उज्जैन में 26 जनवरी 2026 को वायु गुणवत्ता सूचकांक 454 तक पहुंच गया, जिससे यह देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया।
25 जनवरी को उज्जैन में वायु गुणवत्ता सूचकांक 338 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 116 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही उज्जैन में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है।
उज्जैन में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 900 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में उज्जैन की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 22 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में अच्छा खासा इजाफा हुआ है, इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता मध्यम से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 153 दर्ज किया गया था, जो आज 26 जनवरी को 88 अंकों के भारी उछाल के साथ बढ़कर 241 पर पहुंच गया है।
26 जनवरी 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 10.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 28.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 61.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि 26 जनवरी 2026 को देश में मध्य प्रदेश के उज्जैन की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 454 दर्ज किया गया। इससे पहले 25 जनवरी को उज्जैन में वायु गुणवत्ता सूचकांक 338 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 116 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही उज्जैन में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है।
रुझानों में सामने आया है कि उज्जैन की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
उज्जैन में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 900 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में उज्जैन की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 22 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में सिंगरौली की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 346 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां छह अंकों के उछाल के साथ एक्यूआई बढ़कर 352 पर पहुंच गया है। मतलब वायु गुणवत्ता अभी भी 'बेहद खराब' है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में अच्छा खासा इजाफा हुआ है, इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता मध्यम से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 153 दर्ज किया गया था, जो आज 26 जनवरी को 88 अंकों के भारी उछाल के साथ बढ़कर 241 पर पहुंच गया है।
इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 26 जनवरी 2026 को 236 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 10.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 28.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 61.4 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 33.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 13 फीसदी की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 7.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 36 फीसदी की वृद्धि हुई है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 100 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 174 (+40) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (352) दूसरे जबकि अंगुल (318) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 303 अंकों के साथ कटक चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद-बल्लभगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 302 और 276 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुरुग्राम (276) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चरखी दादरी (256), बिलीपाड़ा (255), नारनौल (252) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (बल्लभगढ़, गुरुग्राम, चरखी दादरी, नारनौल) और मध्य प्रदेश के दो शहर (उज्जैन, सिंगरौली) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सिंगरौली, गाजियाबाद, गुरुग्राम, चरखी दादरी, बिलीपाड़ा, नारनौल, सुआकाती, बद्दी, दिल्ली, ब्यासनगर, भुवनेश्वर, धारूहेड़ा, तालचेर, भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, श्री गंगानगर, नोएडा, मंडीदीप, देवास, भिवानी, मुजफ्फरनगर, आसनसोल, मंडी गोबिंदगढ़, बहादुरगढ़, बुलंदशहर, सीकर, भरतपुर, जबलपुर, नाहरलागुन, भोपाल, कोलकाता, नागपुर, फरीदाबाद, हावड़ा, मानेसर, हल्दिया, उदयपुर, चंद्रपुर, जयपुर, बेलापुर, गुवाहाटी, राउरकेला, बागपत, ग्वालियर, पुणे, उल्हासनगर, झालावाड़, बारबिल, नागांव, वातवा, बदलापुर, दुर्गापुर, मेरठ, बिहार शरीफ, जींद, अमरावती (आंध्रप्रदेश), हापुड़, जलगांव, नलबाड़ी, सिरसा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), इंदौर, चंडीगढ़, क्योंझर, कोटा, मुंगेर, गांधीनगर, सोनीपत, बर्नीहाट, मुंबई, धुले, नवी मुंबई, मीरा-भायंदर, पिंपरी-चिंचवाड़, करनाल, राजगीर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं उज्जैन, बल्लभगढ़, बालासोर, गया, धनबाद, विशाखापत्तनम, झुंझुनू, पीथमपुर, रतलाम, अंकलेश्वर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, ब्रजराजनगर, चूरू, कुंजेमुरा, बारां, भिवंडी, सिलीगुड़ी, अहमदाबाद, हनुमानगढ़, कल्याण, ठाणे, डूंगरपुर, मालेगांव, अहमदनगर, अजमेर, प्रतापगढ़, कुरुक्षेत्र, सहरसा, खुर्जा, अलवर, महाड, सागर, विरार, धौलपुर, नागौर, अमृतसर, पाली, जालोर, राजसमंद, यमुना नगर, भागलपुर, अमरावती (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, कैथल, नासिक, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, कन्नूर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 10.2 फीसदी यानी महज 24 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, फिरोजाबाद, गंगटोक, कोल्लम, मदिकेरी, मदुरै, मैसूर, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रामनगर, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, थूथुकुडी, तिरुमाला, वृंदावन आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 67 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें अनंतपुर, आरा, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भिलाई, भीलवाड़ा, बूंदी, बक्सर, छपरा, चित्तूर, दौसा, धारवाड़, फतेहाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जैसलमेर, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, पलवल, पंचगांव, पानीपत, परभनी, प्रयागराज, पुदुकोट्टई, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 121 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, धनबाद, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, कैथल, कल्याण, कन्नूर, करनाल, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोलापुर, सोनीपत, सूरत, ठाणे, टोंक, उदयपुर, उल्हासनगर, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 19 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बद्दी, बालासोर, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, ब्यासनगर, चरखी दादरी, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मंडीदीप, नारनौल, नोएडा, श्री गंगानगर, सुआकाती, तालचेर शामिल हैं। वहीं अंगुल, कटक, गाजियाबाद, सिंगरौली में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब', जबकि उज्जैन (454) में गंभीर है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 236 में से महज 24 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 67 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 25 जनवरी 2026 को यह आंकड़ा 77 दर्ज किया गया था।
121 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज उज्जैन (454) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां कल से प्रदूषण में भारी इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक उज्जैन में 116 अंकों के उछाल के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। कल उज्जैन में एक्यूआई 338 दर्ज किया गया था।
इससे पहले कल देश में सिंगरौली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 346 दर्ज किया गया। हालांकि आज छह अंकों के उछाल के साथ सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 352 तक पहुंच गया। मतलब कि वहां वायु गुणवत्ता आज भी बेहद खराब है।
दिल्ली में आज प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 153 दर्ज किया गया, जो आज बढ़कर 241 पर पहुंच गया है। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 88 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,500 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है, जहां सूचकांक 174 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 26 जनवरी को कटक चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (352) दूसरे, जबकि अंगुल (318) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 154, गाजियाबाद में 302, गुवाहाटी में 157, गुरूग्राम में 276, नोएडा में 219, ग्रेटर नोएडा में 226 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 133 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 97, चेन्नई में 49, चंडीगढ़ में 140, हैदराबाद में 84, जयपुर में 159 और पटना में 112 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 24 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, फिरोजाबाद, गंगटोक, कोल्लम, मदिकेरी, मदुरै, मैसूर, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रामनगर, रूपनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, थूथुकुडी, तिरुमाला, वृंदावन शामिल हैं।
वहीं आइजोल, अकोला, अंबाला, अनंतपुर, आरा, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भिलाई, भीलवाड़ा, बूंदी, बक्सर, छपरा, चित्तूर, दौसा, धारवाड़, फतेहाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जैसलमेर, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मुरादाबाद, मुजफ्फरपुर, पलवल, पंचगांव, पानीपत, परभनी, प्रयागराज, पुदुकोट्टई, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, तंजावुर, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुपति, तुमकुरु, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, यादगीर आदि 67 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
दिल्ली में दर्ज हुआ 2026 का सबसे साफ दिन, सिंगरौली रहा सबसे ज्यादा प्रदूषित