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वायु

प्रदूषण का मौसम: 252 में से महज 11 शहरों में हवा साफ, नोएडा-दिल्ली में स्थिति ‘बेहद खराब’

विश्लेषण से पता चला है कि 28 नवंबर को देश के 252 में से महज 11 शहरों में हवा साफ है। वहीं दूसरी तरफ नोएडा, ग्रेटर नोएडा, धारूहेड़ा, दिल्ली, मानेसर, भिवाड़ी सहित कई शहरों में स्थिति बेहद खराब है

Lalit Maurya

  • देश में प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां 252 में से महज 11 शहरों में हवा साफ दर्ज की गई। नोएडा 388 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि दिल्ली 369 के साथ चौथे स्थान पर है।

  • पीएम2.5 के उच्च स्तर से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और अधिकांश शहर डब्ल्यूएचओ मानकों से कई गुना अधिक प्रदूषित हैं।

  • नोएडा से स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,400 फीसदी अधिक है।

  • दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर नोएडा की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 29 गुणा खराब है।

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (378) दूसरे जबकि धारूहेड़ा (376) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 369 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है।

  • मानेसर-भिवाड़ी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 368 और 350 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

  • चरखी दादरी (348) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (347), सोनीपत (344) और रोहतक (338) भी शामिल हैं।

  • आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) और हरियाणा के पांच शहर (धारूहेड़ा, मानेसर, चरखी दादरी, सोनीपत, रोहतक) शामिल हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 190 रिकॉर्ड किया गया है।

विश्लेषण से पता चला है कि 28 नवंबर 2025 को देश में एक बार फिर नोएडा की हवा सबसे ज्यादा खराब है, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 388 पर पहुंच गया। गौरतलब है कि 27 नवंबर को नोएडा में एक्यूआई 391 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में तीन अंकों की मामूली गिरावट आई है।   

हालांकि इसके बावजूद नोएडा में स्थिति अभी भी ‘बेहद खराब’ बनी हुई है। रुझानों में सामने आया है कि नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

नोएडा से स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर नोएडा की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 29 गुणा खराब है। बता दें कि 26 नवंबर को देश में हापुड़ की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 366 दर्ज किया गया था। हालांकि 28 नवंबर को हापुड़ में एक्यूआई घटकर 265 पर पहुंच गया है।

राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां एक्यूआई घटकर 369 दर्ज किया गया है। हालांकि दिल्ली में अभी भी वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ बनी हुई है, जहां प्रदूषण का स्तर निर्धारित डब्ल्यूएचओ मानकों से 2,300 फीसदी अधिक है। गौरतलब है कि 11 नवंबर को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित शहर दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 428 तक पहुंच गया था।  

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 नवंबर, 2025 को 252 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 4.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 28.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 67 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक है। चिंता की बात यह है कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 8.3 फीसदी की गिरावट आई है।

इसी तरह आज संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से पांच फीसदी से अधिक की गिरावट रिकॉर्ड की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इन शहरों की संख्या में कल से करीब चार फीसदी का इजाफा हुआ है। खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों से जुड़े आंकड़ों को देखें तो उनकी गिनती में भी 11.4 फीसदी का उछाल आया है।

दूसरी तरह देश में बेहद खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में 21 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है। फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 190 रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (378) दूसरे जबकि धारूहेड़ा (376) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 369 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है। मानेसर-भिवाड़ी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 368 और 350 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

चरखी दादरी (348) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (347), सोनीपत (344) और रोहतक (338) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) और हरियाणा के पांच शहर (धारूहेड़ा, मानेसर, चरखी दादरी, सोनीपत, रोहतक) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि नोएडा, धारूहेड़ा, दिल्ली, मानेसर, भिवाड़ी, चरखी दादरी, गाजियाबाद, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, बागपत, भिवानी, कोटा, परभनी , बल्लभगढ़, खुर्जा, सिंगरौली, हापुड़, बुलंदशहर, सांगली, डूंगरपुर, अंगुल, झुंझुनू, मुजफ्फरनगर, जालोर, कोल्लम, चुरू, पीथमपुर, सीकर, बीकानेर, टोंक, मेरठ, कटक, जैसलमेर, गुम्मिडीपूंडी, जींद, भुवनेश्वर, झालावाड़, नागौर, पाली, मंडीखेड़ा, राजसमंद, नांदेड़, उदयपुर, बारबिल, तालचेर, अहमदाबाद, महाद, पुणे, जोधपुर, फरीदाबाद, अंबाला, हावड़ा, जयपुर, सिरोही, तिरुमाला, धौलपुर, करनाल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), कोलकाता, पिंपरी-चिंचवाड़, भीलवाड़ा, हनुमानगढ़, बूंदी, बेलापुर, यमुना नगर, बालासोर, बाड़मेर, हल्दिया, सोलापुर, देवास, कोल्हापुर, मंडीदीप, जलगांव, फतेहाबाद, यादगीर, दावनगेरे, प्रयागराज, आगरा, लखनऊ, बक्सर, राजमहेंद्रवरम, चित्तौड़गढ़, नासिक, आरा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, पानीपत, श्री गंगानगर, भरतपुर, चंद्रपुर, सासाराम, रतलाम, हिसार, सूरत, उल्हासनगर, बांसवाड़ा, वृंदावन, कल्याण, पटियाला, भोपाल, अजमेर, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), बिलीपाड़ा, मीरा-भायंदर, सवाई माधोपुर, तुमडीह, अकोला, बदलापुर, धनबाद, मंडी गोबिंदगढ़, विरार, जलना, कैथल, बारीपदा, मालेगांव, बद्दी, खन्ना, तिरुचिरापल्ली आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है। इन शहरों के विपरीत देश के 4.4 फीसदी यानी महज 11 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, हावेरी, किशनगंज, मदिकेरी, मंगलौर, पलकलाईपेरुर, समस्तीपुर, शिलांग, तिरुनेलवेली आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 72 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बेगूसराय, बेलगाम, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, छपरा, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, देहरादून, धारवाड़, डिंडीगुल, दुर्गापुर, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हुबली, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, कटिहार, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मदुरै, मैहर, मंगुराहा, मिलुपारा, मोतिहारी, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नारनौल, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 119 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बिलीपाड़ा, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, देवास, धनबाद, धौलपुर, धुले, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खन्ना, कोल्हापुर, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, महाद, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुकोट्टई, पुणे, राजमहेंद्रवरम, रतलाम, राउरकेला, सागर, सलेम, सासाराम, सवाई माधोपुर, सिरोही, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, सूरत, तिरुचिरापल्ली, तिरुमाला, तिरुपुर, तुमडीह, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, विरुधुनगर, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 39 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अहमदाबाद, अंगुल, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारबिल, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बुलंदशहर, चुरू, कटक, डूंगरपुर, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हापुड़, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, खुर्जा, कोल्लम, कोटा, मंडीखेड़ा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नागौर, नांदेड़, पाली, परभनी , पीथमपुर, राजसमंद, सांगली, सीकर, सिंगरौली, तालचेर, टोंक, उदयपुर शामिल हैं।

इसी तरह आज देश के 11 शहरों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। इन शहरों में भिवाड़ी, चरखी दादरी, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर, नोएडा, रोहतक, सोनीपत शामिल हैं।  

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 252 में से महज 11 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 72 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 नवंबर 2025 को यह आंकड़ा 76 दर्ज किया गया था।

119 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज भी नोएडा (388) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 400 के करीब पहुंच गया। बता दें कि कल नोएडा में सूचकांक 391 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब की आज वहां प्रदूषण के स्तर में तीन अंकों का मामूली सुधार आया है। हालांकि नोएडा में अभी भी वायु गुणवत्ता सूचकांक 'बेहद खराब' श्रेणी में बना हुआ है।

गौरतलब है कि 26 नवंबर देश में हापुड़ की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 दर्ज किया गया था।

राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 369 पर पहुंच गया। इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां 13 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 190 रिकॉर्ड किया गया। मतलब की फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज 'खराब' से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

गौरतलब है कि पिछले दो-तीन महीनों में जून, जुलाई और अगस्त के दौरान दिल्ली की वायु गुणवत्ता ज्यादातर दिन संतोषजनक रही। वहीं जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल 2025 में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब दिल्ली की हवा साफ कही जा सके। नवंबर में आठ दिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' दर्ज किया गया। इसी तरह दिसंबर 2024 में भी छह दिन वायु गुणवत्ता गंभीर दर्ज की गई थी। इस दौरान हवा में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा था कि लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 नवंबर को दिल्ली चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (378) दूसरे, जबकि धारूहेड़ा (376) तीसरे स्थान पर है।

अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 262, गाजियाबाद में 347, गुवाहाटी में 86, गुरूग्राम में 320, नोएडा में 388, ग्रेटर नोएडा में 378 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 128 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 154, चेन्नई में 130, चंडीगढ़ में 104, हैदराबाद में 120, जयपुर में 188 और पटना में 137 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 11 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, चामराजनगर, गंगटोक, हावेरी, किशनगंज, मदिकेरी, मंगलौर, पलकलाईपेरुर, समस्तीपुर, शिलांग, तिरुनेलवेली शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, अरियालुर, बागलकोट, बरेली, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, छपरा, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, देहरादून, धारवाड़, डिंडीगुल, दुर्गापुर, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुवाहाटी, हुबली, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, कटिहार, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मदुरै, मैहर, मंगुराहा, मिलुपारा, मोतिहारी, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नारनौल, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, रामनाथपुरम, ऋषिकेश, रूपनगर, सहरसा, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरसा, शिवसागर, टेन्सा, ठाणे, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उडुपी, वापी आदि 72 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से हाल-बेहाल, दिल्ली में 377, नोएडा में बढ़कर 391 पर पहुंचा एक्यूआई