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वायु

प्रदूषण ने फिर बढ़ाई चिंता: पानीपत में 259 पर पहुंचा एक्यूआई, दिल्ली-फरीदाबाद समेत कई शहरों में बिगड़ी हवा

पानीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,600 फीसदी अधिक है।

Lalit Maurya

  • देश में वायु प्रदूषण एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है। 08 सितम्बर 2026 को पानीपत देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 259 दर्ज किया गया। यह ‘खराब’ श्रेणी में है और एक दिन पहले के 155 के मुकाबले 104 अंकों की तेज बढ़ोतरी है।

  • पानीपत की हवा में पीएम2.5 प्रदूषण का दबदबा रहा और यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,600 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • प्रदूषण की यह मार केवल पानीपत तक सीमित नहीं रही। ग्रेटर नोएडा 222 एक्यूआई के साथ दूसरे और बल्लभगढ़ 172 के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

  • खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, बुलंदशहर, गाजियाबाद और नोएडा समेत कई शहरों में भी हवा खराब रही। दिल्ली में एक्यूआई 85 से बढ़कर 113 और फरीदाबाद में 105 से बढ़कर 121 हो गया।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 254 शहरों में 61 की हवा बेहतर, 152 की संतोषजनक और 39 की मध्यम रही, जबकि पानीपत और ग्रेटर नोएडा में स्थिति ‘खराब’ रही। वहीं कारवार 17 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 08 सितम्बर 2026 को देश में पानीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 259 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (07 सितम्बर) को पानीपत में वायु गुणवत्ता सूचकांक 155 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 104 अंकों का भारी इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पानीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पानीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,600 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में कारवार की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पानीपत की तुलना कारवार से करें तो वहां स्थिति 15.2 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में श्री गंगानगर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 276 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 150 अंकों के सुधार के साथ श्री गंगानगर में सूचकांक घटकर 126 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 85 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 113 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 28 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है। 

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-08 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 105 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 121 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 16 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 सितम्बर 2026 को 254 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 24 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 59.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 16.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 15.3 फीसदी की कमी आई है, जोकि चिंता का विषय है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 116 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (222) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (172) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह खोरा (155) चौथे स्थान पर है। मंडी गोबिंदगढ़ (144) –बुलंदशहर (133) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

श्री गंगानगर (126) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (125), जींद (125) और नोएडा (123) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (ग्रेटर नोएडा, खोरा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, नोएडा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, खोरा, जींद, यमुना नगर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुम्मिडीपूंडी, मेरठ, बर्नीहाट (असम), जालंधर, अमृतसर, बिलीपाड़ा और भागलपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, मंडी गोबिंदगढ़, बुलंदशहर, श्री गंगानगर, गाजियाबाद, नोएडा, सागर, ब्रजराजनगर, विशाखापत्तनम, बेगूसराय, तालचेर, छपरा, दिल्ली, सिरसा, वातवा, कैथल, सवाई माधोपुर, अगरतला, कुड्डालोर, खैरथल, टोंक, भिवाड़ी, शामली और दौसा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 24 फीसदी यानी 61 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बरेली, बीड, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, चामराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, धौलपुर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, इंदौर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कारवार, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, पंचकुला, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सांगली, सासाराम, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, तुमडीह आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 152 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बूंदी, ब्यासनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पाली, पलवल, पंपोर, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 39 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अमृतसर, बद्दी, बल्लभगढ़, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवाड़ी, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, छपरा, कुड्डालोर, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, जालंधर, जींद, कैथल, खैरथल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, नोएडा, सागर, सवाई माधोपुर, शामली, सिरसा, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, वातवा, विशाखापत्तनम और यमुना नगर आदि शामिल हैं।

वहीं पानीपत (259) और ग्रेटर नोएडा (222) में स्थिति ‘खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 254 में से 61 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 152 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 07 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 146 दर्ज किया गया था।

30 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पानीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 259 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (07 सितम्बर) को पानीपत में वायु गुणवत्ता सूचकांक 155 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 104 अंकों का भारी इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

इससे पहले कल देश में श्री गंगानगर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 276 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 150 अंकों के सुधार के साथ श्री गंगानगर में सूचकांक घटकर 126 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 85 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 113 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 28 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है। 

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 105 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 121 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 16 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 08 सितम्बर को खोरा (154) चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (222) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (172) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 58, गाजियाबाद में 125, गुवाहाटी में 56, गुरूग्राम में 82, नोएडा में 123, ग्रेटर नोएडा में 222 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 41 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 47, चेन्नई में 83, चंडीगढ़ में 46, हैदराबाद में 54, जयपुर में 100 और पटना में 77 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 61 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बरेली, बीड, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, चामराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, धौलपुर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, इंदौर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कारवार, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, पंचकुला, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सांगली, सासाराम, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, तुमडीह, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार और यादगीर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बूंदी, ब्यासनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पाली, पलवल, पंपोर, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सतारा, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, सोनीपत, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा और वृंदावन आदि 152 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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