देश में वायु प्रदूषण का संकट तेजी से गहराता नजर आ रहा है। 26 अप्रैल 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, सिंगरौली 349 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा। यहां एक ही दिन में 34 अंकों की खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की गई और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 650 फीसदी अधिक पहुंच गया।
शहर की हवा में पीएम10 जैसे घातक कण हावी हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। इसके विपरीत पुदुचेरी सबसे साफ रहा, जहां एक्यूआई महज 24 दर्ज किया गया। इन दोनों शहरों के बीच प्रदूषण का अंतर 14 गुणा से अधिक हो गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 236 शहरों के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि देश के लगभग 47.9 फीसदी शहरों में हवा चिंताजनक स्तर पर है, जबकि केवल 9.3 फीसदी शहरों में ही साफ हवा दर्ज की गई।
बागपत, रोहतक, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा जैसे शहर भी प्रदूषण के मामले में टॉप पर हैं।
हालांकि दिल्ली और फरीदाबाद जैसे शहरों में हल्का सुधार देखा गया, लेकिन दिल्ली में हवा अभी भी ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। कुल मिलाकर तस्वीर यह बताती है कि देश में हालात अभी भी चिंताजनक हैं। इसके साथ ही प्रदूषण अब एक खामोश लेकिन घातक आपदा बनकर हर सांस के साथ लोगों की सेहत पर हमला कर रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 26 अप्रैल 2026 को देश में सिंगरौली सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 349 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 34 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सिंगरौली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 650 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पुदुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 24 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सिंगरौली की तुलना पुदुचेरी से करें तो वहां स्थिति 14.5 गुणा खराब है।
इससे पहले कल (25 अप्रैल 2026) देश में ग्रेटर नोएडा की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 326 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 66 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक 260 पर पहुंच गया है। ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता आज ‘खराब’ बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 243 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 222 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 21 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 163 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 122 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 26 अप्रैल 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 9.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 42.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 47.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.3 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 3.1 फीसदी का उछाल आया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 4.1 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बागपत (287) दूसरे जबकि रोहतक (285) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गाजियाबाद (272) चौथे स्थान पर है। श्री गंगानगर- ग्रेटर नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 264 और 260 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
कैथल (251) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मेरठ (243), बुलंदशहर (231) और सोनीपत (228) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच (बागपत, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बागपत, रोहतक, कैथल, सोनीपत, जींद, पानीपत, मानेसर, बहादुरगढ़, भिवानी, यमुना नगर, पंचगांव, लखनऊ, मंडीदीप, बिलासपुर, करनाल, सोलापुर, नारनौल, फतेहाबाद, खुर्जा, लातूर, खन्ना, हनुमानगढ़, बल्लभगढ़, वातवा, नंदेसरी, तिरुपति, फरीदाबाद, पंचकुला, तुमडीह, वापी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सिंगरौली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा, दिल्ली, हापुड़, बद्दी, नांदेड़, गुरुग्राम, हाजीपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, भिवाड़ी, कुरुक्षेत्र, परभनी, चुरू, वाराणसी, मुजफ्फरनगर, बीकानेर, चंद्रपुर, बारां, मेहसाणा, करौली, पीथमपुर, सीकर, जयपुर, आगरा, बेलापुर, वडोदरा, झालावाड़, जलना, दमोह, कोटा, कटनी, अंकलेश्वर, भावनगर, नवी मुंबई, ग्वालियर, भोपाल, बेंगलुरु, चरखी दादरी, देवास, झुंझुनू, गांधीनगर, भीलवाड़ा, पाली, पटियाला, वृंदावन, नयागढ़, नागपुर, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, विशाखापत्तनम, दौसा, प्रतापगढ़, अलवर, जोधपुर, लुधियाना, उदयपुर, कानपुर, जैसलमेर, नागौर, छाल, चित्तौड़गढ़, उल्हासनगर, यादगीर, ब्रजराजनगर, सासाराम, बदलापुर, मालेगांव, सुआकाती, ठाणे आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 9.3 फीसदी यानी महज 22 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, एलुरु, गुवाहाटी, हावड़ा, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, श्रीनगर शामिल हैं।
इसी तरह देश के 101 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेतिया, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, कटक, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, मछलीपट्टनम, मदुरई, मैहर, मंडी गोबिंदगढ़, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नलबाड़ी, नासिक, पलवल, पंपोर, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सांगली आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 94 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अंगुल, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बल्लभगढ़, बारां, बारबिल, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छाल, चित्तौड़गढ़, चुरू, दमोह, दौसा, देवास, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जलना, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मेहसाणा, मिलुपारा, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सोलापुर, सुआकाती, ठाणे, तिरुपति, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, भिवानी, बुलंदशहर, दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, जींद, कैथल, मानेसर, मेरठ, नोएडा, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं सिंगरौली (349) में स्थिति बेहद खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से महज 22 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 101 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 25 अप्रैल को यह आंकड़ा 98 दर्ज किया गया था।
94 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 349 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 34 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता आज भी ‘बेहद खराब’ बनी हुई है।
इससे पहले कल (25 अप्रैल 2026) देश में ग्रेटर नोएडा की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 326 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 66 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक 260 पर पहुंच गया है। ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता आज ‘खराब’ बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 243 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 222 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 21 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 163 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 122 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 26 अप्रैल को गाजियाबाद चौथे स्थान पर है, वहीं बागपत (287) दूसरे, जबकि रोहतक (285) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 126, गाजियाबाद में 272, गुवाहाटी में 47, गुरूग्राम में 195, नोएडा में 226, ग्रेटर नोएडा में 260 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 99 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 166, चेन्नई में 40, चंडीगढ़ में 73, हैदराबाद में 83, जयपुर में 148 और पटना में 118 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 22 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अमरावती (आंध्रप्रदेश), बैरकपुर, भिलाई, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, एलुरु, गुवाहाटी, हावड़ा, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आइजोल, अजमेर, अकोला, अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेतिया, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलीपाड़ा, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, कटक, देहरादून, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, मछलीपट्टनम, मदुरई, मैहर, मंडी गोबिंदगढ़, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नलबाड़ी, नासिक, पलवल, पंपोर, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सांगली, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सूरत, तालचेर, थूथुकुडी, तिरुमाला, विजयवाड़ा, विरार आदि 101 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है। यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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