देश में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। 24 अप्रैल 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार मेरठ 332 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां महज 24 घंटे में 67 अंकों की तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 2100 फीसदी अधिक पहुंच गया।
हवा में घुले महीन पीएम2.5 कणों ने हालात को और खतरनाक बना दिया है। सिंगरौली (322) और गाजियाबाद (310) भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बने हुए हैं, जबकि ग्रेटर नोएडा, रोहतक और नोएडा समेत कई शहरों में स्थिति गंभीर है।
राजधानी दिल्ली में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 226 तक पहुंच गया, जिससे हवा फिर ‘खराब’ श्रेणी में लौट आई।
242 शहरों के विश्लेषण से पता चलता है कि केवल 7.4 फीसदी शहरों में ही हवा साफ है, जबकि करीब आधे शहर मध्यम से खराब श्रेणी में हैं।
साफ हवा वाले शहरों की संख्या में गिरावट और मध्यम प्रदूषण वाले शहरों में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ रही है। दूसरी ओर रामनाथपुरम (एक्यूआई 17) सबसे साफ शहर रहा, जो मेरठ की तुलना में करीब 19 गुना बेहतर स्थिति को दर्शाता है, यह देश में वायु गुणवत्ता की गहरी असमानता को उजागर करता है।
कुल मिलाकर, देशभर में प्रदूषण का उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन उत्तर भारत के शहरों में हालात ज्यादा गंभीर बने हुए हैं। पीएम2.5 और पीएम10 जैसे खतरनाक कणों का प्रभुत्व स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन रहा है, जिससे साफ है कि आने वाले समय में वायु प्रदूषण न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती बनने वाला है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 24 अप्रैल 2026 को देश में मेरठ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 332 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल मेरठ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 265 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 67 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मेरठ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मेरठ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में रामनाथपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मेरठ की तुलना रामनाथपुरम से करें तो वहां स्थिति 19 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में अंगुल की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 286 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 50 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक 236 पर पहुंच गया है। हालांकि अंगुल में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 176 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 226 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 50 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 158 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 24 अप्रैल 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 7.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 46.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 46.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 18.2 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 6.7 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से पांच फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (322) दूसरे जबकि गाजियाबाद (310) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (294) चौथे स्थान पर है। रोहतक- चरखी दादरी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 287 और 265 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
नोएडा (264) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में जींद (262), हापुड़ (256) और यमुना नगर (251) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच (मेरठ, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, हापुड़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मेरठ, रोहतक, चरखी दादरी, जींद, यमुना नगर, छपरा, मानेसर, करनाल, हनुमानगढ़, कैथल, पानीपत, परभनी, सुआकाती, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चंद्रपुर, तालचेर, बल्लभगढ़, बिहार शरीफ, बहादुरगढ़, गया, पंचकुला, वातवा, लखनऊ, बर्नीहाट (असम), वडोदरा, पंचगांव, मुरादाबाद, मंगुराहा, नागपुर, बिलासपुर, वापी, जयपुर, नारनौल, राउरकेला, कानपुर, पंपोर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं मेरठ, सिंगरौली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, रोहतक, चरखी दादरी, नोएडा, जींद, हापुड़, यमुना नगर, कुरुक्षेत्र, छपरा, दिल्ली, मानेसर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, करनाल, बद्दी, हनुमानगढ़, कैथल, पानीपत, परभनी, सुआकाती, नयागढ़, बारबिल, भिवाड़ी, गुरुग्राम, जोरापोखर, श्री गंगानगर, फरीदाबाद, चंद्रपुर, तालचेर, बल्लभगढ़, बिहार शरीफ, सोनीपत, मेहसाणा, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बर्नीहाट (मेघालय), टोंक, धनबाद, गया, पंचकुला, पटियाला, वातवा, लखनऊ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 7.4 फीसदी यानी महज 18 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिवानी, चेन्नई, एलुरु, खन्ना, किशनगंज, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मुंगेर, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।
इसी तरह देश के 112 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, देहरादून, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कटिहार, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नासिक, ऊटी आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 91 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, औरंगाबाद (बिहार), बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चुरू, कटक, दमोह, दौसा, धनबाद, धुले, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, कानपुर, कटनी, क्योंझर, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, राउरकेला, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, तालचेर, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, वातवा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में अंगुल, बद्दी, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, चरखी दादरी, छपरा, दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, हनुमानगढ़, हापुड़, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मुजफ्फरनगर, नोएडा, रोहतक, यमुना नगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं गाजियाबाद (310), मेरठ (332) और सिंगरौली (322) में स्थिति बेहद खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से महज 18 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 112 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 23 अप्रैल को यह आंकड़ा 120 दर्ज किया गया था।
91 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मेरठ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 332 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल मेरठ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 265 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 67 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ हो गई है।
इससे पहले कल देश में अंगुल की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 286 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 50 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक 236 पर पहुंच गया है। हालांकि अंगुल में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 176 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 226 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 50 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 158 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 24 अप्रैल को ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (322) दूसरे, जबकि गाजियाबाद (310) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 134, गाजियाबाद में 310, गुवाहाटी में 87, गुरूग्राम में 174, नोएडा में 264, ग्रेटर नोएडा में 294 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 88 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 135, चेन्नई में 36, चंडीगढ़ में 110, हैदराबाद में 76, जयपुर में 113 और पटना में 102 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 18 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अमरावती (आंध्रप्रदेश), भिवानी, चेन्नई, एलुरु, खन्ना, किशनगंज, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मुंगेर, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, शिलांग, श्रीनगर, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
वहीं अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, देहरादून, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलना, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कटिहार, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नासिक, ऊटी, पलवल, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सहरसा, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 112 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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