वायु

प्रदूषण का रिपोर्ट कार्ड: मंडी गोबिंदगढ़ में 350 पर पहुंचा एक्यूआई, अंबाला सबसे साफ

240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 10 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है

Lalit Maurya

  • देश के 240 शहरों के ताजा वायु गुणवत्ता आंकड़ों में प्रदूषण की तस्वीर बेहद असमान और चिंताजनक बनी हुई है। 20 अप्रैल 2026 को पंजाब का मंडी गोबिंदगढ़ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 350 तक पहुंच गया और एक ही दिन में 117 अंकों की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • यह स्तर सुरक्षित सीमा से लगभग 22 गुना अधिक है, जिससे हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है और पीएम2.5 का भारी दबाव लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है। इसके विपरीत हरियाणा का अंबाला 29 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा, जो प्रदूषण और स्वच्छ हवा के बीच तीखे अंतर को उजागर करता है।

  • रिपोर्ट के मुताबिक सिंगरौली, चरखी दादरी, बल्लभगढ़, मंगुराहा, मैसूर और अंगुल जैसे शहर भी ‘खराब’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बने हुए हैं, जबकि गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली में हल्का सुधार देखने को मिला है। दिल्ली का एक्यूआई 258 से घटकर 181 पर आ गया है, जिससे वह ‘खराब’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में लौट आई है, हालांकि कई क्षेत्रों में स्थिति अभी भी संवेदनशील है। दूसरी ओर फरीदाबाद की स्थिति स्थिर बनी हुई है।

  • कुल मिलाकर, देश के केवल 10 फीसदी शहरों में ही हवा साफ है, जबकि 51.3 फीसदी शहर संतोषजनक श्रेणी में हैं और लगभग 38.8 फीसदी शहर अब भी प्रदूषण के दबाव में हैं। विश्लेषण से स्पष्ट है कि अधिकांश शहरी क्षेत्रों में पीएम2.5 और पीएम10 का प्रभाव प्रमुख बना हुआ है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खतरा लगातार बढ़ रहा है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 20 अप्रैल 2026 को देश में मंडी गोबिंदगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 350 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल मंडी गोबिंदगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 233 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 117 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि मंडी गोबिंदगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,200 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में अंबाला की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 29 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मंडी गोबिंदगढ़ की तुलना अंबाला से करें तो वहां स्थिति 12.1 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 336 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 100 से ज्यादा अंकों के सुधार के साथ इन शहरों में सूचकांक 220 से 230 के बीच बना हुआ है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 258 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 181 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 77 अंकों का भारी सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 172 दर्ज किया गया था, जो आज भी 172 दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 20 अप्रैल 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 10 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 38.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.5 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 8.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 23.5 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (309) दूसरे जबकि चरखी दादरी (262) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (252) चौथे स्थान पर है। मंगुराहा-मैसूर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 236 और 232 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

अंगुल (231) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बागपत (231), गाजियाबाद (228) और बारबिल (222) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तरप्रदेश के दो शहर (गाजियाबाद, बागपत) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडी गोबिंदगढ़, चरखी दादरी, मंगुराहा, रोहतक, मानेसर, बिलीपाड़ा, जींद, फरीदाबाद, यमुना नगर, बहादुरगढ़, वातवा, नारनौल, नंदेसरी, पंचगांव, मालेगांव, धारूहेड़ा, करनाल, बिलासपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सिंगरौली, बल्लभगढ़, बागपत, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गुरुग्राम, बुलंदशहर, हापुड़, बद्दी, दिल्ली, कुरुक्षेत्र, नोएडा, मुजफ्फरनगर, भिवाड़ी, लखनऊ, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), झुंझुनू, चंद्रपुर, चूरू, सीकर, आगरा, जयपुर, हनुमानगढ़, टोंक, खुर्जा, गया, कटनी, मेहसाणा, गुम्मिडीपूंडी, सासाराम, अहमदाबाद, बारां, जैसलमेर, भावनगर, बठिंडा, दमोह, वडोदरा, भोपाल, ग्वालियर, वाराणसी, विशाखापत्तनम, पीथमपुर, बेलापुर, नागौर, देवास, गांधीनगर, नासिक, सोनीपत, मुरादाबाद, भागलपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 10 फीसदी यानी महज 24 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चेन्नई, कोयंबटूर, गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंगलौर, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुमाला, तिरुपति शामिल हैं।

इसी तरह देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेंगलुरु, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाड, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटना आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 78 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अंकलेश्वर, बद्दी, बहादुरगढ़, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चूरू, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धुले, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, जींद, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खुर्जा, कोरबा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मालेगांव, मंडीदीप, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नोएडा, पाली, पंचगांव, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, टोंक, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में अंगुल, बागपत, बल्लभगढ़, बारबिल, चरखी दादरी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मैसूर, रोहतक में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं मंडी गोबिंदगढ़ (350) और सिंगरौली (309) में स्थिति बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से महज 24 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 123 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 19 अप्रैल को यह आंकड़ा 120 दर्ज किया गया था।

78 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 350 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल मंडी गोबिंदगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 233 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 117 अंकों का भारी उछाल आया है। यहां वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब हो गई है।

इससे पहले कल देश में गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 336 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 100 से ज्यादा अंकों के सुधार के साथ इन शहरों में सूचकांक 220 से 230 के बीच बना हुआ है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 258 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 181 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 77 अंकों का भारी सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 172 दर्ज किया गया था, जो आज भी 172 दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 20 अप्रैल को बल्लभगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (309) दूसरे, जबकि चरखी दादरी (262) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 117, गाजियाबाद में 228, गुवाहाटी में 52, गुरूग्राम में 206, नोएडा में 178, ग्रेटर नोएडा में 222 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 83 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 154, चेन्नई में 41, चंडीगढ़ में 100, हैदराबाद में 74, जयपुर में 138 और पटना में 100 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 24 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबाला, बेतिया, भिलाई, चामराजनगर, चेन्नई, कोयंबटूर, गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मंगलौर, नेल्लोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुमाला, तिरुपति, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेंगलुरु, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरै, महाड, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन आदि 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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