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वायु

गुरुग्राम के मानेसर में 289 तक पहुंचा एक्यूआई, सिंगरौली-मेरठ में भी स्थिति खराब

डाउन टू अर्थ द्वारा किए देश के 252 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि आज यानी 23 अक्टूबर को 128 शहरों में हवा चिंताजनक है, जबकि मानेसर में एक्यूआई 18 अंक बढ़कर 289 पर पहुंच गया

Lalit Maurya

  • देश में वायु प्रदूषण अब महज बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गया।

  • डाउन टू अर्थ द्वारा 23 अक्टूबर 2026 को 252 शहरों के सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि आधे से अधिक शहरों में हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है।

  • मानेसर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 18 अंक बढ़कर 289 पर पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 284, सिंगरौली में 274 और मेरठ में 274 दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश के छह शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जो क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है।

  • विश्लेषण के मुताबिक, देश के 252 शहरों में से 128 में वायु गुणवत्ता खराब या मध्यम स्तर पर दर्ज की गई, जबकि केवल 24 शहरों की हवा साफ रही।

  • दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा और एक्यूआई 223 से बढ़कर 230 पर पहुंच गया। इसके विपरीत, फरीदाबाद में सूचकांक छह अंक गिरकर 111 दर्ज किया गया।

  • कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे महीन कण प्रदूषण की प्रमुख वजह बने हुए हैं। ये कण सांस और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं।

  • आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल महानगरों ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में भी प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 23 अक्टूबर 2026 को देश में मानेसर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (22 अक्टूबर) को मानेसर में सूचकांक 271 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 18 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि मानेसर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

मानेसर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मानेसर की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 22 गुणा खराब है।

इससे पहले कल पंचगांव में एक्यूआई 378 दर्ज किया गया। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में मानेसर का जिक्र नहीं है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 223 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 230 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 7 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 117 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 111 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 6 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 23 अक्टूबर 2026 को 252 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 9.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 39.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 50.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 5.4 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं आज 23 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती 17 रिकॉर्ड की गई थी।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (284) दूसरे जबकि सिंगरौली तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मेरठ (274) चौथे स्थान पर है। गजरौला (272) – बागपत (269) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

मुजफ्फरनगर (262) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवाड़ी (241), गाजियाबाद (241) और हनुमानगढ़ (237) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह शहर (ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गजरौला, बागपत, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मानेसर, सिंगरौली, मेरठ, गजरौला, बागपत, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, हिंगोली, यमुनानगर, फतेहपुर सीकरी, दिल्ली, खैरथल, खोरा, गुरुग्राम, नोएडा, करनाल, ग्वालियर, पीथमपुर, सोनीपत, तालचेर, बुलंदशहर, खुर्जा, जालंधर, कोटा, मेहसाणा, सीतामढ़ी, भावनगर, हापुड़, अंकलेश्वर, मधुबनी, मथुरा, लुधियाना, बठिंडा, पिंपरी-चिंचवाड़, आगरा, कानपुर, मोतिहारी, लखनऊ, रोहतक, सागर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), अलवर, अहमदाबाद, जयपुर, पुणे, डूंगरपुर, पूर्णिया, अररिया, गांधीनगर, मुरादाबाद, नागपुर, गुम्मिडीपूंडी, बदलापुर, हाजीपुर और मुंबई आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, हनुमानगढ़, श्री गंगानगर, भरतपुर, नागौर, बड़ौत, पारादीप, सीकर, छाल, बीकानेर, टोंक, बर्नीहाट (मेघालय), जोधपुर, वृंदावन, सवाई माधोपुर, अगरतला, मंडीदीप, बिलीपाड़ा, जालौर, राजकोट, चंद्रपुर, चरखी दादरी, दौसा, बूंदी, चुरू, करौली, सतारा, धौलपुर, नेल्लोर, पाली, बारां, भिवानी, बद्दी, अहमदनगर, बेलापुर, मंडी गोबिंदगढ़, नासिक, सासाराम, भोपाल, झुंझुनू, फतेहाबाद, गया, जैसलमेर, मालेगांव, भीलवाड़ा, कटनी, चित्तौड़गढ़, सूरत, भिवंडी, वाराणसी, वडोदरा, वातवा, फरीदाबाद, जबलपुर, पटियाला, श्रीकाकुलम, हावड़ा, शामली, गोरखपुर, ठाणे, अंबरनाथ, महाड, प्रयागराज, विशाखापत्तनम, नवी मुंबई और परभणी आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 9.5 फीसदी यानी 24 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेंगलुरु, बेतिया, बक्सर, चिक्काबल्लापुर, दरभंगा, गंगटोक, हावेरी, कलबुर्गी, कन्नूर, क्योंझर, किशनगंज, लेह, मदिकेरी, मैंगलोर, पंचकूला, पुडुचेरी, रामनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 100 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, कटक, दावणगेरे, देहरादून, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कारवार, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोलार, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मैहर, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नयागढ़, पलवल, पटना, प्रतापगढ़, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 105 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अंबरनाथ, अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बारां, बठिंडा, बेलापुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छाल, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, देवास, धौलपुर, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हापुड़, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कानपुर, करौली, कटनी, खुर्जा, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मधुबनी, महाद, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पारादीप, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजकोट, रोहतक, सागर, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सीतामढ़ी, सोनीपत, श्रीकाकुलम, सूरत, तालचेर, ठाणे, टोंक, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।

इसी तरह बागपत, बड़ौत, भरतपुर, भिवाड़ी, दिल्ली, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, हिंगोली, करनाल, खैरथल, खोरा, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नागौर, नोएडा, सिंगरौली, श्री गंगानगर और यमुनानगर में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 252 में से 24 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 100 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 22 अक्टूबर को यह आंकड़ा 98 दर्ज किया गया था।

105 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज मानेसर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (22 अक्टूबर) को मानेसर में सूचकांक 271 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 18 अंकों का उछाल आया है।

इससे पहले कल पंचगांव में एक्यूआई 378 दर्ज किया गया। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में मानेसर का जिक्र नहीं है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 223 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 230 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 7 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 117 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 111 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 6 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 23 अक्टूबर को मेरठ (274) चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (284) दूसरे, जबकि सिंगरौली तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 198, गाजियाबाद में 241, गुवाहाटी में 76, गुरूग्राम में 215, नोएडा में 205, ग्रेटर नोएडा में 284 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 101 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 137, चेन्नई में 60, चंडीगढ़ में 63, हैदराबाद में 74, जयपुर में 129 और पटना में 90 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 24 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बरेली, बेंगलुरु, बेतिया, बक्सर, चिक्काबल्लापुर, दरभंगा, गंगटोक, हावेरी, कलबुर्गी, कन्नूर, क्योंझर, किशनगंज, लेह, मदिकेरी, मैंगलोर, पंचकूला, पुडुचेरी, रामनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बागलकोट, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेलगाम, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, कटक, दावणगेरे, देहरादून, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कारवार, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोलार, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मैहर, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नयागढ़, पलवल, पटना, प्रतापगढ़, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, टेन्सा, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, विजयवाड़ा, विरार और यादगीर आदि 100 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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