06 अक्टूबर 2026 को देश की हवा में प्रदूषण के बदलते रुझान एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाले रहे। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण में गाजियाबाद 238 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां पीएम2.5 का दबदबा बना हुआ है और प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से करीब 1,450 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
एक दिन पहले भी गाजियाबाद का एक्यूआई 235 था, यानी स्थिति में सुधार के बजाय मामूली और बढ़ोतरी हुई।
हालांकि, दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्सों में राहत के संकेत भी मिले। नोएडा का एक्यूआई 268 से 189 पर आ गया, जबकि दिल्ली में यह 184 से घटकर 179 दर्ज किया गया। इसके बावजूद दिल्ली की हवा ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।
देशभर के 252 शहरों के आंकड़े बताते हैं कि 22 शहरों में हवा ‘बेहतर’ और 131 में ‘संतोषजनक’ रही, जबकि 94 शहरों में वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ और पांच शहरों में ‘खराब’ दर्ज की गई।
गजरौला, बागपत, डोंबिवली और मुंगेर भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। इसके विपरीत, महज 20 एक्यूआई के साथ मदिकेरी देश का सबसे साफ शहर रहा।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 06 अक्टूबर 2026 को देश में गाजियाबाद सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 238 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (05 अक्टूबर) को गाजियाबाद में सूचकांक 235 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 3 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,450 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गाजियाबाद की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 11.9 गुणा खराब है।
इससे पहले कल नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 268 पर पहुंच गया था। हालांकि आज 79 अंकों के भारी सुधार के साथ नोएडा में सूचकांक घटकर 189 पर आ गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 184 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 179 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 5 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
फरीदाबाद में कल एक्यूआई 224 दर्ज किया गया था, जबकि आज सरकारी आंकड़ों में फरीदाबाद का जिक्र नहीं है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 06 अक्टूबर 2026 को 252 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 8.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 39.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 9.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 3.1 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती आठ से घटकर पांच पर आ गई है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गजरौला (223) दूसरे जबकि बागपत (215) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह डोंबिवली (206) चौथे स्थान पर है। मुंगेर (202) – मेरठ (200) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पानीपत (198) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में अगरतला (196), वृंदावन (195), मोदीनगर (194) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह शहर (गाजियाबाद, गजरौला, बागपत, मेरठ, वृंदावन और मोदीनगर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गाजियाबाद, गजरौला, डोंबिवली, मुंगेर, मेरठ, मोदीनगर, गुरुग्राम, मानेसर, बद्दी, खोरा, बड़ौत, देहरादून, चंद्रपुर, ग्रेटर नोएडा, कोलकाता, गुम्मिडीपूंडी, हाजीपुर, मंडी गोबिंदगढ़, हावड़ा, हिसार, समस्तीपुर, धारूहेड़ा, गांधीनगर, महाड, भिवंडी, चरखी दादरी, नांदेड़, मुरादाबाद, नवी मुंबई, बेगूसराय, जालंधर, उज्जैन, मथुरा और वाराणसी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बागपत, पानीपत, अगरतला, वृंदावन, नोएडा, अंबाला, भिवाड़ी, दिल्ली, बहादुरगढ़, कुरुक्षेत्र, अंबरनाथ, सिरसा, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, पीथमपुर, श्री गंगानगर, पारादीप, फतेहपुर सीकरी, बारीपदा, खुर्जा, तालचेर, तुमडीह, विशाखापत्तनम, टोंक, हल्दिया, मंडीदीप, दौसा, कटनी, परभणी, अहमदाबाद, जलना, फतेहाबाद, रोहतक, भिवानी, सासाराम, पिंपरी-चिंचवाड़, हिंगोली, जोरापोखर, देवास, छपरा, वातवा, बिलीपाड़ा, नारनौल, पाली, बैरकपुर, उल्हासनगर, पटना, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, वडोदरा, चंडीगढ़, लुधियाना, सतारा, ठाणे, उदयपुर और अंकलेश्वर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 8.7 फीसदी यानी 22 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, गडग, गंगटोक, काकीनाडा, कुरनूल, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मंगलौर, नागांव, नाहरलागुन, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, सिलीगुड़ी, तिरुवनंतपुरम और विरार आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चेन्नई, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चूरू, दमोह, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, क्योंझर, खैरथल, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मैहर, मालेगांव, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नयागढ़, पंपोरे, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरोही, शिवसागर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 94 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अंबाला, अंबरनाथ, अंगुल, अंकलेश्वर, बद्दी, बहादुरगढ़, बड़ौत, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, कटक, दौसा, देहरादून, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, एलूर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलना, जोरापोखर, कटनी, खोरा, खुर्जा, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, महाड, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, नोएडा, पाली, पानीपत, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, रोहतक, समस्तीपुर, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, सिरसा, श्री गंगानगर, तालचेर, ठाणे, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।
वहीं देश में आज गाजियाबाद (238), गजरौला (223), बागपत (215), डोंबिवली (206) और मुंगेर (202) में स्थिति खराब है। इन शहरों में सूचकांक 200 से ऊपर दर्ज किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 252 में से 22 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 131 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 05 अक्टूबर को यह आंकड़ा 120 दर्ज किया गया था।
94 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 238 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (05 अक्टूबर) को गाजियाबाद में सूचकांक 235 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 3 अंकों का उछाल आया है।
इससे पहले कल नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 268 पर पहुंच गया था। हालांकि आज 79 अंकों के भारी सुधार के साथ नोएडा में सूचकांक घटकर 189 पर आ गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 184 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 179 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 5 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
फरीदाबाद में कल एक्यूआई 224 दर्ज किया गया था, जबकि आज सरकारी आंकड़ों में फरीदाबाद का जिक्र नहीं है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 06 अक्टूबर को डोंबिवली (206) चौथे स्थान पर है, वहीं गजरौला (223) दूसरे, जबकि बागपत (215) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 103, गाजियाबाद में 238, गुवाहाटी में 61, गुरूग्राम में 199, नोएडा में 189, ग्रेटर नोएडा में 153 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 77 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 56, चेन्नई में 67, चंडीगढ़ में 102, हैदराबाद में 74, जयपुर में 109 और पटना में 105 दर्ज किया गया।
देश के जिन 22 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अनंतपुर, बरेली, बेतिया, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, गडग, गंगटोक, काकीनाडा, कुरनूल, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मंगलौर, नागांव, नाहरलागुन, पुडुचेरी, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, सिलीगुड़ी, तिरुवनंतपुरम और विरार शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिलाई, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चेन्नई, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चूरू, दमोह, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, क्योंझर, खैरथल, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मैहर, मालेगांव, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नयागढ़, पंपोरे, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्रीनगर, सूरत, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, वापी, विजयवाड़ा और यादगीर आदि 131 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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