सिर्फ बड़े शहरों की समस्या नहीं रहा वायु प्रदूषण; प्रतीकात्मक तस्वीर: विकास चौधरी/सीएसई  
वायु

प्रदूषण का हॉटस्पॉट बनता राजस्थान, श्री गंगानगर में 249 पर पहुंचा एक्यूआई

05 अप्रैल 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 19.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 62.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है

Lalit Maurya

  • 05 अप्रैल 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि देश में प्रदूषण का खतरा अभी बनी बना हुआ है और राजस्थान तेजी से प्रदूषण का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है।

  • श्री गंगानगर 249 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां महज 24 घंटों में प्रदूषण 58 अंक बढ़ गया और हवा ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। शहर की हवा में ओजोन का दबदबा है और प्रदूषण स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से लगभग 300 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • देश के 241 शहरों में से केवल 19.4 फीसदी शहरों में ही साफ हवा दर्ज की गई, जबकि 22 फीसदी शहरों में हवा चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है।

  • प्रदूषण के मामले में अररिया, बल्लभगढ़, बर्नीहाट, ग्रेटर नोएडा और टोंक भी शीर्ष प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। खास बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर श्री गंगानगर, टोंक और सवाई माधोपुर शामिल हैं।

  • जहां एक तरफ टोंक में प्रदूषण में सुधार हुआ, वहीं फरीदाबाद में प्रदूषण बढ़ा है। दिल्ली में मामूली सुधार दर्ज किया गया। दूसरी तरफ पंपोर देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई मात्र 16 दर्ज किया गया, जो श्री गंगानगर से 15 गुणा बेहतर है।

विश्लेषण के मुताबिक 05 अप्रैल 2026 को देश में श्री गंगानगर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 249 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि इससे पहले 04 अप्रैल को राजस्थान के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 191 दर्ज किया गया था, मतलब की 24 घंटों में इसमें 58 अंकों का इजाफा हुआ है। श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है। 

रुझानों में सामने आया है कि श्री गंगानगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। श्री गंगानगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 300 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर श्री गंगानगर की तुलना पंपोर से करें तो वहां स्थिति 15.5 गुणा खराब है।

बता दें कि इससे पहले कल टोंक में वायु गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 268 दर्ज किया गया। हालांकि आज वहां एक्यूआई घटकर 187 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 81 अंकों का सुधार आया है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 137 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 134 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 3 अंकों की गिरावट आई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 133 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 173 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 05 अप्रैल 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 19.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 62.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 22 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 19.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 5.6 फीसदी की कमी आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 5.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 25 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।     

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अररिया (234) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (225) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बर्नीहाट (असम) (217) चौथे स्थान पर है। ग्रेटर नोएडा-टोंक में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 201 और 187 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बिलीपाड़ा (174) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में फरीदाबाद (173), सवाई माधोपुर (172), गाजियाबाद (160) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (श्री गंगानगर, टोंक, सवाई माधोपुर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि अररिया, बर्नीहाट (असम), फरीदाबाद, हापुड़, सोनीपत, गुरुग्राम, वातवा, मेरठ, मंडीदीप, भिवानी, देवास, चरखी दादरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, बिलीपाड़ा, गाजियाबाद, बर्नीहाट (मेघालय), नोएडा, बिलासपुर, पटना, पीथमपुर, हनुमानगढ़, हाजीपुर, सिंगरौली, भिवाड़ी, गांधीनगर, मुजफ्फरनगर, बारबिल, मुजफ्फरपुर, अहमदाबाद, नयागढ़, अगरतला, बुलंदशहर, बागपत, नागौर, आइजोल, कटक, विशाखापत्तनम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 15.4 फीसदी यानी महज 37 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, धौलपुर, डिंडीगुल, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गुवाहाटी, हुबली, झांसी, कैथल, कानपुर, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, नेल्लोर, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, सांगली, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, विजयपुरा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 151 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दौसा, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पलवल आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 48 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, अहमदाबाद, आइजोल, अमृतसर, अंगुल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बारां, बारबिल, भरतपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, कटक, दिल्ली, देवास, धनबाद, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुरुग्राम, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जयपुर, झालावाड़, मंडीदीप, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नयागढ़, नोएडा, पटना, पीथमपुर, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सोनीपत, टोंक, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।

इसी तरह अररिया, बल्लभगढ़, बर्नीहाट (असम), ग्रेटर नोएडा, श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से महज 37 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 151 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 04 अप्रैल को यह आंकड़ा 160 दर्ज किया गया था।

48 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज श्री गंगानगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 249 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल से श्री गंगानगर में प्रदूषण में इजाफा हुआ है जहां कल एक्यूआई 191 दर्ज किया गया था।

बता दें कि कल टोंक में एक्यूआई 268 दर्ज किया गया था, जहां आज एक्यूआई घटकर 187 पर पहुंच गया है। मतलब कि वहां पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 81 अंकों का सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 137 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 134 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 3 अंकों की गिरावट आई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 133 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 173 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 05 अप्रैल को बर्नीहाट (असम) चौथे स्थान पर है, वहीं अररिया (234) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (225) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 66, गाजियाबाद में 160, गुवाहाटी में 46, गुरूग्राम में 154, नोएडा में 146, ग्रेटर नोएडा में 201 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 59 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 57, चेन्नई में 51, चंडीगढ़ में 54, हैदराबाद में 73, जयपुर में 146 और पटना में 142 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 37 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, बागलकोट, बेतिया, भिलाई, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कामगलुरु, कोयंबटूर, धौलपुर, डिंडीगुल, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गुवाहाटी, हुबली, झांसी, कैथल, कानपुर, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, नेल्लोर, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, सांगली, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दौसा, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पंचगांव, परभनी, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि 151 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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