सिंगरौली की जहरीली हवा ने देश में प्रदूषण संकट की भयावह तस्वीर एक बार फिर सामने ला दी है।
22 मई 2026 को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 600 फीसदी अधिक है। हवा में पीएम10 कणों का बढ़ता स्तर लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहा है।
दूसरी ओर कर्नाटक का मदिकेरी देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 20 दर्ज किया गया। यानी सिंगरौली की हवा वहां से करीब 16 गुना ज्यादा जहरीली है।
हालांकि चरखी दादरी, दिल्ली और फरीदाबाद समेत कई शहरों में पिछले 24 घंटों में प्रदूषण में कुछ राहत दर्ज की गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 233 शहरों के आंकड़ों से पता चला कि करीब 42 फीसदी शहर अब भी खराब या मध्यम श्रेणी की हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक पीएम10 और पीएम2.5 जैसे महीन कण लगातार लोगों के फेफड़ों, दिल और सांस संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ा रहे हैं, जबकि देश के कई हिस्सों में साफ हवा अब दुर्लभ होती जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 22 मई 2026 को देश में सिंगरौली सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सिंगरौली में सूचकांक 317 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में दो अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सिंगरौली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सिंगरौली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 600 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सिंगरौली की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 15.7 गुणा खराब है।
इससे पहले कल चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 336 दर्ज किया गया था। वहीं आज चरखी दादरी में 52 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 284 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 209 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 183 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 26 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 175 पर पहुंच गया। हालांकि वहां वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 22 मई 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 45.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 41.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 3.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 10.3 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से 15.4 फीसदी की कमी आई है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 5.3 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पंचगांव (301) दूसरे जबकि मेरठ (293) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह चरखी दादरी (284) चौथे स्थान पर है। मंडी गोबिंदगढ़- बीकानेर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 276 और 269 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
जींद (265) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मुजफ्फरनगर (248), कैथल (244) और गाजियाबाद (243) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पंचगांव, मेरठ, चरखी दादरी, मंडी गोबिंदगढ़, जींद, कैथल, गाजियाबाद, अंबाला, पंचकुला, बहादुरगढ़, चंद्रपुर, मानेसर, बर्नीहाट (असम), फरीदाबाद, मंडीदीप, खन्ना, भिवानी, जयपुर, करनाल, लखनऊ, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, वातवा, आगरा, कानपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सिंगरौली, बीकानेर, मुजफ्फरनगर, ग्रेटर नोएडा, कुरुक्षेत्र, दौसा, बद्दी, चूरू, बल्लभगढ़, हापुड़, नोएडा, बागपत, बुलंदशहर, दिल्ली, सीकर, हनुमानगढ़, मुरादाबाद, झुंझुनू, जैसलमेर, नागौर, भिवाड़ी, विशाखापत्तनम, यमुना नगर, करौली, मेहसाणा, पाली, पटियाला, टोंक, बारबिल, बाड़मेर, जोधपुर, देहरादून, पीथमपुर, बिलाईपाड़ा, जोरापोखर, खुर्जा, अमरावती (आंध्रप्रदेश), ग्वालियर, बारां, भोपाल, रायपुर, अंगुल, प्रतापगढ़, अजमेर, अलवर, जालोर, भीलवाड़ा, कटनी, देवास, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, उदयपुर, बारीपाड़ा, भरतपुर, रतलाम, अहमदाबाद, गांधीनगर, नयागढ़, सिरोही, सुआकाती, अमृतसर, नागपुर, चंडीगढ़, गुम्मिडीपूंडी, मालेगांव, रायरंगपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 12.4 फीसदी यानी 29 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चित्तूर, गंगटोक, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मुंबई, मैसूर, नासिक, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुणे, रामनगर, रूपनगर, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, शिवसागर, श्रीनगर, थूथुकुडी, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 107 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, बूंदी, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तौड़गढ़, कटक, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, कल्याण, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, पलवल, पानीपत, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सतना, सवाई माधोपुर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 77 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अंगुल, बागपत, बहादुरगढ़, बारां, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, देहरादून, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खन्ना, खुर्जा, लखनऊ, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, नागौर, नागपुर, नयागढ़, पाली, पंचकुला, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, रतलाम, सीकर, सिरोही, सुआकाती, टोंक, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में अंबाला, बद्दी, बल्लभगढ़, बीकानेर, चरखी दादरी, चूरू, दौसा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं सिंगरौली (315) और पंचगांव (301) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से 29 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 107 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 21 मई को यह आंकड़ा 97 दर्ज किया गया था।
77 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 315 दर्ज किया गया। इससे पहले कल सिंगरौली में सूचकांक 317 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में दो अंकों का सुधार आया है। हालांकि आज भी सिंगरौली में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ बनी हुई है।
इससे पहले कल चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 336 दर्ज किया गया था। वहीं आज चरखी दादरी में 52 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 284 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 209 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 183 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 26 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 175 पर पहुंच गया। हालांकि वहां वायु गुणवत्ता आज खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 22 मई को चरखी दादरी चौथे स्थान पर है, वहीं पंचगांव (301) दूसरे, जबकि मेरठ (293) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 126, गाजियाबाद में 243, गुवाहाटी में 63, गुरूग्राम में 138, नोएडा में 204, ग्रेटर नोएडा में 239 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 47 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 145, चेन्नई में 87, चंडीगढ़ में 102, हैदराबाद में 74, जयपुर में 162 और पटना में 94 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 29 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, बागलकोट, बेगूसराय, भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, गंगटोक, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मुंबई, मैसूर, नासिक, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुणे, रामनगर, रूपनगर, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, शिवसागर, श्रीनगर, थूथुकुडी, उल्हासनगर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बरेली, बैरकपुर, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, बूंदी, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तौड़गढ़, कटक, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, कल्याण, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, पलवल, पानीपत, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सतना, सवाई माधोपुर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरुधुनगर आदि 107 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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