वायु

प्रदूषण का गणित: हरियाणा में प्रदूषण से बिगड़ती स्थिति, सोनीपत में 295 तक पहुंचा एक्यूआई

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 142 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 127 पर पहुंच गया है

Lalit Maurya

  • देश में मानसून की दस्तक के बावजूद वायु प्रदूषण का संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। 24 जून के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा एक बार फिर प्रदूषण के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है।

  • सोनीपत लगातार एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 295 तक पहुंच गया। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,850 फीसदी अधिक है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत देता है।

  • चिंताजनक बात यह है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर शामिल हैं, जबकि हवा में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे घातक कणों का दबदबा बना हुआ है।

  • हालांकि दिल्ली में 24 घंटे के दौरान प्रदूषण में कुछ राहत मिली और एक्यूआई 142 से घटकर 127 पर पहुंच गया, लेकिन फरीदाबाद में प्रदूषण तेजी से बढ़ा है।

  • राष्ट्रीय तस्वीर में अधिकांश शहरों की हवा संतोषजनक रही, फिर भी खराब श्रेणी वाले शहरों की संख्या में करीब 60 फीसदी की बढ़ोतरी इस बात की चेतावनी है कि प्रदूषण का संकट अभी टला नहीं है। साफ है कि छिटपुट सुधार के बीच उत्तर भारत, खासकर हरियाणा, अभी भी जहरीली हवा की गिरफ्त में है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 24 जून 2026 को एक बार फिर देश में सोनीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 295 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सोनीपत में एक्यूआई 269 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 26 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि सोनीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

सोनीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,850 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सोनीपत की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 21 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 142 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 127 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 15 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में एक बार फिर वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 119 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 165 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 46 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 24 जून 2026 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 26.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 24.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 1.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 7.6 फीसदी की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 4.1 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की संख्या में कल से करीब 60 फीसदी का बढ़ोतरी दर्ज की गई, जोकि चिंता का विषय है। 

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में खोरा (287) दूसरे जबकि मोदीनगर (254) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह कैथल (253) चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम (247) –पानीपत (234) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

भिवानी (230) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मेरठ (216), हिसार (192) और बल्लभगढ़ (180) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर (सोनीपत, कैथल, गुरुग्राम, पानीपत, भिवानी, हिसार और बल्लभगढ़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सोनीपत, खोरा, मोदीनगर, गुरुग्राम, भिवानी, मेरठ, हिसार, जींद, यमुना नगर, फरीदाबाद, समस्तीपुर, करनाल, फतेहपुर सीकरी, काशीपुर, बर्नीहाट (असम), बहादुरगढ़, मानेसर, पलवल, सागर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं कैथल, पानीपत, बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरनगर, बीकानेर, बागपत, नोएडा, बुलंदशहर, बेगूसराय, भिवाड़ी, विशाखापत्तनम, गाजियाबाद, सीकर, पाली, दिल्ली, बाड़मेर, सिंगरौली, नयागढ़, अंबाला, छपरा, उदयपुर, चूरू, मुरादाबाद, जैसलमेर, वातवा, अगरतला, बांसवाड़ा, झुंझुनू, जोधपुर, नागौर, खुर्जा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 26.1 फीसदी यानी 64 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेलापुर, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, बोइसर, ब्रजराजनगर, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दौसा, देहरादून, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, जोरापोखर, कडप्पा, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मथुरा, मेहसाणा, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, पटना, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजकोट आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 51 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अंबाला, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, बेगूसराय, भिवाड़ी, बीकानेर, बुलंदशहर, बक्सर, बर्नीहाट (असम), छपरा, चूरू, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहपुर सीकरी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हाजीपुर, हिसार, जैसलमेर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, करनाल, काशीपुर, खुर्जा, मंडीखेड़ा, मानेसर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नयागढ़, नोएडा, पाली, पलवल, सागर, समस्तीपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, तालचेर, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह भिवानी, गुरुग्राम, कैथल, खोरा, मेरठ, मोदीनगर, पानीपत, सोनीपत में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से 64 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 122 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 23 जून को यह आंकड़ा 132 दर्ज किया गया था।

51 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर सोनीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 295 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सोनीपत में एक्यूआई 269 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 26 अंकों की बढ़ोतरी हुई है।    

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 142 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 127 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 15 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में एक बार फिर वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।  

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 119 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 165 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 46 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 24 जून को कैथल (253) चौथे स्थान पर है, वहीं खोरा (287) दूसरे, जबकि मोदीनगर (254) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 87, गाजियाबाद में 140, गुवाहाटी में 55, गुरूग्राम में 247, नोएडा में 156, ग्रेटर नोएडा में 180 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 47 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 100, चेन्नई में 61, चंडीगढ़ में 64, हैदराबाद में 49, जयपुर में 99 और पटना में 88 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 64 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, बीड, बेलापुर, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, बोइसर, ब्रजराजनगर, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, जलना, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रामनगर, सांगली, सतारा, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, विजयपुरा, विरार, यादगीर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंधप्रदेश), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दौसा, देहरादून, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, जोरापोखर, कडप्पा, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मथुरा, मेहसाणा, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, पटना, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 122 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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