10 अगस्त 2026 को ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर सामने आया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 201 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। महज 24 घंटे में एक्यूआई 133 से बढ़कर 201 पहुंच गया, यानी प्रदूषण में 68 अंकों की तेज बढ़ोतरी हुई। शहर की हवा में ओजोन का दबदबा इस स्थिति को और चिंताजनक बना रहा है।
ग्रेटर नोएडा और देश की सबसे साफ हवा वाले शहर आइजोल के बीच प्रदूषण का अंतर भी बड़ा है। आइजोल में एक्यूआई महज 14 रहा, यानी ग्रेटर नोएडा का सूचकांक करीब 14 गुना अधिक था।
देशभर की तस्वीर देखें तो 242 शहरों में 86 शहरों की हवा साफ, 137 की संतोषजनक और 18 शहरों की हवा मध्यम श्रेणी में रही। हालांकि साफ हवा वाले शहरों की संख्या पिछले दिन के मुकाबले 5.5 फीसदी घटी है।
हरियाणा के चार शहर—चरखी दादरी, बल्लभगढ़, सोनीपत और फरीदाबाद—देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
वहीं दिल्ली का एक्यूआई 89 रहा और हवा संतोषजनक बनी रही। आंकड़े बताते हैं कि देश के ज्यादातर शहरों में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन कुछ शहरों में प्रदूषण का तेज उतार-चढ़ाव लगातार चिंता बढ़ा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 10 अगस्त 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (09 अगस्त) को ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 133 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 68 अंकों का इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 230 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 14.3 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में हिंगोली की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 336 दर्ज किया गया, हालांकि आज 231 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 105 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 87 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 89 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 2 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-10 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 98 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 119 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 21 अंको के उछाल के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 10 अगस्त 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 35.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 7.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 5.5 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में चरखी दादरी (171) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (130) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पाली(128) चौथे स्थान पर है। सोनीपत (124) –सिलीगुड़ी (121) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
तिरुमाला सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में फरीदाबाद (119), वातवा (115) और छपरा (114) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (चरखी दादरी, बल्लभगढ़, सोनीपत, फरीदाबाद) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, पाली, फरीदाबाद, खोरा, मानेसर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बल्लभगढ़, सोनीपत, तिरुमाला, वातवा, छपरा, पलवल, मंडी गोबिंदगढ़, पीथमपुर, विशाखापत्तनम, उदयपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 35.5 फीसदी यानी 86 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में लातूर, मैहर, मंगलौर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, पटियाला, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सांगली, शिलांग, सिंगरौली, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, त्रिशूर, वापी, विरार आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हुबली, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, जींद, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, खन्ना, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मैसूर, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पंचगांव, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 18 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें बद्दी, बल्लभगढ़, चरखी दादरी, छपरा, फरीदाबाद, हिंगोली, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, पाली, पलवल, पीथमपुर, सिलीगुड़ी, सोनीपत, तिरुमाला, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा (201) में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से 86 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 137 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 09 अगस्त को भी यह आंकड़ा 134 दर्ज किया गया था।
18 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (09 अगस्त) को ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 133 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 68 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में हिंगोली की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 336 दर्ज किया गया, हालांकि आज 231 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 105 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 87 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 89 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 2 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 98 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 119 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 21 अंको के उछाल के साथ फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 10 अगस्त को पाली (128) चौथे स्थान पर है, वहीं चरखी दादरी (171) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (130) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 82, गाजियाबाद में 95, गुवाहाटी में 40, गुरूग्राम में 100, नोएडा में 93, ग्रेटर नोएडा में 201 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 41 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 74, चेन्नई में 66, चंडीगढ़ में 33, हैदराबाद में 47, जयपुर में 69 और पटना में 71 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 86 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारां, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेलापुर, बेलगाम, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, धुले, डोंबिवली, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गजरौला, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, जोधपुर, कलबुर्गी, करौली, करनाल, कारवार, कटनी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मैहर, मंगलौर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, पटियाला, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सांगली, शिलांग, सिंगरौली, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, त्रिशूर, वापी, विरार और वृंदावन शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बाड़मेर, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हुबली, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, जींद, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, खन्ना, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मैसूर, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पंचगांव, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, सहरसा, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, यादगीर और यमुना नगर आदि 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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