वायु

28 सितंबर: गुम्मिडीपूंडी सबसे प्रदूषित, 174 एक्यूआई; गंगटोक की हवा सबसे साफ

28 सितम्बर 2026 को 238 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से 23.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 64.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 12.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

Lalit Maurya

  • 28 सितंबर 2026 को देश के 238 शहरों में वायु गुणवत्ता के सरकारी आंकड़ों ने एक बार फिर प्रदूषण की असमान तस्वीर सामने रखी।

  • गुम्मिडीपूंडी लगातार दूसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 174 दर्ज किया गया। यहां पीएम2.5 प्रदूषण प्रमुख रहा और वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,050 फीसदी अधिक रही।

  • इसके विपरीत गंगटोक में एक्यूआई महज 19 दर्ज हुआ, जिससे दोनों शहरों के बीच हवा की गुणवत्ता में करीब 9.1 गुना का अंतर सामने आया।

  • कुल 238 शहरों में 55 यानी 23.1 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’, जबकि 154 शहरों यानी 64.7 फीसदी में ‘संतोषजनक’ रही। वहीं 29 शहरों में एक्यूआई 101 से 200 के बीच यानी ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज किया गया।

  • खास बात यह है कि साफ हवा वाले शहरों की संख्या में एक दिन में 32.1 फीसदी की कमी आई, जबकि मध्यम श्रेणी वाले शहरों की संख्या 81.3 फीसदी बढ़ गई।

  • दिल्ली में भी एक दिन में एक्यूआई 53 से बढ़कर 56 हुआ, हालांकि हवा अभी संतोषजनक बनी हुई है। वहीं फरीदाबाद में एक्यूआई 110 पर स्थिर रहा और हवा मध्यम श्रेणी में रही।

  • आंकड़े बताते हैं कि देश के कई शहरों में हवा फिलहाल अपेक्षाकृत साफ है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में पीएम2.5 और पीएम10 का बढ़ता दबाव प्रदूषण की चुनौती को लगातार गंभीर बनाए हुए है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 28 सितम्बर 2026 को देश में एक बार फिर गुम्मिडीपूंडी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 174 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। बता दें कि कल (27 सितम्बर) से गुम्मिडीपूंडी में प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि गुम्मिडीपूंडी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गुम्मिडीपूंडी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,050 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गुम्मिडीपूंडी की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 9.1 गुणा खराब है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 53 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 56 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 3 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 पर बना हुआ है। मतलब कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 सितम्बर 2026 को 238 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 23.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 64.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 12.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 32.1 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.6 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 81.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बर्नीहाट (मेघालय) (149) दूसरे जबकि बीकानेर (145) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बिलाईपाड़ा चौथे स्थान पर है। लेह (138) – कटक (137) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

पाली (134) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में अररिया (130), विशाखापत्तनम (128) और मंगलौर (118) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के दो शहर (बीकानेर, पाली) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुम्मिडीपूंडी, अररिया, गया, मंडी गोबिंदगढ़ और तालचेर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बर्नीहाट (मेघालय), बीकानेर, बिलाईपाड़ा, पाली, विशाखापत्तनम, मंगलौर, छपरा, चंद्रपुर, फरीदाबाद, कुंजेमुरा, पलवल, अगरतला, भीलवाड़ा, जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर, टेन्सा, टोंक और अजमेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 23.1 फीसदी यानी 55 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भागलपुर, भिलाई, भिवानी, बोईसर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चरखी दादरी, देहरादून, धौलपुर, धुले, फतेहाबाद, गांधीनगर, गंगटोक, हापुड़, इंदौर, जालंधर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कानपुर, खुर्जा, कोल्हापुर, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, पटियाला, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गडग, गजरौला, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खैरथल, खन्ना, खोरा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मेहसाणा, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पंचकुला, पानीपत, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 29 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अजमेर, अररिया, बाड़मेर, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, छपरा, कटक, एलूर, फरीदाबाद, गया, गुम्मिडीपूंडी, हिसार, जैसलमेर, कुंजेमुरा, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, मंगलौर, पाली, पलवल, तालचेर, टेन्सा, टोंक, उदयपुर और विशाखापत्तनम शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 238 में से 55 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 154 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 सितम्बर को यह आंकड़ा 138 दर्ज किया गया था।

29 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर गुम्मिडीपूंडी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 174 दर्ज किया गया, जोकि ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (27 सितम्बर) भी गुम्मिडीपूंडी में सूचकांक 174 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 53 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 56 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 3 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 पर बना हुआ है। मतलब कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 सितम्बर को बिलाईपाड़ा (145) चौथे स्थान पर है, वहीं बर्नीहाट (मेघालय) (149) दूसरे, जबकि बीकानेर  तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 59, गाजियाबाद में 55, गुवाहाटी में 57, गुरूग्राम में 97, नोएडा में 54, ग्रेटर नोएडा में 72 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 52 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 42, चेन्नई में 91, चंडीगढ़ में 28, हैदराबाद में 58, जयपुर में 92 और पटना में 83 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 55 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, अकोला, बदलापुर, बागपत, बड़ौत, बरबिल, बीड, भागलपुर, भिलाई, भिवानी, बोईसर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चरखी दादरी, देहरादून, धौलपुर, धुले, फतेहाबाद, गांधीनगर, गंगटोक, हापुड़, इंदौर, जालंधर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कानपुर, खुर्जा, कोल्हापुर, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, पटियाला, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, तिरुवनंतपुरम, उडुपी और वृंदावन शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारीपाड़ा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गडग, गजरौला, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खैरथल, खन्ना, खोरा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मेहसाणा, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पंचकुला, पानीपत, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर और यमुना नगर आदि 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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