वायु

प्रदूषण से बिगड़े हालात: चरखी दादरी में 336 एक्यूआई, दिल्ली सहित 14 शहरों में हवा खराब

24 मई 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 44.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं

Lalit Maurya

  • देश की हवा एक बार फिर जहरीली होती नजर आ रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 24 मई 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है कि देश के 233 शहरों में से करीब 44 फीसदी शहरों की हवा चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है, जबकि केवल 12 फीसदी शहर ही साफ हवा में सांस ले पा रहे हैं।

  • हरियाणा का चरखी दादरी लगातार दूसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर बना रहा, जहां एक्यूआई 336 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहां पीएम2.5 कणों का स्तर इतना खतरनाक है कि यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक पहुंच चुका है।

  • राजधानी दिल्ली में भी हालात बिगड़ते दिखे, जहां 24 घंटे में एक्यूआई 195 से बढ़कर 205 हो गया और हवा ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई।

  • गाजियाबाद-ग्रेटर नोएडा, मेरठ, सिंगरौली और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे शहर भी प्रदूषण की गिरफ्त में हैं।

  • आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत में पीएम10 और पीएम2.5 का दबदबा लगातार बना हुआ है, जिससे सांस, दिल और दिमाग से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

  • इसके उलट तिरुवनंतपुरम, मुंबई और गंगटोक जैसे शहर राहत की सांस लेते दिखे, जहां हवा अपेक्षाकृत साफ रही। यह तस्वीर साफ संकेत देती है कि देश के बड़े हिस्से में प्रदूषण अब मौसमी नहीं, बल्कि स्थाई संकट बनता जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 24 मई 2026 को देश में एक बार फिर चरखी दादरी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 336 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 338 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में दो अंकों का सुधार आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में तिरुवनंतपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 18 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना तिरुवनंतपुरम से करें तो वहां स्थिति 18 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 195 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 205 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 10 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है। 

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 160 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 186 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 24 मई 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 43.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 44.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 17.6 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 4.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 1.1 फीसदी का उछाल आया है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 12.5 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत का विषय है। 

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद-ग्रेटर नोएडा (267) दूसरे जबकि मेरठ (265) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सिंगरौली (248) चौथे स्थान पर है। मंडी गोबिंदगढ़-अंबाला में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बीकानेर (225) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवानी (219), हापुड़ (218) और जैसलमेर (218) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, हापुड़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, मंडी गोबिंदगढ़, अंबाला, भिवानी, जींद, पंचगांव, बहादुरगढ़, मंडीदीप, मानेसर, काशीपुर, बर्नीहाट (असम), धौलपुर, कैथल, धारूहेड़ा, वातवा, करनाल, हाजीपुर, पंचकुला, बिलासपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, सिंगरौली, बीकानेर, हापुड़, जैसलमेर, बागपत, दिल्ली, बल्लभगढ़, सवाई माधोपुर, टोंक, जयपुर, नोएडा, फरीदाबाद, मुजफ्फरनगर, पानीपत, चूरू, ग्वालियर, कुरुक्षेत्र, बाड़मेर, दमोह, पाली, नागौर, कोटा, दौसा, लखनऊ, सीकर, विशाखापत्तनम, बुलंदशहर, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, वाराणसी, गुरुग्राम, अजमेर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, भोपाल, भिवाड़ी, सागर, चंद्रपुर, मुरादाबाद, बिलाईपाड़ा, चित्तौड़गढ़, बद्दी, धुले, कटनी, सिरसा, पीथमपुर, गया, आगरा, नयागढ़, खुर्जा, सोनीपत, गुम्मिडीपूंडी, सासाराम, जोरापोखर, पटियाला, खन्ना, उदयपुर, अलवर, देवास, पटना, फिरोजाबाद, फतेहाबाद, रोहतक, बांसवाड़ा, रतलाम, सिरोही, रायपुर, अमृतसर, बारबिल, डूंगरपुर, जबलपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 12 फीसदी यानी 28 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, गुवाहाटी, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, रामनगर, सांगली, सोलापुर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुपति, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 102 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिलाई, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 88 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अजमेर, अलवर, अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दौसा, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, जबलपुर, जयपुर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, करनाल, काशीपुर, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नयागढ़, नोएडा, पाली, पंचकुला, पानीपत, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायपुर, रतलाम, रोहतक, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, टोंक, उदयपुर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में अंबाला, बागपत, भिवानी, बीकानेर, दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, जैसलमेर, जींद, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, पंचगांव, सिंगरौली में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं चरखी दादरी (336) में स्थिति बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से 28 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 102 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 23 मई को यह आंकड़ा 98 दर्ज किया गया था।

88 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 336 दर्ज किया गया। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 338 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में दो अंकों का सुधार आया है। हालांकि आज भी चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता बेहद खराब' बनी हुई है।  

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 195 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 205 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 10 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।   

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 160 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 186 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 24 मई को सिंगरौली चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा (267) दूसरे, जबकि मेरठ (265) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 169, गाजियाबाद में 267, गुवाहाटी में 34, गुरूग्राम में 140, नोएडा में 188, ग्रेटर नोएडा में 267 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 42 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 158, चेन्नई में 73, चंडीगढ़ में 74, हैदराबाद में 77, जयपुर में 189 और पटना में 116 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 28 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, बागलकोट, बेतिया, भिवंडी, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, रामनगर, सांगली, सोलापुर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुपति, उल्हासनगर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिलाई, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, श्रीनगर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विरार आदि 102 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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