ओडिशा के तालचेर में वायु प्रदूषण चरम पर है, जहां एक्यूआई 380 तक पहुंच गया। स्थिति विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।
देश के 242 शहरों में से केवल 3.7 फीसदी में हवा साफ है, जबकि 66.9 फीसदी शहरों में स्थिति चिंताजनक है। दिल्ली में भी सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
कल देश में दिल्ली की हवा सबसे खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 380 दर्ज किया गया था। आज 144 अंकों के सुधार के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 236 पर पहुंच गया है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 210 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अंगुल (346) दूसरे जबकि तिरुपति (341) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 329 अंकों के साथ बीकानेर चौथे स्थान पर है।
कटक-सिंगरौली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 324 और 320 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बालासोर (318) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भुवनेश्वर (317), बारीपदा (312) और क्योंझर (311) भी शामिल हैं।
आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के सात (तालचेर, अंगुल, कटक, बालासोर, भुवनेश्वर, बारीपदा, क्योंझर) शहर शामिल हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि 02 जनवरी 2026 को देश में ओडिशा के कोयला शहर तालचेर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 380 रिकॉर्ड किया गया। कल तालचेर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 310 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 70 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' बनी हुई है। रुझानों में सामने आया है कि तालचेर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
तालचेर से स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,300 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 23 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर तालचेर की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।
कल देश में दिल्ली की हवा सबसे खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 380 दर्ज किया गया था। आज 144 अंकों के सुधार के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 236 पर पहुंच गया है। मतलब कि वहां आज वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 02 जनवरी 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 29.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 66.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 200 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 39 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 13.7 फीसदी की गिरावट आई है।
दूसरी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों से जुड़े आंकड़ों को देखें तो उनकी गिनती में कल से सात फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह बेहद खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो उनकी गिनती में कल से 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 210 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अंगुल (346) दूसरे जबकि तिरुपति (341) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 329 अंकों के साथ बीकानेर चौथे स्थान पर है। कटक-सिंगरौली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 324 और 320 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बालासोर (318) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भुवनेश्वर (317), बारीपदा (312) और क्योंझर (311) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ओडिशा के सात (तालचेर, अंगुल, कटक, बालासोर, भुवनेश्वर, बारीपदा, क्योंझर) शहर शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि तालचेर, अंगुल, तिरुपति, बीकानेर, कटक, सिंगरौली, बालासोर, भुवनेश्वर, बारीपदा, कोल्लम, ब्यासनगर, विशाखापत्तनम, राजमहेंद्रवरम, मुजफ्फरनगर, नागौर, देहरादून, बैरकपुर, हावड़ा, धारूहेड़ा, मोतिहारी, आसनसोल, गाजियाबाद, बाड़मेर, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, ग्वालियर, हल्दिया, पंचकुला, आरा, नोएडा, कोलकाता, काशीपुर, मंडी गोबिंदगढ़, कटिहार, लखनऊ, पीथमपुर, कुरुक्षेत्र, नागपुर, सीकर, खुर्जा, बेतिया, बिहार शरीफ, मेरठ, इंदौर, बद्दी, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, जोधपुर, जैसलमेर, पानीपत, चंडीगढ़, बुलंदशहर, बल्लभगढ़, बारबिल, हाजीपुर, नारनौल, सोनीपत, प्रयागराज, टोंक, राजगीर, तिरुमाला, मंडीदीप, पूर्णिया, बहादुरगढ़, सिवान, जालोर, करनाल, यादगीर, गुरुग्राम, हापुड़, राउरकेला, सागर, दुर्गापुर, पटना, बेगूसराय, भिवाड़ी, अमरावती (आंध्रप्रदेश), बागपत, अररिया, तिरुवनंतपुरम, कडप्पा, बिलीपाड़ा, बर्नीहाट आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं क्योंझर, धनबाद, किशनगंज, चुरू, हनुमानगढ़, रतलाम, श्री गंगानगर, छपरा, सिरसा, औरंगाबाद (बिहार), रायरंगपुर, भागलपुर, ब्रजराजनगर, तुमडीह, धुले, बांसवाड़ा, नयागढ़, टेन्सा, चंद्रपुर, फतेहाबाद, अलवर, परभनी, जालंधर, पटियाला, कैथल, कल्याण, अमृतसर, वातवा, बिलासपुर, सांगली, अकोला, सासाराम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 3.7 फीसदी यानी महज 9 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, कलबुर्गी, करूर, मदुरै, श्रीनगर, थूथुकुडी, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 71 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें गांधीनगर, गुवाहाटी, हिसार, हुबली, जबलपुर, जलना, झांसी, जींद, कन्नूर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कुंजेमुरा, लुधियाना, मदिकेरी, महाद, मैहर, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, रूपनगर, सतना, सवाई माधोपुर, शिलांग आदि शामिल हैं।
इनके उलट आज देश के 107 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, छपरा, चित्तूर, चुरू, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, देवास, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गया, गुरुग्राम, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हैदराबाद, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, किशनगंज, कोरबा, कोटा, लातूर, मंडीदीप, मानेसर, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नारनौल, नयागढ़, पाली, परभनी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सांगली, सासाराम, सिलीगुड़ी, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 45 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में आरा, आसनसोल, बद्दी, बाड़मेर, बैरकपुर, बेतिया, भोपाल, बिहार शरीफ, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, देहरादून, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हल्दिया, हावड़ा, इंदौर, जैसलमेर, जोधपुर, काशीपुर, कटिहार, खुर्जा, कोलकाता, कोल्लम, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नोएडा, पंचकुला, पानीपत, पीथमपुर, राजमहेंद्रवरम, सीकर, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
इसी तरह आज देश के 10 शहरों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। इन शहरों में अंगुल, बालासोर, बारीपदा, भुवनेश्वर, बीकानेर, कटक, क्योंझर, सिंगरौली, तालचेर, तिरुपति शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से महज नौ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 71 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 01 जनवरी 2026 को यह आंकड़ा 51 दर्ज किया गया था।
107 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज तालचेर (380) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 390 के करीब पहुंच गया। इसके साथ ही आज भी तालचेर में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ बनी हुई है। हालांकि कल से प्रदूषण में 70 अंकों का भारी इजाफा जरूर हुआ है।
गौरतलब है कि कल देश में दिल्ली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी। जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 380 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 144 अंकों के सुधार के साथ दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 236 पर पहुंच गया। मतलब कि आज दिल्ली में स्थिति बेहद खराब से 'खराब' हो गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। आज फरीदाबाद में एक्यूआई 210 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि आज भी फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 02 जनवरी को बीकानेर चौथे स्थान पर है, वहीं अंगुल (346) दूसरे, जबकि तिरुपति (341) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 234, गाजियाबाद में 239, गुवाहाटी में 74, गुरूग्राम में 187, नोएडा में 229, ग्रेटर नोएडा में 238 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 79 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 224, चेन्नई में 97, चंडीगढ़ में 202, हैदराबाद में 105, जयपुर में 153 और पटना में 181 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 9 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, कलबुर्गी, करूर, मदुरै, श्रीनगर, थूथुकुडी, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बारां, बरेली, बठिंडा, बेलापुर, बेलगाम, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवंडी, चेन्नई, छाल, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, डूंगरपुर, एलूर, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गुवाहाटी, हिसार, हुबली, जबलपुर, जलना, झांसी, जींद, कन्नूर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कुंजेमुरा, लुधियाना, मदिकेरी, महाद, मैहर, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मैसूर, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पुडुचेरी, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, रूपनगर, सतना, सवाई माधोपुर, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सूरत, ठाणे, त्रिशूर, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, विरार, वृंदावन आदि 71 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
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