देश में वायु प्रदूषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 27 मई 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि राजस्थान का श्रीगंगानगर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 दर्ज किया गया।
हालांकि यह पिछले दिन के मुकाबले 12 अंक कम है, लेकिन यहां हवा में ओजोन का स्तर इतना ज्यादा है कि प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 400 फीसदी ऊपर पहुंच गया है। इसके उलट तिरुवनंतपुरम देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 17 दर्ज किया गया, यानी श्रीगंगानगर की हवा उससे 17.6 गुणा ज्यादा जहरीली रही।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश के 44.2 फीसदी शहरों में हवा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सिंगरौली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा जैसे शहर भी सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहे।
वहीं राहत की बात यह है कि दिल्ली और फरीदाबाद में प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली का एक्यूआई 252 से घटकर 190 और फरीदाबाद का 213 से घटकर 188 पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक कई शहरों में पीएम2.5, पीएम10 और ओजोन प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 27 मई 2026 को देश में श्री गंगानगर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल श्री गंगानगर में सूचकांक 312 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 12 अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि श्री गंगानगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
श्री गंगानगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में तिरुवनंतपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर श्री गंगानगर की तुलना तिरुवनंतपुरम से करें तो वहां स्थिति 17.6 गुणा खराब है।
वहीं कल मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 341 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 111 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 230 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 252 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 190 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 62 अंकों के सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 213 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 188 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 27 मई 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 14.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 41.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 44.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 8.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 9.6 फीसदी का उछाल आया है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 36.8 फीसदी का कमी दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (290) दूसरे जबकि मेरठ (283) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मुजफ्फरनगर (268) चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद-बल्लभगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (234) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बहादुरगढ़ (232), मंडी गोबिंदगढ़ (230) और मिलुपारा (218) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह शहर (मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, ग्रेटर नोएडा, बागपत) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बहादुरगढ़, मंडी गोबिंदगढ़, भिवानी, मानेसर, कैथल, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, बर्नीहाट (असम), नारनौल, करनाल, बिलासपुर, पंचकुला, पंचगांव, जयपुर, अंबाला, जींद, कोटा, धौलपुर, बिलाईपाड़ा, वातवा, लखनऊ, रोहतक, खन्ना, गुम्मिडीपूंडी, किशनगंज, रायपुर, चरखी दादरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सिंगरौली, बल्लभगढ़, पानीपत, गुरुग्राम, हापुड़, बागपत, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, चूरू, सवाई माधोपुर, कटनी, बुलंदशहर, दमोह, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, करौली, सिरसा, बीकानेर, मेहसाणा, उदयपुर, मंडीदीप, टोंक, सीकर, बारां, दौसा, झुंझुनू, हनुमानगढ़, पीथमपुर, विशाखापत्तनम, धनबाद, सागर, पाली, प्रतापगढ़, भोपाल, जोरापोखर, थूथुकुडी, देवास, अमृतसर, पटियाला, लुधियाना, बाड़मेर, चित्तौड़गढ़, फतेहाबाद, अंगुल, बांसवाड़ा, नयागढ़, झालावाड़, नागपुर, सिरोही, आगरा, बारबिल, मुरादाबाद, देहरादून, जोधपुर, वाराणसी, अजमेर, जालोर, गांधीनगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 14.6 फीसदी यानी 34 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अंबरनाथ, अररिया, बागलकोट, बक्सर, चामराजनगर, कोयंबटूर, गडग, गंगटोक, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, नंदेसरी, नासिक, पंपोर, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, राजगीर, रामनगर, सांगली आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 96 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, कटक, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, क्योंझर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, नागांव, नागौर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नवी मुंबई, नेल्लोर, परभणी, पटना, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 91 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अजमेर, अंबाला, अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दौसा, देहरादून, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जबलपुर, जयपुर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, करौली, करनाल, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंडीदीप, मानेसर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नारनौल, नयागढ़, पाली, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पानीपत, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायपुर, रोहतक, सागर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, थूथुकुडी, टोंक, उदयपुर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवानी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मिलुपारा, मुजफ्फरनगर, नोएडा, सिंगरौली, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से 34 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 96 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 26 मई को यह आंकड़ा 94 दर्ज किया गया था।
91 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज श्री गंगानगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 दर्ज किया गया। इससे पहले कल श्री गंगानगर में सूचकांक 312 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 12 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही आज श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' से 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
वहीं कल मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 341 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 111 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 230 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 252 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 190 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 62 अंकों के सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 213 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 188 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 27 मई को मुजफ्फरनगर (268) चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (290) दूसरे, जबकि मेरठ (283) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 146, गाजियाबाद में 241, गुवाहाटी में 100, गुरूग्राम में 191, नोएडा में 202, ग्रेटर नोएडा में 234 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 44 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 121, चेन्नई में 68, चंडीगढ़ में 118, हैदराबाद में 73, जयपुर में 150 और पटना में 96 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 34 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अंबरनाथ, अररिया, बागलकोट, बक्सर, चामराजनगर, कोयंबटूर, गडग, गंगटोक, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, नंदेसरी, नासिक, पंपोर, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, राजगीर, रामनगर, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भावनगर, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, कटक, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, क्योंझर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, नागांव, नागौर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नवी मुंबई, नेल्लोर, परभणी, पटना, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सतना, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन आदि 96 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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