20 जुलाई 2026 को जारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के विश्लेषण में बिहार का सासाराम देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर सामने आया, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 दर्ज किया गया। यह स्तर न केवल 'खराब' श्रेणी में है, बल्कि यहां पीएम2.5 का प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से करीब 1,800 फीसदी अधिक पाया गया, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
हरियाणा के सोनीपत (248) और करनाल (202) भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जबकि शीर्ष दस प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहरों की मौजूदगी चिंता बढ़ाती है। दूसरी ओर, नाहरलागुन सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां एक्यूआई केवल 10 दर्ज हुआ।
राहत की बात यह रही कि पिछले 24 घंटों में दिल्ली के एक्यूआई में 44 अंकों की गिरावट आई, जबकि पंचगांव की हवा भी 'खराब' से 'मध्यम' श्रेणी में पहुंच गई।
देश के 233 शहरों में से 77 शहरों की हवा साफ और 123 शहरों की संतोषजनक रही, लेकिन कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 का बढ़ता स्तर यह याद दिलाता है कि प्रदूषण का संकट अभी टला नहीं है और निरंतर निगरानी व प्रभावी नियंत्रण उपायों की जरूरत बनी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 20 जुलाई 2026 को देश में सासाराम सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (19 जुलाई) को सरकारी आंकड़ों में सासाराम का जिक्र नहीं था।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सासाराम की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सासाराम में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में नाहरलागुन की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सासाराम की तुलना नाहरलागुन से करें तो वहां स्थिति 28 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में पंचगांव की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 248 दर्ज किया गया। हालांकि आज 97 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक 151 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से 'मध्यम' श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 171 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 127 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 44 अंकों का सुधार आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 19 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 135 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 168 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 33 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 20 जुलाई 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 33 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 14.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 6.1 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों में 16 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 42.3 फीसदी की कमी देखी गई। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 25 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सोनीपत (248) दूसरे जबकि करनाल (202) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह खोरा (182) चौथे स्थान पर है। जींद (178) – बहादुरगढ़ (169) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
फरीदाबाद (168) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बद्दी (151), पंचगांव (151) और श्रीगंगानगर (140) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर (सोनीपत, करनाल, जींद, बहादुरगढ़, फरीदाबाद, और पंचगांव) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सासाराम, सोनीपत, करनाल, खोरा, जींद, बहादुरगढ़, फरीदाबाद, पंचगांव, मंडी गोबिंदगढ़, दिल्ली, भिवानी, कैथल, मानेसर, गुरुग्राम, चरखी दादरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बद्दी, श्रीगंगानगर, बल्लभगढ़, बागपत, सिरसा, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गाजियाबाद, तिरुमाला, टोंक, छपरा, हिसार, विशाखापत्तनम, वातवा, सवाई माधोपुर, चुरू आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 33 फीसदी यानी 77 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में फिरोजाबाद, हाजीपुर, हिंगोली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मालेगांव, मंगलौर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, हुबली, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कारवार, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 30 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, छपरा, चुरू, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हिसार, जींद, कैथल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, नोएडा, पंचगांव, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सिरसा, श्रीगंगानगर, तिरुमाला, टोंक, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह करनाल (202), सासाराम (289) और सोनीपत (248) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से 77 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 123 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 19 जुलाई को यह आंकड़ा 106 दर्ज किया गया था।
30 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सासाराम में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (19 जुलाई) को सरकारी आंकड़ों में सासाराम का जिक्र नहीं था।
इससे पहले कल देश में पंचगांव की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 248 दर्ज किया गया। हालांकि आज 97 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक 151 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से 'मध्यम' श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 171 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 127 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 44 अंकों का सुधार आया है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 135 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 168 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 33 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 20 जुलाई को खोरा (182) चौथे स्थान पर है, वहीं सोनीपत (248) दूसरे, जबकि करनाल (202) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 63, गाजियाबाद में 122, गुवाहाटी में 96, गुरूग्राम में 103, नोएडा में 123, ग्रेटर नोएडा में 123 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 38 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 51, चेन्नई में 84, चंडीगढ़ में 64, हैदराबाद में 43, जयपुर में 97 और पटना में 61 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 77 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बरेली, बीड, बेलापुर, भरतपुर, भिलाई, भोपाल, बिलासपुर, बोइसर, चामराजनगर, चंद्रपुर, दमोह, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, हाजीपुर, हिंगोली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, कडप्पा, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मालेगांव, मंगलौर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सांगली, शिवमोगा, शिवसागर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, उज्जैन, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, हुबली, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कारवार, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नलबाड़ी, नारनौल, नेल्लोर, पाली, पलवल, पंपोर, पंचकुला, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, रायबरेली, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, सतना, सीकर, सिलचर, सिंगरौली, सिरोही, सोलापुर, सूरत, तालचेर, थूथुकुडी, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यमुना नगर आदि 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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