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वायु

प्रदूषण का हॉटस्पॉट बना राजस्थान, चुरू में बढ़कर 302 पर पहुंचा एक्यूआई

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया

Lalit Maurya

  • राजस्थान एक बार फिर प्रदूषण के सबसे बड़े हॉटस्पॉट के रूप में उभरा है, जहां चुरू में महज 24 घंटों के भीतर वायु गुणवत्ता सूचकांक 185 से उछलकर 302 पर पहुंच गया।

  • हवा में घुला ओजोन और जहरीले कण लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहे हैं। हालत यह है कि चुरू का प्रदूषण स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी ज्यादा दर्ज किया गया।

  • राज्य के छह शहर — चुरू, सवाई माधोपुर, झुंझुनू, बूंदी, झालावाड़ और दौसा — देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जो इस क्षेत्र में बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति की गंभीर तस्वीर पेश करता है।

  • दूसरी तरफ कर्नाटक का मदिकेरी सबसे साफ रहा, जहां एक्यूआई महज 17 दर्ज किया गया। यानी चुरू की हवा वहां की तुलना में करीब 18 गुना ज्यादा जहरीली रही।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 235 शहरों के आंकड़ों से पता चला है कि देश के एक-तिहाई शहरों में हवा चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। दिल्ली और फरीदाबाद जैसे शहरों में भी प्रदूषण बढ़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ती गर्मी, धूल, ओजोन और पीएम2.5 जैसे महीन कण आने वाले दिनों में सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा और बढ़ा सकते हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 10 मई 2026 को देश में चुरू सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 302 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल चुरू में सूचकांक 185 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 117 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि चुरू की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

चुरू में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चुरू की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 17.7 गुणा खराब है।

वहीं कल भरतपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 207 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 178 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 29 अंकों का सुधार हुआ है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 116 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 127 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 11 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 115 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 136 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 10 मई 2026 को 235 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 14 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 33.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 23.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 3.1 फीसदी का कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 1.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 500 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सवाई माधोपुर (287) दूसरे जबकि झुंझुनू (273) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह कडप्पा चौथे स्थान पर है। मेरठ- बूंदी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 233 और 212 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

झालावाड़ (206) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में दौसा (197), सिरसा (191) और मुजफ्फरनगर (190) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के छह शहर (चुरू, सवाई माधोपुर, झुंझुनू, बूंदी, झालावाड़, दौसा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कडप्पा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, चरखी दादरी, हनुमानगढ़, गाजियाबाद, बर्नीहाट (असम), जींद, करनाल, खन्ना, गुरुग्राम, धारूहेड़ा, पंचगांव, नंदेसरी, फरीदाबाद, राजकोट, दिल्ली, यमुना नगर, भिवाड़ी, जालंधर, किशनगंज, हापुड़, अंबाला आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सिरसा, बर्नीहाट (मेघालय), कल्याण, बेलापुर, नवी मुंबई, अगरतला, कोटा, पीथमपुर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग्वालियर, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, पानीपत, वडोदरा, भोपाल, जोधपुर, सहरसा, भावनगर, पाली, परभणी, बल्लभगढ़, भीलवाड़ा, अलवर, बुलंदशहर, टोंक, बांसवाड़ा, देवास, अहमदाबाद, सिंगरौली, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 14 फीसदी यानी 33 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अमरावती (आंध्रप्रदेश), बागलकोट, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेतिया, भिलाई, बिहार शरीफ, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दुर्गापुर, गडग, गया, कोहिमा, मदिकेरी, मोतिहारी, नाहरलागुन, नयागढ़, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, विजयपुरा, यादगीर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 124 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोरापोखर, कैथल, कन्नूर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटिहार, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्रीनगर, सूरत,  आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 71 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अंबाला, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जयपुर, जालंधर, जींद, जोधपुर, कल्याण, करनाल, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोटा, कुरुक्षेत्र, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नंदेसरी, नवी मुंबई, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, परभणी, पीथमपुर, प्रतापगढ़, राजकोट, सागर, सहरसा, सीकर, सिंगरौली, सिरसा, श्री गंगानगर, टोंक, वडोदरा, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में बूंदी, झालावाड़, झुंझुनू, कडप्पा, मेरठ, सवाई माधोपुर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं चुरू (302) में स्थिति बेहद खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 235 में से 33 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 124 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 09 मई को यह आंकड़ा 128 दर्ज किया गया था।

71 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज (10 अगस्त) चुरू में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 दर्ज किया गया। इससे पहले कल चुरू में सूचकांक 185 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 117 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज चुरू में वायु गुणवत्ता मध्यम से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

वहीं कल भरतपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 207 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 178 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 29 अंकों का सुधार हुआ है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 116 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 127 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 11 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 115 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 136 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 10 मई को कडप्पा  चौथे स्थान पर है, वहीं सवाई माधोपुर (287) दूसरे, जबकि झुंझुनू (273) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 129, गाजियाबाद में 183, गुवाहाटी में 71, गुरूग्राम में 153, नोएडा में 138, ग्रेटर नोएडा में 133 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 77 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 82, चेन्नई में 39, चंडीगढ़ में 73, हैदराबाद में 95, जयपुर में 173 और पटना में 75 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 33 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अमरावती (आंध्रप्रदेश), बागलकोट, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेतिया, भिलाई, बिहार शरीफ, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दुर्गापुर, गडग, गया, कोहिमा, मदिकेरी, मोतिहारी, नाहरलागुन, नयागढ़, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, विजयपुरा, यादगीर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, भिवानी, बोइसर, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, कटक, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झांसी, जोरापोखर, कैथल, कन्नूर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटिहार, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, त्रिशूर, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन आदि 124 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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