05 जुलाई 2026 को देश की हवा की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर राजस्थान का धौलपुर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 280 तक पहुंच गया। महज 24 घंटों में यहां प्रदूषण 46 अंक बढ़ा है और हवा में पीएम10 कणों का दबदबा दिखा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी ओर महाराष्ट्र का बीड सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई केवल 16 दर्ज किया गया। यानी धौलपुर की हवा, बीड के मुकाबले 17.5 गुना ज्यादा जहरीली रही।
राजधानी दिल्ली में भी राहत नहीं मिली। यहां एक दिन में एक्यूआई 123 से बढ़कर 161 हो गया और हवा फिर मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
हालांकि फरीदाबाद में 22 अंकों का सुधार दर्ज हुआ, लेकिन वहां भी हवा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के 231 शहरों में से 99 शहरों की हवा साफ और 86 शहरों की संतोषजनक रही, लेकिन मध्यम और खराब श्रेणी वाले शहरों की संख्या में तेज बढ़ोतरी चिंता बढ़ाती है।
खास बात यह है कि सबसे प्रदूषित 10 शहरों में हरियाणा के छह और उत्तर प्रदेश के दो शहर शामिल हैं, जो उत्तर भारत में प्रदूषण के गहराते संकट की ओर इशारा करता है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 05 जुलाई 2026 को देश में धौलपुर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 280 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। कल धौलपुर में एक्यूआई 234 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 46 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि धौलपुर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
धौलपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में बीड की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर धौलपुर की तुलना बीड से करें तो वहां स्थिति 17.5 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में सागर की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 329 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में सागर नदारद है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 123 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 161 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 38 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 141 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 119 पर पहुंच गया। हालांकि 22 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 05 जुलाई 2026 को 231 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 42.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 37.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 19.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब तीन फीसदी की गिरावट आई है। वहीं संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 18.1 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरह मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 21.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों में भी 75 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में खोरा (255) दूसरे जबकि गुरुग्राम (243) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बहादुरगढ़ (239) चौथे स्थान पर है। मानेसर (230)– बूंदी (228) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बल्लभगढ़ (216) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चरखी दादरी (195), बागपत (194) और नारनौल (194) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (गुरुग्राम, बहादुरगढ़, मानेसर, बल्लभगढ़, चरखी दादरी और नारनौल) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि खोरा, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, मानेसर, बल्लभगढ़, चरखी दादरी, बागपत, नारनौल, करनाल, भिवाड़ी, नोएडा, धारूहेड़ा, रूपनगर, दिल्ली, भिवानी, गुम्मिडीपूंडी, पंचगांव, मोदीनगर, यमुना नगर, अनंतपुर, फरीदाबाद, पाली, आगरा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं धौलपुर, बूंदी, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, भरतपुर, मंडी गोबिंदगढ़, औरंगाबाद (बिहार), फतेहाबाद, बद्दी, मेरठ, भीलवाड़ा, बाड़मेर, धनबाद, छपरा, जयपुर, अंबाला, बीकानेर, टोंक, पलवल आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 42.9 फीसदी यानी 99 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंद्रपुर, छाल, कुड्डालोर, दमोह, दौसा, देहरादून, धुले, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, कारवार, क्योंझर, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मालेगांव, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पटियाला आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 86 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देवास, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, करौली, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नंदेसरी, नेल्लोर, पटना, पीथमपुर, पूर्णिया, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, शिवसागर, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 39 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अंबाला, अनंतपुर, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, बिहार शरीफ, बीकानेर, चरखी दादरी, छपरा, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, जयपुर, करनाल, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मोदीनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, रूपनगर, सिलीगुड़ी, सिरसा, तालचेर, टोंक, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बूंदी, धौलपुर, गुरुग्राम, खोरा, मानेसर में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 231 में से 99 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 86 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 04 जुलाई को यह आंकड़ा 105 दर्ज किया गया था।
39 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में धौलपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 280 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल (04 जुलाई) धौलपुर में एक्यूआई 234 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 46 अंकों का उछाल आया है।
इससे पहले कल देश में सागर की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 329 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में सागर नदारद है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 123 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 161 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 38 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज एक बार फिर वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 141 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 119 पर पहुंच गया। हालांकि 22 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 05 जुलाई को बहादुरगढ़ (239) चौथे स्थान पर है, वहीं खोरा (255) दूसरे, जबकि गुरुग्राम (243) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 63, गाजियाबाद में 164, गुवाहाटी में 71, गुरूग्राम में 243, नोएडा में 180, ग्रेटर नोएडा में 193 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 42 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 67, चेन्नई में 67, चंडीगढ़ में 52, हैदराबाद में 41, जयपुर में 109 और पटना में 64 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 99 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, अहमदनगर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बरबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, भिलाई, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंद्रपुर, छाल, कुड्डालोर, दमोह, दौसा, देहरादून, धुले, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, कारवार, क्योंझर, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मालेगांव, मंडीदीप, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सतारा, शिलांग, सिलचर, सोलापुर, सुआकाती, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, उलहासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अलवर, अमृतसर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बारां, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देवास, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, करौली, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नंदेसरी, नेल्लोर, पटना, पीथमपुर, पूर्णिया, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, शिवसागर, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत, थूथुकुडी, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन आदि 86 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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