वायु प्रदूषण का संकट अब महानगरों तक सीमित नहीं रहा। राजस्थान के शहर तेजी से प्रदूषण के केंद्र बन रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण आज बीकानेर रहा। 16 जून 2026 को राजस्थान का बीकानेर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां एक्यूआई 282 तक पहुंच गया और महज 24 घंटों में प्रदूषण 137 अंकों तक बढ़ गया।
चिंताजनक बात यह है कि देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के चार शहर शामिल रहे, जो संकेत देता है कि राज्य धीरे-धीरे वायु प्रदूषण का नया हॉटस्पॉट बनता जा रहा है।
बीकानेर में पीएम10 कणों का दबदबा और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक होना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है।
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू राहत देने वाला भी है। देश के 247 शहरों में से करीब 75 फीसदी शहरों में हवा साफ या संतोषजनक श्रेणी में दर्ज की गई।
गडग सबसे साफ शहर रहा, जबकि पंचगांव में एक दिन के भीतर उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
दिल्ली में भी प्रदूषण घटा, हालांकि हवा अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। यह उतार-चढ़ाव बताता है कि वायु गुणवत्ता लगातार बदल रही है, लेकिन राजस्थान समेत कई क्षेत्रों में बढ़ता प्रदूषण स्थानीय स्रोतों, धूल और मौसमीय परिस्थितियों पर तत्काल ध्यान देने की मांग कर रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 16 जून 2026 को देश में बीकानेर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 282 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल बीकानेर में सूचकांक 145 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में 137 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बीकानेर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बीकानेर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में गडग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 28 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बीकानेर की तुलना गडग से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।
बता दें कि इससे पहले कल पंचगांव में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 231 तक पहुंच गया था। वहीं आज 153 अंकों के भारी सुधार के साथ पंचगांव में सूचकांक 78 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के साथ आज वायु गुणवत्ता सीधे खराब से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 151 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 116 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 35 अंकों का सुधार आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 78 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 135 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 57 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 16 जून 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 62.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 25.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 6.1 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 3.4 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती 23.9 फीसदी बढ़ गई है। इसके उलट खराब हवा वाले शहरों की संख्या में कल से करीब 54.5 फीसदी का कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मंडी गोबिंदगढ़ (282) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (227) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (226) चौथे स्थान पर है। भिवाड़ी (206) – रूपनगर (196) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बाड़मेर (188) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में हाजीपुर (181), बुलंदशहर (178) और सीकर (174) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के चार शहर शहर (बीकानेर, बाड़मेर, सीकर, भिवाड़ी) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडी गोबिंदगढ़, भिवाड़ी, रूपनगर, हाजीपुर, बर्नीहाट (मेघालय), मेरठ, बर्नीहाट (असम), बहादुरगढ़, कोटा, फरीदाबाद, भिवानी, गया, किशनगंज, मंगुराहा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बीकानेर, बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, बाड़मेर, बुलंदशहर, सीकर, टोंक, सिंगरौली, अंगुल, गाजियाबाद, नोएडा, उदयपुर, सवाई माधोपुर, छपरा, सिरोही, धनबाद, मुजफ्फरनगर, भीलवाड़ा, जैसलमेर, बालासोर, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, जयपुर, दौसा, दिल्ली, बागपत, वातवा, मथुरा, पाली, बारां, वाराणसी, बारबिल, चित्तौड़गढ़, आगरा, बूंदी, पटना, चूरू आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 12.5 फीसदी यानी 31 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, जलगांव, जींद, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, नाहरलागुन, नासिक, पंपोर, परभणी, रामनगर, रोहतक, समस्तीपुर, सांगली, शिवमोगा, सूरत, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कुड्डालोर, कटक, दमोह, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मंडीदीप, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 57 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अंगुल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बारबिल, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवानी, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), छपरा, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, जयपुर, जैसलमेर, किशनगंज, कोटा, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मिलुपारा, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पाली, पटना, रायबरेली, रूपनगर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, सुआकाती, तालचेर, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, वाराणसी, वातवा आदि शामिल हैं।
इसी तरह बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बीकानेर, ग्रेटर नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से 31 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 154 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 15 जून को यह आंकड़ा 149 दर्ज किया गया था।
57 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बीकानेर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 282 दर्ज किया गया। हालांकि कल वहां एक्यूआई 145 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में बीकानेर में प्रदूषण के स्तर में 137 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल पंचगांव में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 231 तक पहुंच गया था। वहीं आज 153 अंकों के भारी सुधार के साथ पंचगांव में सूचकांक 78 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के साथ आज वायु गुणवत्ता सीधे खराब से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 151 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 116 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 35 अंकों का सुधार आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 78 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 135 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 57 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 16 जून को ग्रेटर नोएडा (226) चौथे स्थान पर है, वहीं मंडी गोबिंदगढ़ (281) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (227) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 120, गाजियाबाद में 147, गुवाहाटी में 56, गुरूग्राम में 84, नोएडा में 144, ग्रेटर नोएडा में 226 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 53 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 96, चेन्नई में 76, चंडीगढ़ में 64, हैदराबाद में 72, जयपुर में 118 और पटना में 104 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 31 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, चामराजनगर, कोयंबटूर, देहरादून, डूंगरपुर, गडग, गंगटोक, जलगांव, जींद, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, नाहरलागुन, नासिक, पंपोर, परभणी, रामनगर, रोहतक, समस्तीपुर, सांगली, शिवमोगा, सूरत, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कुड्डालोर, कटक, दमोह, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मंडीदीप, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सहरसा, सतना, सिलचर, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 156 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं