बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

रायबरेली में 'सांसों पर लगा आपातकाल': 24 घंटे में 167 अंक बढ़कर 427 पर पहुंचा एक्यूआई

महानगरों को पीछे छोड़ अब छोटे शहरों में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है, जहां रायबरेली, रूपनगर और मैहर जैसे कस्बे प्रदूषण के नए केंद्र बन रहे हैं।

Lalit Maurya

  • रायबरेली में महज 24 घंटे के भीतर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 260 से उछलकर 427 पर पहुंच गया है, जिसने इसे देश का सबसे प्रदूषित शहर बना दिया।

  • यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह संकेत है कि अब प्रदूषण का संकट महानगरों से निकलकर छोटे शहरों की सांसों पर भी भारी पड़ने लगा है। रायबरेली की हवा में पीएम10 कणों का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 840 फीसदी अधिक दर्ज किया गया, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

  • इसके विपरीत आइजोल और मदिकेरी में एक्यूआई महज 14 रहा, यानी वहां की हवा रायबरेली की तुलना में करीब 30 गुना बेहतर है।

  • आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि देश के अधिकांश शहरों में हवा अभी भी साफ या संतोषजनक बनी हुई है, लेकिन रायबरेली, रूपनगर, मैहर और गुम्मिडीपूंडी जैसे शहर तेजी से नए प्रदूषण केंद्र बन रहे हैं।

  • वहीं दिल्ली में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद हवा संतोषजनक रही, जबकि फरीदाबाद में सुधार दर्ज किया गया। यह तस्वीर बताती है कि प्रदूषण का संकट अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा और छोटे शहरों के लिए भी तत्काल, स्थानीय स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 25 जुलाई 2026 को देश में रायबरेली सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 427 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल (24 जुलाई) को रायबरेली में एक्यूआई 260 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 167 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि रायबरेली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

रायबरेली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 840 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल-मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहरों रायबरेली की तुलना आइजोल-मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 30 गुणा खराब है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 70 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 73 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 3 अंकों का मामूली उछाल आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।  

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 24 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 101 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 88 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 13 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से ‘संतोषजनक’ श्रेणी में पहुंच गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 25 जुलाई 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 47.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 43.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 8.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 16.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों में 14.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 58.3 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।   

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में रूपनगर (212) दूसरे जबकि मैहर (166) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गुम्मिडीपूंडी (153) चौथे स्थान पर है। बर्नीहाट (मेघालय) (147) – करौली (145) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

पानीपत (139) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बल्लभगढ़ (137), विशाखापत्तनम (128) और मंडी गोबिंदगढ़ (117) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में पंजाब के दो शहर (रूपनगर, मंडी गोबिंदगढ़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रूपनगर, गुम्मिडीपूंडी, बर्नीहाट (मेघालय), नारनौल, सोनीपत, करनाल आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं रायबरेली, मैहर, करौली, पानीपत, बल्लभगढ़, विशाखापत्तनम, मंडी गोबिंदगढ़, मोदीनगर, भिवाड़ी, सिवान, तिरुमाला, बीकानेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 47.8 फीसदी यानी 118 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, दमोह, दौसा, देहरादून, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, जींद, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मानेसर, मैंगलोर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सतारा, सवाई माधोपुर, सीकर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बारां, बारबिल, बठिंडा, बीड, बेंगलुरु, भावनगर, बिलीपाड़ा, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चित्तूर, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, कटिहार, कटनी, खैरथल, खुर्जा, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 19 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), धनबाद, गुम्मिडीपूंडी, करौली, करनाल, खोरा, मैहर, मंडी गोबिंदगढ़, मोदीनगर, नारनौल, पानीपत, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत, तिरुमाला, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं। वहीं रूपनगर (212) में स्थिति खराब जबकि रायबरेली (427) में गंभीर है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से 118 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 108 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 24 जुलाई को यह आंकड़ा 94 दर्ज किया गया था।

19 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर रायबरेली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 427 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (24 जुलाई) को रायबरेली में एक्यूआई 260 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 167 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 70 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 73 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 3 अंकों का मामूली उछाल आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।  

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 101 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 88 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 13 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से ‘संतोषजनक’ श्रेणी में पहुंच गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 25 जुलाई को गुम्मिडीपूंडी (153) चौथे स्थान पर है, वहीं रूपनगर (212) दूसरे, जबकि मैहर (166) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 66, गाजियाबाद में 68, गुवाहाटी में 51, गुरूग्राम में 98, नोएडा में 68, ग्रेटर नोएडा में 95 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 47 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 58, चेन्नई में 96, चंडीगढ़ में 32, हैदराबाद में 47, जयपुर में 53 और पटना में 61 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 118 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, बदलापुर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्कमगलुरु, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, देहरादून, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, जींद, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मानेसर, मैंगलोर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सतारा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलचर, सिरोही, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बारां, बारबिल, बठिंडा, बीड, बेंगलुरु, भावनगर, बिलीपाड़ा, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चित्तूर, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, कटिहार, कटनी, खैरथल, खुर्जा, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेरठ, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, नोएडा, पाली, पलवल, पटना, पीथमपुर, पुडुचेरी, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राउरकेला, सहरसा, सतना, शामली, सिंगरौली, सिरसा, शिवसागर, श्रीकाकुलम, सुआकाती, सूरत, तालचेर, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, तुमकुरु, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, यमुना नगर आदि 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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