पहाड़ों की जिस हवा को लोग शहरों के धुएं और धूल से दूर राहत की सांस मानते हैं, 26 सितम्बर को उसी लेह ने देश के प्रदूषण मानचित्र पर सबसे ऊपर जगह बनाई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण में खुलासा हुआ है कि, लेह 195 एक्यूआई के साथ देश का सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। हालांकि, यह स्तर ‘मध्यम’ श्रेणी में है और एक दिन पहले के 198 के मुकाबले इसमें 3 अंकों का सुधार हुआ है। लेकिन चिंता की बात यह है कि लेह में प्रदूषण पर ओजोन का दबदबा रहा और यहां दर्ज स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 200 फीसदी अधिक था।
इसके उलट कर्नाटक का मदिकेरी 14 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा। दोनों शहरों के बीच प्रदूषण का अंतर करीब 13.9 गुना रहा—एक तरफ पहाड़ी हवा में प्रदूषण की चिंता, तो दूसरी तरफ अपेक्षाकृत साफ हवा में सांस लेने की राहत।
देशभर की तस्वीर देखें तो 243 में से 86 शहरों यानी 35.4 फीसदी में हवा ‘बेहतर’ रही, जबकि 137 शहरों यानी 56.4 फीसदी में वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ दर्ज हुई। वहीं 20 शहरों में एक्यूआई 101 से 200 के बीच रहा। दिल्ली में भी सूचकांक 78 से घटकर 72 और फरीदाबाद में 94 से 93 हुआ है, जिससे दोनों शहरों में हवा ‘संतोषजनक’ बनी रही।
इस बीच पीथमपुर में सबसे बड़ा सुधार देखने को मिला। 25 सितम्बर के 203 एक्यूआई से 59 अंकों की गिरावट के बाद 26 सितम्बर को यहां एक्यूआई 144 दर्ज हुआ।
जिस हवा में सांस लेने के लिए लोग पहाड़ों का रुख करते हैं, उसी हवा ने 26 सितम्बर को एक चौंकाने वाला आंकड़ा दर्ज किया। लद्दाख का लेह 195 के एक्यूआई के साथ इस दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा।
हालांकि, पिछले दिन के मुकाबले प्रदूषण में मामूली सुधार हुआ है। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि (25 सितम्बर) को लेह में सूचकांक 198 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 3 अंकों का सुधार आया है। रुझानों में यह भी सामने आया है कि लेह की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है।
देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। लेह में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 200 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर लेह की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 13.9 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में पीथमपुर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 203 दर्ज किया गया। हालांकि आज 59 अंकों के भारी सुधार के साथ पीथमपुर में एक्यूआई घटकर 144 पर पहुंच गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 78 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 72 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 6 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-26 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 94 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 93 पर पहुंच गया। इसके साथ ही एक अंक के मामूली सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 26 सितम्बर 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 35.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 8.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 7 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 31 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में तुमडीह (159) दूसरे जबकि मंडी गोबिंदगढ़ (149) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पीथमपुर (144) चौथे स्थान पर है। पानीपत (141) – गुम्मिडीपूंडी (140) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बीकानेर (138) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में अंबरनाथ, करनाल, और पाली (125) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के दो शहर (पानीपत, करनाल) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि तुमडीह, मंडी गोबिंदगढ़, पानीपत, गुम्मिडीपूंडी, करनाल, पाली, यमुना नगर और जींद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं पीथमपुर, बीकानेर, अंबरनाथ, बद्दी, विशाखापत्तनम, छपरा, वातवा, अंबाला, उदयपुर और कैथल आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 35.4 फीसदी यानी 86 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में देहरादून, धौलपुर, फतेहपुर सीकरी, ग्रेटर नोएडा, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हावेरी, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, झालावाड़, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सांगली, सासाराम, सिलीगुड़ी, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उडुपी, वाराणसी, विजयवाड़ा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, खैरथल, खन्ना, खोरा, किशनगंज, कोहिमा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, महाद, मालेगांव, मैंगलोर, मंगुराहा, मेहसाणा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचकूला, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 20 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अंबाला, अंबरनाथ, बद्दी, बीकानेर, छपरा, एलूर, गुम्मिडीपूंडी, जींद, कैथल, करनाल, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, पाली, पानीपत, पीथमपुर, तुमडीह, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम और यमुना नगर शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से 86 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 137 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 25 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 128 दर्ज किया गया था।
20 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज लेह में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 195 दर्ज किया गया, जोकि ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (25 सितम्बर) लेह में सूचकांक 198 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 3 अंकों का सुधार आया है।
इससे पहले कल देश में पीथमपुर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 203 दर्ज किया गया। हालांकि आज 59 अंकों के भारी सुधार के साथ पीथमपुर में एक्यूआई घटकर 144 पर पहुंच गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 78 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 72 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 6 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 94 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 93 पर पहुंच गया। इसके साथ ही एक अंक के मामूली सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 26 सितम्बर को पीथमपुर (144) चौथे स्थान पर है, वहीं तुमडीह (159) दूसरे, जबकि मंडी गोबिंदगढ़ (149) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 68, गाजियाबाद में 65, गुवाहाटी में 37, गुरूग्राम में 90, नोएडा में 70, ग्रेटर नोएडा में 47 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 38, चेन्नई में 78, चंडीगढ़ में 63, हैदराबाद में 54, जयपुर में 76 और पटना में 54 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 86 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदनगर, आइजोल, आसनसोल, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बारबिल, बरेली, बैरकपुर, बीड, बेंगलुरु, बेतिया, भिलाई, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, दावणगेरे, देहरादून, धौलपुर, फतेहपुर सीकरी, ग्रेटर नोएडा, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हावेरी, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, झालावाड़, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पंचगांव, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सांगली, सासाराम, सिलीगुड़ी, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उडुपी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार और वृंदावन शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बड़ौत, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बेगूसराय, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, खैरथल, खन्ना, खोरा, किशनगंज, कोहिमा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, महाद, मालेगांव, मैंगलोर, मंगुराहा, मेहसाणा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचकूला, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा और यादगीर आदि 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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