देश में वायु प्रदूषण एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। 07 सितंबर 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, श्री गंगानगर देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 276 दर्ज किया गया।
एक दिन पहले 186 के मुकाबले इसमें 90 अंकों की तेज बढ़ोतरी हुई है। 201 से 300 के बीच का एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में आता है और लंबे समय तक ऐसी हवा में रहना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
श्री गंगानगर की हवा में पीएम10 प्रदूषण प्रमुख रहा और उसका स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 500 फीसदी अधिक बताया गया है।
प्रदूषण के मामले में पानीपत 155 और खोरा 154 एक्यूआई के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे, जबकि वातवा, सासाराम और गुम्मिडीपूंडी भी शीर्ष प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। दिल्ली में भी हवा बिगड़ी और एक्यूआई 55 से बढ़कर 85 हो गया, जबकि फरीदाबाद 86 से बढ़कर 105 पर पहुंच गया।
इसके विपरीत कारवार महज 16 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा।
विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 30.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 61.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 07 सितम्बर 2026 को देश में श्री गंगानगर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 276 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (06 सितम्बर) को श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 186 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 90 अंकों का भारी इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि श्री गंगानगर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
श्री गंगानगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में कारवार की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर श्री गंगानगर की तुलना कारवार से करें तो वहां स्थिति 17 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 55 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 85 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 30 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-07 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 86 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 105 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 19 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज एक्यूआई संतोषजनक से मध्यम श्रेणी पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 07 सितम्बर 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 30.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 61.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 21.7 फीसदी की कमी आई है, जोकि चिंता का विषय है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पानीपत (155) दूसरे जबकि खोरा (154) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह वातवा (153) चौथे स्थान पर है। सासाराम (146) – गुम्मिडीपूंडी (134) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
सीकर (122) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बद्दी (118), नोएडा (117) और खैरथल (112) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (श्रीगंगानगर, सीकर, खैरथल) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, खोरा, वातवा, सासाराम, गुम्मिडीपूंडी, नोएडा और फरीदाबाद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं श्रीगंगानगर, सीकर, बद्दी, खैरथल, ग्रेटर नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़, बीकानेर, विशाखापत्तनम, पाली, ब्रजराजनगर और बेगूसराय आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 30.4 फीसदी यानी 72 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, देहरादून, धुले, डोंबिवली, फतेहपुर सीकरी, गंगटोक, गया, गुवाहाटी, हाजीपुर, हापुड़, जालंधर, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कारवार, कोल्हापुर, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचकुला, परभणी, पटियाला, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, सांगली, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, ठाणे, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 146 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायरंगपुर, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सागर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 18 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें बद्दी, बेगूसराय, बेंगलुरु, बीकानेर, ब्रजराजनगर, फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, खैरथल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, नोएडा, पाली, पानीपत, सासाराम, सीकर, वातवा और विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
वहीं श्री गंगानगर (276) में स्थिति ‘खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से 72 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 146 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 06 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 140 दर्ज किया गया था।
18 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज श्री गंगानगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 276 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (06 सितम्बर) को श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 186 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 90 अंकों का भारी इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 55 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 85 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 30 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 86 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 105 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 19 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज एक्यूआई संतोषजनक से मध्यम श्रेणी पहुंच गया।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 07 सितम्बर को वातवा (153) चौथे स्थान पर है, वहीं पानीपत (155) दूसरे, जबकि खोरा (154) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 56, गाजियाबाद में 82, गुवाहाटी में 48, गुरूग्राम में 88, नोएडा में 117, ग्रेटर नोएडा में 110 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 37 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 43, चेन्नई में 74, चंडीगढ़ में 41, हैदराबाद में 57, जयपुर में 78 और पटना में 53 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 72 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारां, बरेली, बारीपाड़ा, बीड, बेलापुर, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बुलंदशहर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चरखी दादरी, कोयंबटूर, देहरादून, धुले, डोंबिवली, फतेहपुर सीकरी, गंगटोक, गया, गुवाहाटी, हाजीपुर, हापुड़, जालंधर, झांसी, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कारवार, कोल्हापुर, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचकुला, परभणी, पटियाला, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, सांगली, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, ठाणे, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा, विरार और वृंदावन शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चुरू, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायरंगपुर, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, शिवमोगा, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, श्रीनगर, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा और यमुना नगर आदि 146 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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