देश में वायु प्रदूषण के ताज़ा आंकड़े “कहीं राहत, कहीं आफत” की तस्वीर पेश करते हैं। 13 मई 2026 को मध्य प्रदेश का मंडीदीप 210 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है।
यहां एक दिन में ही प्रदूषण 29 अंकों तक बढ़ गया और हवा में पीएम2.5 का दबदबा गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है। इसके उलट तमिलनाडु का रामनाथपुरम 13 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा, यानी दोनों शहरों के बीच हवा की गुणवत्ता में लगभग 16 गुना का अंतर दर्ज हुआ।
दिल्ली-एनसीआर में हालांकि हल्की राहत दिखी है। दिल्ली, फरीदाबाद और गाजियाबाद में पिछले 24 घंटों में एक्यूआई में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन अधिकांश शहर अभी भी मध्यम श्रेणी में हैं।
देशभर के 242 शहरों में से 18.2 फीसदी में हवा साफ, 48.3 फीसदी में संतोषजनक और 33.5 फीसदी में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
विश्लेषण बताता है कि हरियाणा और उत्तर भारत के कई शहर जैसे पंचगांव, मुजफ्फरनगर और नारनौल सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में ऊपर हैं। अधिकांश शहरों में पीएम2.5, पीएम10 और ओजोन प्रमुख प्रदूषक बने हुए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 13 मई 2026 को देश में मंडीदीप सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 210 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल मंडीदीप में सूचकांक 181 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 29 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मंडीदीप की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मंडीदीप में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,300 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में रामनाथपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मंडीदीप की तुलना रामनाथपुरम से करें तो वहां स्थिति 16 गुणा खराब है।
वहीं कल गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 219 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 164 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 55 अंकों का भारी सुधार हुआ है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 170 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 147 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 23 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 180 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 165 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 13 मई 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 18.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 48.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 33.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 2.2 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 3.7 फीसदी की कम दर्ज की गई। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 66.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पंचगांव (202) दूसरे जबकि मुजफ्फरनगर (197) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह नारनौल चौथे स्थान पर है। रतलाम- भरतपुर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 192 और 190 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पानीपत (186) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मेरठ (185), कुरुक्षेत्र (182) और चरखी दादरी (180) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (पंचगांव, नारनौल, पानीपत, कुरुक्षेत्र, चरखी दादरी) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडीदीप, पंचगांव, मुजफ्फरनगर, नारनौल, रतलाम, पानीपत, मेरठ, कुरुक्षेत्र, चरखी दादरी, बर्नीहाट (असम), बहादुरगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, अंबाला, करनाल, दिल्ली, भिवाड़ी, जींद, मानेसर, धारूहेड़ा, वडोदरा, लखनऊ, जयपुर, हापुड़, वातवा, नंदेसरी, हाजीपुर, मुरादाबाद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सिरसा, सीकर, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), दौसा, दमोह, बद्दी, ग्रेटर नोएडा, पीथमपुर, धौलपुर, भोपाल, बांसवाड़ा, आगरा, बुलंदशहर, मंडीखेड़ा, चूरू, मेहसाणा, नागौर, टोंक, बारां, पाली, गांधीनगर, अहमदाबाद, देवास, मंडी गोबिंदगढ़, यमुना नगर, बल्लभगढ़, झुंझुनू, भीलवाड़ा, हनुमानगढ़, रोहतक, भावनगर, बूंदी, जलगांव, अलवर, नागपुर, अगरतला, कटनी आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 18.2 फीसदी यानी 44 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बरेली, बैरकपुर, बेगूसराय, भिलाई, बिहार शरीफ, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, हावड़ा, कडप्पा, कोहिमा, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नयागढ़, पंपोर, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सहरसा, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें कानपुर, करौली, कटिहार, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 79 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अंबाला, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जबलपुर, जयपुर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, करनाल, कटनी, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नोएडा, पाली, पानीपत, पीथमपुर, राजकोट, रतलाम, रोहतक, सागर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, टोंक, वडोदरा, वातवा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में मंडीदीप, पंचगांव में स्थिति ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से 44 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 117 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 12 मई को यह आंकड़ा 112 दर्ज किया गया था।
79 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मंडीदीप में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 210 दर्ज किया गया। इससे पहले कल मंडीदीप में सूचकांक 181 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 29 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज मंडीदीप में वायु गुणवत्ता मध्यम से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
वहीं कल गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 219 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 164 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 55 अंकों का भारी सुधार हुआ है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 170 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 147 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 23 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 180 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 165 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 13 मई को नारनौल चौथे स्थान पर है, वहीं पंचगांव (202) दूसरे, जबकि मुजफ्फरनगर (197) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 112, गाजियाबाद में 164, गुवाहाटी में 77, गुरूग्राम में 166, नोएडा में 160, ग्रेटर नोएडा में 145 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 58 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 121, चेन्नई में 53, चंडीगढ़ में 74, हैदराबाद में 72, जयपुर में 120 और पटना में 90 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 44 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, आरा, बागलकोट, बालासोर, बरेली, बैरकपुर, बेगूसराय, भिलाई, बिहार शरीफ, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, हावड़ा, कडप्पा, कोहिमा, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नयागढ़, पंपोर, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सहरसा, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरुधुनगर, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, बदलापुर, बागपत, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, जोधपुर, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 117 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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