देश के वायु प्रदूषण के ताजा आंकड़े एक बार फिर चेतावनी दे रहे हैं कि खराब हवा की समस्या अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही।
06 जून 2026 को बल्लभगढ़ 280 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां सिर्फ 24 घंटों में प्रदूषण 97 अंकों तक बढ़ गया।
ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और नोएडा जैसे शहर भी शीर्ष प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जबकि दिल्ली में भी एक दिन में 45 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
चिंताजनक बात यह है कि कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे खतरनाक कण हवा पर हावी हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।
हालांकि देश के आधे से अधिक शहरों में हवा अभी भी संतोषजनक श्रेणी में है, लेकिन साफ हवा वाले शहरों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
बल्लभगढ़ में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 17 गुना से अधिक पाया गया, जो बताता है कि मौसम में मामूली बदलाव भी प्रदूषण को तेजी से बढ़ा सकते हैं। यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि वायु प्रदूषण अब एक स्थानीय नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय चुनौती बन चुका है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 06 जून 2026 को देश में बल्लभगढ़ सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 280 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल बल्लभगढ़ में सूचकांक 183 दर्ज किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में 97 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बल्लभगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बल्लभगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,750 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 18 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बल्लभगढ़ की तुलना पंपोर से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।
बता दें कि इससे पहले कल फरीदाबाद में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 198 तक पहुंच गया। हालांकि आज 39 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में सूचकांक 237 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 131 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 176 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 45 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 198 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 237 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 06 जून 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 16.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 53.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 29.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 7 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से आठ फीसदी की कमी आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (280) दूसरे जबकि फरीदाबाद (237) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह नोएडा (223) चौथे स्थान पर है। पंचगांव (210)- धनबाद (209) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मेरठ (206) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पानीपत (205), बीकानेर (200), गाजियाबाद (193) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बल्लभगढ़, फरीदाबाद, पंचगांव, बठिंडा, भिवानी, मानेसर, धारूहेड़ा, बर्नीहाट (मेघालय), करनाल, कैथल, तालचेर, रूपनगर, बिलाईपाड़ा, चरखी दादरी, जींद, गुम्मिडीपूंडी, बर्नीहाट (असम), भावनगर, किशनगंज आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, नोएडा, धनबाद, पानीपत, बीकानेर, गाजियाबाद, हापुड़, दिल्ली, श्री गंगानगर, गुरुग्राम, बागपत, चूरू, हनुमानगढ़, सिंगरौली, अंगुल, पीथमपुर, बांसवाड़ा, यमुना नगर, बुलंदशहर, नागौर, उदयपुर, विशाखापत्तनम, भिवाड़ी, गया, कटनी, सीकर, छपरा, पाली, वातवा, अमृतसर, रोहतक, जालोर, लखनऊ, फतेहाबाद, बहादुरगढ़, खन्ना, बाड़मेर, कुरुक्षेत्र, दौसा, सिरोही, सिरसा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 16.9 फीसदी यानी 40 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, देहरादून, धौलपुर, गडग, गंगटोक, जलना, झांसी, कलबुर्गी, काशीपुर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, पंपोर, परभणी, पुडुचेरी, रामनगर, शिवमोगा, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 126 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बरेली, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, दमोह, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 62 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बाड़मेर, बठिंडा, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, छपरा, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, फतेहाबाद, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जालोर, झुंझुनू, जींद, कैथल, करनाल, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मानेसर, मुजफ्फरनगर, नागौर, पाली, पीथमपुर, रोहतक, रूपनगर, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, श्री गंगानगर, तालचेर, तुमडीह, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बल्लभगढ़, धनबाद, फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, नोएडा, पंचगांव, पानीपत में स्थिति खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से 40 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 126 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 05 जून को यह आंकड़ा 137 दर्ज किया गया था।
62 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 280 दर्ज किया गया। हालांकि कल वहां एक्यूआई 183 दर्ज किया गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में बल्लभगढ़ में प्रदूषण के स्तर में 97 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल फरीदाबाद में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 198 तक पहुंच गया। हालांकि आज 39 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में सूचकांक 237 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 131 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 176 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 45 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 198 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 237 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 06 जून को नोएडा (223) चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (258) दूसरे, जबकि फरीदाबाद (237) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 94, गाजियाबाद में 193, गुवाहाटी में 56, गुरूग्राम में 173, नोएडा में 223, ग्रेटर नोएडा में 258 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 62 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 111, चेन्नई में 61, चंडीगढ़ में 70, हैदराबाद में 69, जयपुर में 78 और पटना में 93 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 40 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अंबरनाथ, अररिया, बागलकोट, बैरकपुर, भिलाई, बोइसर, चामराजनगर, कोयंबटूर, देहरादून, धौलपुर, गडग, गंगटोक, जलना, झांसी, कलबुर्गी, काशीपुर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, पंपोर, परभणी, पुडुचेरी, रामनगर, शिवमोगा, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारां, बारबिल, बरेली, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, दमोह, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सतना, सवाई माधोपुर, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन आदि 126 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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