03 मार्च 2026 को देश की हवा का संकट और गहरा गया। हरियाणा का सिरसा 381 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां प्रदूषण स्तर डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक दर्ज किया गया। हैरानी की बात यह है कि एक दिन पहले तक सरकारी आंकड़ों में सिरसा का नाम तक नहीं था।
राज्य के पांच शहर देश के टॉप-10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जो हरियाणा में बिगड़ते हालात की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।
राजधानी दिल्ली में 24 घंटे के भीतर एक्यूआई 23 अंकों की छलांग लगाकर 216 पर पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद भी ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में खिसक गया। देशभर के 243 शहरों के विश्लेषण से सामने आया कि महज 3.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है, जबकि 66 प्रतिशत से ज्यादा शहरों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
एक तरफ जहां सिरसा, बल्लभगढ़ और कटक जैसे शहर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में हैं, वहीं श्रीनगर 32 एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा, सिरसा की तुलना में 11 गुना बेहतर।
आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि प्रदूषण का दबाव अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे और औद्योगिक शहर तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।
विश्लेषण के मुताबिक 03 मार्च 2026 को देश में सिरसा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 381 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल सरकारी आंकड़ों में सिरसा का जिक्र नहीं था।
रुझानों में सामने आया है कि सिरसा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। सिरसा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 32 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सिरसा की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 11 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में कटक की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 302 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज दो अंकों के उछाल के साथ वहां सूचकांक बढ़कर 304 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 193 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 216 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 23 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 250 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 192 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 211 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 03 मार्च 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 30.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 66.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 14.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 28.8 फीसदी की कमी आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 26 फीसदी इजाफा हुआ है। इसी तरह खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से करीब 42.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बल्लभगढ़ (316) दूसरे जबकि कटक (304) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 291 अंकों के साथ चरखी दादरी चौथे स्थान पर है। अंगुल-मंडी गोबिंदगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 255 और 254 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
धारूहेड़ा (252) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (250), तालचेर (243) और भिवाड़ी (242) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (सिरसा, बल्लभगढ़, चरखी दादरी, धारूहेड़ा, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, मंडी गोबिंदगढ़, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, भिवाड़ी, बहादुरगढ़, अंकलेश्वर, गुम्मिडीपूंडी, अगरतला, फरीदाबाद, नोएडा, उज्जैन, कुरुक्षेत्र, पानीपत, ग्वालियर, सूरत, गांधीनगर, पंचगांव, कोलकाता, भोपाल, जयपुर, मानेसर, जींद, अहमदाबाद, उल्हासनगर, इंदौर, बर्नीहाट, हल्दिया, वापी, बोइसर, हाजीपुर, नलबाड़ी, धुले, हावड़ा, मंगुराहा, बालासोर, भुवनेश्वर, जलगांव, झालावाड़, लखनऊ आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सिरसा, बल्लभगढ़, तालचेर, ग्रेटर नोएडा, बिलीपाड़ा, गाजियाबाद, सिंगरौली, नयागढ़, बुलंदशहर, सवाई माधोपुर, वातवा, पीथमपुर, भीलवाड़ा, श्री गंगानगर, सीकर, टोंक, मंडीदीप, मालेगांव, चंद्रपुर, बागपत, झुंझुनू, विशाखापत्तनम, खुर्जा, कटनी, रामनगर, मुजफ्फरनगर, पाली, सहरसा, हनुमानगढ़, अलवर, नागौर, कुंजेमुरा, भिवंडी, बद्दी, बदलापुर, क्योंझर, दमोह, बीकानेर, चूरू, रतलाम, जालंधर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), जैसलमेर, पटियाला, महाड, अजमेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 3.3 फीसदी यानी महज 8 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, मदिकेरी, पंपोर, पंचकुला, राजगीर, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 74 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें कोयंबटूर, दौसा, देहरादून, धारवाड़, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, कटिहार, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मंडीखेड़ा, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नासिक, पलवल, परभनी, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 138 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अररिया, आसनसोल, बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, देवास, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, ठाणे, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वातवा, विशाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 20 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अगरतला, अंगुल, अंकलेश्वर, बहादुरगढ़, भिवाड़ी, बिलीपाड़ा, ब्यासनगर, चरखी दादरी, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, मंडी गोबिंदगढ़, नयागढ़, नोएडा, सिंगरौली, तालचेर शामिल हैं। वहीं सिरसा, बल्लभगढ़, तालचेर में स्थिति बेहद खराब है, जहां एक्यूआई 300 के पार पहुंच गया है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से महज आठ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 74 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 02 मार्च को यह आंकड़ा 104 दर्ज किया गया था।
138 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सिरसा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 381 पर पहुंच गया। हालांकि कल सरकारी आंकड़ों में सिरसा का जिक्र नहीं था।
गौरतलब है कि कल देश में कटक की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 302 दर्ज किया गया था। हालांकि आज दो अंकों के उछाल के साथ वहां सूचकांक बढ़कर 304 पर पहुंच गया। मतलब कि कटक में वायु गुणवत्ता आज भी ‘बेहद खराब’ बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 193 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 216 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 23 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 250 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 192 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 211 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 03 मार्च को चरखी दादरी चौथे स्थान पर है, वहीं बल्लभगढ़ (316) दूसरे, जबकि कटक (304) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 183, गाजियाबाद में 203, गुवाहाटी में 109, गुरूग्राम में 250, नोएडा में 202, ग्रेटर नोएडा में 230 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 111 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 147, चेन्नई में 115, चंडीगढ़ में 94, हैदराबाद में 87, जयपुर में 173 और पटना में 127 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन आठ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें भिलाई, मदिकेरी, पंपोर, पंचकुला, राजगीर, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर शामिल हैं।
वहीं आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेतिया, भागलपुर, भिवानी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, देहरादून, धारवाड़, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, कटिहार, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मंडीखेड़ा, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नासिक, पलवल, परभनी, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सुआकाती, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन आदि 74 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
बढ़ते ओजोन से कटक में स्थिति बेहद खराब, शिलांग में 200 के पार एक्यूआई