हरियाणा में प्रदूषण का संकट गहराता जा रहा है, जहां 30 मार्च 2026 को रोहतक देश का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया। यहां एक्यूआई 271 पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है और 24 घंटों में 33 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। हालात इतने गंभीर हैं कि रोहतक में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1700 फीसदी अधिक है।
चिंताजनक बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के 5 शहर—रोहतक, चरखी दादरी, बल्लभगढ़, मानेसर और गुरुग्राम—शामिल हैं, जो राज्य को प्रदूषण का नया हॉटस्पॉट बनाता है।
इसके विपरीत गंगटोक देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 23 दर्ज किया गया।
वहीं दिल्ली में हल्का सुधार हुआ, लेकिन फरीदाबाद में प्रदूषण बढ़ा है। देशभर के आंकड़ों से पता चलता है कि साफ हवा वाले शहरों की संख्या घट रही है, जबकि ‘खराब’ श्रेणी वाले शहर तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आने वाले दिनों के लिए गंभीर चेतावनी है।
विश्लेषण के मुताबिक 30 मार्च 2026 को देश में रोहतक सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 271 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल हरियाणा के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 238 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 33 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि रोहतक की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। रोहतक में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,700 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 23 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर रोहतक की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 11.7 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 198 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 180 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 18 अंकों का सुधार हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 172 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 179 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 30 मार्च 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 14.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 58.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 27.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 5.6 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 0.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 8.2 की गिरावट आई है। दूसरी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 14.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (246) दूसरे जबकि चरखी दादरी (242) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (234) चौथे स्थान पर है। मानेसर-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 224 और 216 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुरुग्राम (212) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सिंगरौली (205), भिवाड़ी (192) और बरबिल (191) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (रोहतक, चरखी दादरी, बल्लभगढ़, मानेसर, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि रोहतक, चरखी दादरी, मानेसर, फरीदाबाद, मालेगांव, भिवानी, सोनीपत, बागपत, पंचगांव, जींद, कोरबा, वातवा, धुले, मुरादाबाद, नारनौल आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, गाजियाबाद, गुरुग्राम, सिंगरौली, भिवाड़ी, बरबिल, नोएडा, दिल्ली, चंद्रपुर, नयागढ़, सिरसा, मेरठ, बीकानेर, पानीपत, टोंक, बुलंदशहर, हापुड़, ग्वालियर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, बारां, हिसार, जयपुर, बाड़मेर, आगरा, नागौर, सीकर, खुर्जा, कुंजेमुरा, चूरू, जैसलमेर, मुजफ्फरनगर, लखनऊ, धनबाद, पाली, झुंझुनू, हनुमानगढ़, अलवर, करौली, पीथमपुर, सोलापुर, वृंदावन, जोरापोखर, धौलपुर, कटनी, झालावाड़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 14.4 फीसदी यानी महज 34 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, मदिकेरी, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नाहरलागुन, पंपोर, पंचकुला, पुदुचेरी, ऋषिकेश, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 138 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, महाड, मैहर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सहरसा, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 56 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अलवर, औरंगाबाद (बिहार), बागपत, बारां, बरबिल, बाड़मेर, भरतपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बुलंदशहर, चंद्रपुर, चूरू, दिल्ली, धनबाद, धौलपुर, धुले, फरीदाबाद, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, लावाड़, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, करौली, कटनी, खुर्जा, कोरबा, कुंजेमुरा, लखनऊ, मालेगांव, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नारनौल, नयागढ़, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पीथमपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, टोंक, वातवा, वृंदावन शामिल हैं।
इसी तरह बल्लभगढ़, चरखी दादरी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर, रोहतक, सिंगरौली में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से महज 34 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 138 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 29 मार्च को यह आंकड़ा 137 दर्ज किया गया था।
56 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज रोहतक में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 271 दर्ज किया गया। वहीं कल रोहतक में सूचकांक 238 रिकॉर्ड किया गया। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 33 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में (29 मार्च) को ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 260 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां वायु गुणवत्ता में 14 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 198 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 180 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 18 अंकों का सुधार हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 172 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 179 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 30 मार्च को बल्लभगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (246) दूसरे, जबकि चरखी दादरी (242) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 134, गाजियाबाद में 216, गुवाहाटी में 40, गुरूग्राम में 212, नोएडा में 182, ग्रेटर नोएडा में 246 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 48 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 118, चेन्नई में 48, चंडीगढ़ में 59, हैदराबाद में 88, जयपुर में 126 और पटना में 93 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 34 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, बेगूसराय, बेतिया, भिलाई, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कामगलुरु, एलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, मदिकेरी, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नाहरलागुन, पंपोर, पंचकुला, पुदुचेरी, ऋषिकेश, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, महाड, मैहर,
मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सहरसा, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर आदि 138 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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