10 अक्टूबर 2026 को देश के 257 शहरों में वायु गुणवत्ता की तस्वीर मिली-जुली रही। कहीं प्रदूषण बढ़ा, तो कहीं लोगों को राहत की सांस लेने का मौका मिला।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, राजस्थान के दौसा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 24 अंक बढ़कर 195 पर पहुंच गया, जो देश में सबसे अधिक था। वहीं, अरुणाचल प्रदेश के नाहरलागुन में एक्यूआई महज 14 दर्ज किया गया और वहां की हवा सबसे साफ रही।
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ। यहां एक्यूआई 54 अंक गिरकर 122 पर आ गया। इसके विपरीत फरीदाबाद में सूचकांक 112 पर स्थिर रहा।
एक दिन पहले सबसे प्रदूषित शहर रहा उत्तर प्रदेश का बागपत भी बड़ी राहत के साथ सामने आया, जहां एक्यूआई 148 अंक गिरकर 123 पर पहुंच गया।
देशभर के आंकड़ों पर नजर डालें तो 32 शहरों में हवा बेहतर, 144 में संतोषजनक और 81 शहरों में मध्यम श्रेणी में रही। राहत की बात यह रही कि किसी भी शहर में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज नहीं की गई।
हालांकि, कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषक अब भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। महाराष्ट्र के मालेगांव और अंबरनाथ सहित कई शहरों में प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है।
ये आंकड़े बताते हैं कि हवा की स्थिति में सुधार के बावजूद प्रदूषण का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। शहरों के बीच वायु गुणवत्ता में बड़ा अंतर इस बात की याद दिलाता है कि स्वच्छ हवा के लिए लगातार निगरानी और प्रभावी नियंत्रण उपाय जरूरी हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 10 अक्टूबर 2026 को देश में दौसा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 195 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (09 अक्टूबर) को दौसा में सूचकांक 171 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 24 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि दौसा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
दौसा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 300 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में नाहरलागुन की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर दौसा की तुलना नाहरलागुन से करें तो वहां स्थिति 13.9 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में बागपत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 271 दर्ज किया गया। हालांकि आज 148 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 123 पर पहुंच गया है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 176 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 122 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 54 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है। फरीदाबाद में कल एक्यूआई 112 दर्ज किया गया था, जो आज भी जस का तस बना हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को 257 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 31.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 8.6 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 9.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 13.8 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं आज देश के किसी भी शहर में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज नहीं की गई है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुम्मिडीपूंडी (188) दूसरे जबकि मालेगांव (174) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह अंबरनाथ (161) चौथे स्थान पर है। मंडीदीप – वडोदरा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
भावनगर (159) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पारादीप (156), अंगुल (149) और बहादुरगढ़ (149) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में महाराष्ट्र के दो शहर (मालेगांव, अंबरनाथ) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुम्मिडीपूंडी, वडोदरा, भावनगर, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, तालचेर, वातवा, नागपुर, हावड़ा, भिवानी, सोनीपत, खोरा, कोलकाता, अलवर और चरखी दादरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं दौसा, अंबरनाथ, मंडीदीप, पारादीप, पीथमपुर, सवाई माधोपुर, सतारा, विशाखापत्तनम, सीकर, फतेहाबाद, अगरतला, बद्दी, चूरू, अहमदाबाद, नारनौल, अंकलेश्वर, हिंगोली, पिंपरी-चिंचवाड़, सिरसा, बीकानेर, सासाराम, बल्लभगढ़, नागौर, टोंक, चंद्रपुर, बागपत, भिवाड़ी, दिल्ली, खुर्जा, मंडी गोबिंदगढ़, फतेहपुर सीकरी, खैरथल, पुणे, उदयपुर, पाली, भोपाल, फरीदाबाद, बोइसर, गांधीनगर, गाजियाबाद, जबलपुर, श्री गंगानगर, बेलापुर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग्वालियर, अहमदनगर, छपरा, सूरत, हनुमानगढ़, गया, जयपुर, नांदेड़, झुंझुनू, जैसलमेर, महाड, मुंबई और ठाणे आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 12.5 फीसदी यानी 32 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, भिवंडी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गडग, गंगटोक, कलबुर्गी, कन्नूर, कारवार, काशीपुर, कोप्पल, कुरनूल, लेह, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मंगलौर, नाहरलागुन, पंचगांव, पटियाला, पुडुचेरी, ऋषिकेश आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 144 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जालौर, झालावाड़, झांसी, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मैहर, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, रायचूर, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सतना, शामली, शिलांग, शिवमोगा, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 81 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अंबरनाथ, अंगुल, अंकलेश्वर, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बेलापुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बोइसर, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चूरू, दौसा, दिल्ली, धारूहेड़ा, एलूर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, खैरथल, खोरा, खुर्जा, कोलकाता, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मुंबई, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नोएडा, पाली, पारादीप, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 257 में से 32 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 144 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 09 अक्टूबर को यह आंकड़ा 131 दर्ज किया गया था।
81 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज दौसा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 195 दर्ज किया गया, जोकि ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (09 अक्टूबर) को दौसा में सूचकांक 171 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 24 अंकों का उछाल आया है।
इससे पहले कल देश में बागपत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 271 दर्ज किया गया। हालांकि आज 148 अंकों के भारी सुधार के साथ वहां सूचकांक घटकर 123 पर पहुंच गया है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 176 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 122 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 54 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है। फरीदाबाद में कल एक्यूआई 112 दर्ज किया गया था, जो आज भी जस का तस बना हुआ है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 10 अक्टूबर को अंबरनाथ (161) चौथे स्थान पर है, वहीं गुम्मिडीपूंडी (188) दूसरे, जबकि मालेगांव (174) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 108, गाजियाबाद में 111, गुवाहाटी में 64, गुरूग्राम में 135, नोएडा में 110, ग्रेटर नोएडा में 109 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 101 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 64, चेन्नई में 70, चंडीगढ़ में 49, हैदराबाद में 81, जयपुर में 104 और पटना में 76 दर्ज किया गया।
देश के जिन 32 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बदलापुर, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गडग, गंगटोक, कलबुर्गी, कन्नूर, कारवार, काशीपुर, कोप्पल, कुरनूल, लेह, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मंगलौर, नाहरलागुन, पंचगांव, पटियाला, पुडुचेरी, ऋषिकेश, सिलचर, सिलीगुड़ी, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अनपरा, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, देहरादून, देवास, धनबाद, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, जालौर, झालावाड़, झांसी, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मैहर, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, रायचूर, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सतना, शामली, शिलांग, शिवमोगा, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाटी, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार और यादगीर आदि 144 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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