धनबाद के सबसे बड़े थोक बाजार रांगाटाड़ के पास चौराहे पर शेयरिंग ऑटो का जमावड़ा। फोटो : विकास चौधरी/ सीएसई 
वायु

बड़े से छोटे शहरों तक फैल रहा प्रदूषण, पंचगांव सबसे प्रदूषित, दूसरे पायदान पर मेरठ

दूसरी तरफ देश में अंबरनाथ की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया।

Lalit Maurya

  • यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि प्रदूषण के उस बदलते संकट की भी चेतावनी है, जो अब महानगरों की सीमाएं लांघकर छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच चुका है।

  • 15 जून 2026 को पंचगांव देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां एक्यूआई 231 दर्ज किया गया और हवा में घुले पीएम2.5 कण सुरक्षित सीमा से 14 गुणा अधिक पाए गए।

  • मेरठ, बाड़मेर, अंगुल और जींद जैसे शहर भी प्रदूषण की गंभीर मार झेल रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि एक ही दिन में खराब हवा वाले शहरों की संख्या में 266 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जबकि साफ हवा वाले शहरों की संख्या घट गई।

  • हालांकि देश के अधिकांश शहरों में वायु गुणवत्ता अभी संतोषजनक श्रेणी में है, लेकिन उत्तर भारत के कई शहरों में पीएम10 और पीएम2.5 का बढ़ता दबाव भविष्य के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है।

  • दिल्ली में प्रदूषण का स्तर स्थिर बना हुआ है, जबकि फरीदाबाद में कुछ राहत देखने को मिली।

  • दूसरी ओर अंबरनाथ ने देश की सबसे स्वच्छ हवा का दर्जा हासिल किया। यह तस्वीर बताती है कि भारत में वायु प्रदूषण अब कुछ चुनिंदा महानगरों की समस्या नहीं रह गया, बल्कि बड़े से छोटे शहरों तक फैलता एक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 15 जून 2026 को देश में पंचगांव सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 231 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल पंचगांव में सूचकांक 206 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में 25 अंकों का इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पंचगांव की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पंचगांव में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में अंबरनाथ की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पंचगांव की तुलना अंबरनाथ से करें तो वहां स्थिति 15.4 गुणा खराब है।

बता दें कि इससे पहले कल पानीपत में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 258 तक पहुंच गया था। वहीं आज 51 अंकों के सुधार के साथ पानीपत में सूचकांक 207 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वहां आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। 

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दिल्ली में कल एक्यूआई 151 दर्ज किया गया था, जो आज भी 151 पर बना हुआ है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।    

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 108 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 78 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 30 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 जून 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 13.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 62.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 23.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 31.3 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 4.2 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती 8 फीसदी घट गई है। इसके उलट खराब हवा वाले शहरों की संख्या में कल से करीब 266 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मेरठ (223) दूसरे जबकि बाड़मेर (221) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह अंगुल (212) चौथे स्थान पर है। जींद (210) – बर्नीहाट (मेघालय) (207) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

पानीपत सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बागपत (201), ग्रेटर नोएडा (201) और जैसलमेर (201) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (मेरठ, बागपत, ग्रेटर नोएडा) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पंचगांव, जींद, बर्नीहाट (मेघालय), मुजफ्फरनगर, रूपनगर, मानेसर, चरखी दादरी, करनाल, नारनौल आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं मेरठ, बाड़मेर, पानीपत, बागपत, ग्रेटर नोएडा, जैसलमेर, गुरुग्राम, बुलंदशहर, सहरसा, उदयपुर, गाजियाबाद, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, दिल्ली, हापुड़, नोएडा, बीकानेर, हिसार, चूरू, रोहतक, सिरसा, तिरुमाला, मुरादाबाद, धारूहेड़ा, पीथमपुर, सिंगरौली, वातवा, बांसवाड़ा, अगरतला, कुरुक्षेत्र, सीकर, पाली, आगरा, झुंझुनू, प्रतापगढ़, रतलाम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 13.8 फीसदी यानी 33 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, डूंगरपुर, गडग, गंगटोक, झांसी, कलबुर्गी, कल्याण, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मुंगेर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, रामनगर, समस्तीपुर, सांगली आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 149 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंगलौर, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नांदेड़, पलवल, पंचकुला, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 46 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, आगरा, बद्दी, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, भरतपुर, भिवाड़ी, बीकानेर, बुलंदशहर, बक्सर, चरखी दादरी, चूरू, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, हापुड़, हिसार, झुंझुनू, करौली, करनाल, कुरुक्षेत्र, मंडीखेड़ा, मानेसर, मुरादाबाद, नारनौल, नोएडा, पाली, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रतलाम, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरसा, तिरुमाला, तुमडीह, उदयपुर, वातवा आदि शामिल हैं।

इसी तरह अंगुल, बागपत, बाड़मेर, बर्नीहाट (मेघालय), ग्रेटर नोएडा, जैसलमेर, जींद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पंचगांव, पानीपत में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से 33 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 149 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 14 जून को यह आंकड़ा 143 दर्ज किया गया था।

46 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पंचगांव में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 231 दर्ज किया गया। हालांकि कल वहां एक्यूआई 206 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में पंचगांव में प्रदूषण के स्तर में 25 अंकों का उछाल आया है। 

इससे पहले कल पानीपत में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 258 तक पहुंच गया था। वहीं आज 51 अंकों के सुधार के साथ पानीपत में सूचकांक 207 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वहां आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।            

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दिल्ली में कल एक्यूआई 151 दर्ज किया गया था, जो आज भी 151 पर बना हुआ है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।        

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 108 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 78 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 30 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 15 जून को अंगुल (212) चौथे स्थान पर है, वहीं मेरठ (223) दूसरे, जबकि बाड़मेर (221) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 75, गाजियाबाद में 162, गुवाहाटी में 64, गुरूग्राम में 195, नोएडा में 146, ग्रेटर नोएडा में 201 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 94, चेन्नई में 54, चंडीगढ़ में 68, हैदराबाद में 62, जयपुर में 84 और पटना में 96 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 33 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, अनंतपुर, बेतिया, भिलाई, चामराजनगर, कोयंबटूर, डूंगरपुर, गडग, गंगटोक, झांसी, कलबुर्गी, कल्याण, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मुंगेर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, रामनगर, समस्तीपुर, सांगली, शिवमोगा, श्रीनगर, सूरत, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।

वहीं अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बहादुरगढ़, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोईसर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंगलौर, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नांदेड़, पलवल, पंचकुला, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सतना, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, तुमकुरु, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यमुना नगर आदि 149 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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