देश में वायु प्रदूषण की समस्या अब केवल दिल्ली जैसे बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 22 सितंबर 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश का खोरा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 दर्ज किया गया। यह ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है और एक दिन पहले के 254 के मुकाबले 48 अंक अधिक है।
खोरा की हवा में पीएम2.5 का दबदबा रहा, जबकि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक पीएम2.5 गाइडलाइन से करीब 1,900 फीसदी अधिक बताया गया है।
खोरा के बाद गुरुग्राम और सहरसा में एक्यूआई 242, ग्रेटर नोएडा में 239 और नोएडा में 206 दर्ज किया गया।
देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर शामिल रहे। दूसरी ओर, मिजोरम की राजधानी आइजोल में एक्यूआई महज 15 रहा, जो खोरा के मुकाबले करीब 20 गुना कम है। बड़ौत में भी एक दिन में 124 अंकों का सुधार हुआ और एक्यूआई 286 से घटकर 162 पर आ गया।
देश के 243 शहरों के आंकड़ों में 55 शहरों की हवा ‘बेहतर’, 113 की ‘संतोषजनक’ और 69 शहरों की ‘मध्यम’ श्रेणी में रही। वहीं छह शहरों में हवा ‘खराब’ और खोरा में ‘बेहद खराब’ दर्ज की गई। दिल्ली में एक्यूआई 169 से बढ़कर 178 हो गया, जबकि फरीदाबाद में 151 से घटकर 113 पर आया।
आंकड़े बताते हैं कि देश के कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 प्रदूषण प्रमुख चिंता बने हुए हैं। ऐसे में साफ हवा की चुनौती महानगरों से निकलकर छोटे और औद्योगिक शहरों तक फैलती दिखाई दे रही है, जहां प्रदूषण का बढ़ता स्तर स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता पैदा कर रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 22 सितम्बर 2026 को देश में खोरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (21 सितम्बर) खोरा में सूचकांक 254 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 48 अंकों का इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि खोरा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
खोरा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,900 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर खोरा की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 20.1 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में बड़ौत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 286 दर्ज किया गया। हालांकि आज 124 अंकों के भारी सुधार के साथ बड़ौत में एक्यूआई घटकर 162 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 169 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 178 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 9 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-22 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 151 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 113 पर पहुंच गया। हालांकि 38 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 22 सितम्बर 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 22.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 46.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 31.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब दो फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 16.9 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 53.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता की खबर है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती पांच से छह पर पहुंच गई है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम (242) दूसरे जबकि सहरसा तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (239) चौथे स्थान पर है। नोएडा (206) – मानेसर (204) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
यमुना नगर (200) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मंडी गोबिंदगढ़ (196), बहादुरगढ़ (190) और फतेहपुर सीकरी (190) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (खोरा, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, फतेहपुर सीकरी) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि खोरा, गुरुग्राम, मानेसर, यमुनानगर, मंडी गोबिंदगढ़, बहादुरगढ़, फतेहपुर सीकरी, हापुड़, मथुरा, गजरौला, गाजियाबाद, वातवा, बर्नीहाट (मेघालय), जींद, पीथमपुर, बड़ौत, पाली, भिवाड़ी, जालंधर, मेरठ, गोरखपुर, अहमदाबाद, चरखी दादरी, धारूहेड़ा, जयपुर, हाजीपुर, ग्वालियर, जालना और लुधियाना आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सहरसा, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, दिल्ली, बागपत, बीकानेर, करौली, नागौर, वृंदावन, दौसा, अंबाला, बुलंदशहर, अलवर, मुजफ्फरनगर, हनुमानगढ़, जालोर, चूरू, श्री गंगानगर, खुर्जा, अंबरनाथ, चंद्रपुर, नारनौल, अंकलेश्वर, फरीदाबाद, जोधपुर, कैथल, भरतपुर, जैसलमेर, सिरसा, उदयपुर, मुरादाबाद, सवाई माधोपुर, अमृतसर, मालेगांव, हिसार, मंडीदीप, भीलवाड़ा, कुरुक्षेत्र, राजकोट और आगरा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 22.6 फीसदी यानी 55 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गया, हल्दिया, इंदौर, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, नाहरलागुन, नयागढ़, पुडुचेरी, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 113 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें गुवाहाटी, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, काकीनाडा, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सतारा, सतना, सिरोही, सिवान, सोनीपत, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 69 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अंकलेश्वर, बागपत, बहादुरगढ़, बठिंडा, बेगूसराय, भागलपुर, बीकानेर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चुरू, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, हापुड़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झुंझुनू, जींद, कैथल, खैरथल, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नारनौल, पाली, पानीपत, पटना, पीथमपुर, राजगीर, समस्तीपुर, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, तालचेर, वातवा, वृंदावन और यमुनानगर शामिल हैं।
वहीं गुरुग्राम (242), सहरसा (242), ग्रेटर नोएडा (239), नोएडा (206) और मानेसर (204) में स्थिति 'खराब' जबकि खोरा (302) में बेहद खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से 55 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 113 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 21 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 136 दर्ज किया गया था।
69 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज खोरा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 दर्ज किया गया, जोकि ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (21 सितम्बर) खोरा में सूचकांक 254 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 48 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में बड़ौत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 286 दर्ज किया गया। हालांकि आज 124 अंकों के भारी सुधार के साथ बड़ौत में एक्यूआई घटकर 162 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 169 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 178 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 9 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 151 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 113 पर पहुंच गया। हालांकि 38 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 22 सितम्बर को ग्रेटर नोएडा (239) चौथे स्थान पर है, वहीं गुरुग्राम (242) दूसरे, जबकि सहरसा तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 104, गाजियाबाद में 178, गुवाहाटी में 66, गुरूग्राम में 242, नोएडा में 206, ग्रेटर नोएडा में 239 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 52 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 66, चेन्नई में 54, चंडीगढ़ में 53, हैदराबाद में 70, जयपुर में 119 और पटना में 77 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 55 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, आरा, आसनसोल, बालासोर, बारां, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बेलापुर, बेतिया, भिलाई, भुवनेश्वर, ब्यासनगर, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कटक, गंगटोक, गया, हल्दिया, इंदौर, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, नाहरलागुन, नयागढ़, पुडुचेरी, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सोलापुर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम और तुमडीह शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंगुल, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, डोंबिवली, डूंगरपुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गुंटूर, गुवाहाटी, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, काकीनाडा, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मंगुराहा, मेहसाणा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सतारा, सतना, सिरोही, सिवान, सोनीपत, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार और विशाखापत्तनम आदि 113 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं