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई। इसके विपरीत आइजोल 14 एक्यूआई के साथ देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा।

  • रायबरेली (254) और बाड़मेर (247) क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे प्रदूषित शहर रहे, जबकि राजस्थान के तीन शहर देश के शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।

  • दिल्ली (140) और फरीदाबाद (155) में भी एक दिन के भीतर प्रदूषण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई और दोनों शहर ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गए।

  • विश्लेषण से यह भी सामने आया कि साफ हवा वाले शहरों की संख्या में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि खराब और मध्यम श्रेणी वाले शहरों की संख्या तेजी से बढ़ी।

  • हालांकि, इसके बावजूद देश के लगभग 79 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता अभी भी ‘बेहतर’ या ‘संतोषजनक’ श्रेणी में बनी हुई है, लेकिन कई क्षेत्रों में प्रदूषण के तेजी से बिगड़ते रुझान गंभीर चिंता का संकेत दे रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 11 जुलाई 2026 को देश में एक बार फिर जैसलमेर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 390 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (10 जुलाई) को जैसलमेर में सूचकांक 253 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 137 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि जैसलमेर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

जैसलमेर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 760 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर जैसलमेर की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 27.8 गुणा खराब है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 65 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 140 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 75 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 10 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 97 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 155 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 58 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 11 जुलाई 2026 को 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 18.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 60.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 21 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 24.6 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 84 फीसदी का उछाल देखा गया। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 150 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।   

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में रायबरेली (254) दूसरे जबकि बाड़मेर (247) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह आरा (228) चौथे स्थान पर है। बीकानेर (217)– ग्रेटर नोएडा (206) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बल्लभगढ़ (198) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (180), बुलंदशहर (178) और पंचगांव (169) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि आरा, बल्लभगढ़, गुरुग्राम, पंचगांव, फरीदाबाद, मानेसर, चरखी दादरी, जींद, सिरसा, अलवर, भिवानी, मोतिहारी, गुम्मिडीपूंडी, नारनौल, वातवा, पटना, बहादुरगढ़, गुवाहाटी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं जैसलमेर, रायबरेली, बाड़मेर, बीकानेर, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, चुरू, दिल्ली, गाजियाबाद, विशाखापत्तनम, दौसा, श्री गंगानगर, नोएडा, फतेहाबाद, विरार, टोंक, अगरतला, सीकर, अंगुल, बद्दी, छपरा, मंडी गोबिंदगढ़, जोरापोखर, हनुमानगढ़, सोनीपत, करौली, खैरथल, मंडीदीप, सवाई माधोपुर, जयपुर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 18.5 फीसदी यानी 46 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेगूसराय, भिलाई, भिवंडी, बिहार शरीफ, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, देहरादून, धौलपुर, डोंबिवली, गडग, गुंटूर, हिंगोली, जलगांव, काशीपुर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, मदिकेरी, मैहर, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, नंदेसरी, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, प्रयागराज, पुडुचेरी, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 150 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, देवास, धनबाद, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, खन्ना, खोरा, खुर्जा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मैंगलोर, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पलवल, पानीपत, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 46 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवानी, बुलंदशहर, चरखी दादरी, छपरा, चुरू, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, जयपुर, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, करौली, खैरथल, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मोतिहारी, नारनौल, नोएडा, पंचगांव, पटना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, टोंक, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।

इसी तरह आरा, बाड़मेर, बीकानेर, ग्रेटर नोएडा, रायबरेली में स्थिति खराब, जबकि जैसलमेर (390) में बेहद खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 248 में से 46 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 150 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 जुलाई को यह आंकड़ा 150 दर्ज किया गया था।

46 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर जैसलमेर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 390 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (10 जुलाई) को जैसलमेर में सूचकांक 253 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 137 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 65 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 140 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 75 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 97 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 155 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 58 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 11 जुलाई को आरा (228) चौथे स्थान पर है, वहीं रायबरेली (254) दूसरे, जबकि बाड़मेर (247) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 80, गाजियाबाद में 139, गुवाहाटी में 101, गुरूग्राम में 180, नोएडा में 132, ग्रेटर नोएडा में 206 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 63 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 57, चेन्नई में 79, चंडीगढ़ में 44, हैदराबाद में 57, जयपुर में 103 और पटना में 103 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 46 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, बदलापुर, बरेली, बेगूसराय, भिलाई, भिवंडी, बिहार शरीफ, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, देहरादून, धौलपुर, डोंबिवली, गडग, गुंटूर, हिंगोली, जलगांव, काशीपुर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, मदिकेरी, मैहर, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, नंदेसरी, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, प्रयागराज, पुडुचेरी, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, देवास, धनबाद, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, खन्ना, खोरा, खुर्जा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मैंगलोर, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पलवल, पानीपत, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सतना, सिंगरौली, सिरोही, सुआकाती, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यमुना नगर आदि 150 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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