उत्तर भारत में एक बार फिर बढ़ते प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 14 जून 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि हरियाणा का पानीपत देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 258 दर्ज किया गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि महज 24 घंटों में वहां प्रदूषण 153 अंक बढ़ गया। पानीपत की हवा में पीएम10 कणों का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 450 फीसदी अधिक पहुंच गया है।
दूसरी ओर, महाराष्ट्र का अंबरनाथ देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां एक्यूआई केवल 14 दर्ज किया गया।
राजधानी दिल्ली में भी हालात बिगड़े हैं। यहां एक्यूआई 96 से बढ़कर 151 पहुंच गया, जिससे हवा की गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में चली गई।
बर्नीहाट में कुछ सुधार के बावजूद एक्यूआई 232 के साथ वह देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है।
आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि देश के शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर शामिल हैं।
हालांकि 244 में से 143 शहरों में हवा संतोषजनक और 48 शहरों में साफ दर्ज की गई, लेकिन खराब हवा वाले शहरों की संख्या में एक दिन में करीब 200 फीसदी की बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि प्रदूषण का संकट अभी टला नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 14 जून 2026 को देश में पानीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 258 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल पानीपत में सूचकांक 105 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में 153 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि पानीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
पानीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 450 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में अंबरनाथ की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पानीपत की तुलना अंबरनाथ से करें तो वहां स्थिति 18.4 गुणा खराब है।
बता दें कि इससे पहले कल बर्नीहाट (मेघालय) में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 268 तक पहुंच गया था। वहीं आज 36 अंकों के सुधार के साथ बर्नीहाट में सूचकांक 232 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वहां आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में उछाल आया है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 151 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 55 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 108 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 14 जून 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 19.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 58.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 21.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 14.3 फीसदी का उछाल आया है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 7.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती 19 फीसदी बढ़ गई है। कुछ ऐसी ही स्थिति खराब हवा वाले शहरों की भी है, जिनकी संख्या में कल से करीब 200 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बर्नीहाट (मेघालय) (232) दूसरे जबकि पंचगांव (206) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गाजियाबाद (197) चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम (194) – मेरठ (185) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (183) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बागपत (178), महाद (176) और नोएडा (176) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (गाजियाबाद, मेरठ, ग्रेटर नोएडा, बागपत, नोएडा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बर्नीहाट (मेघालय), पंचगांव, गुरुग्राम, महाद, दिल्ली, नारनौल, करनाल, रूपनगर, मुजफ्फरनगर, तालचेर, जींद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं पानीपत, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, बागपत, नोएडा, बल्लभगढ़, उदयपुर, सिंगरौली, बाड़मेर, धनबाद, सीकर, भिवाड़ी, विशाखापत्तनम, चुरू, बुलंदशहर, सहरसा, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बीकानेर, हापुड़, बांसवाड़ा, पाली, वातवा, फतेहाबाद, जैसलमेर, पीथमपुर, फरीदाबाद, सवाई माधोपुर, जयपुर, झुंझुनू, नागौर, जोधपुर, प्रतापगढ़, टोंक आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 19.7 फीसदी यानी 48 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बिहार शरीफ, बिलासपुर, चामराजनगर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, डूंगरपुर, गडग, गंगटोक, गुवाहाटी, जलना, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, पुडुचेरी, रायबरेली, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, शिवमोगा, सिलचर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 143 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दरी, छपरा, चित्तूर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मंगलौर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नासिक, पलवल, पंचकुला, पटियाला, पटना आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 50 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अंगुल, बद्दी, बागपत, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बाड़मेर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बीकानेर, बुलंदशहर, चित्तौड़गढ़, चुरू, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, हापुड़, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, करनाल, महाद, मंडीखेड़ा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नागौर, नारनौल, नोएडा, पाली, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रूपनगर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह बर्नीहाट (मेघालय), पंचगांव और पानीपत में स्थिति खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 244 में से 48 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 143 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 13 जून को यह आंकड़ा 154 दर्ज किया गया था।
50 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज पानीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 258 दर्ज किया गया। हालांकि कल वहां एक्यूआई 105 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में पानीपत में प्रदूषण के स्तर में 153 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल बर्नीहाट (मेघालय) में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 268 तक पहुंच गया था। वहीं आज 36 अंकों के सुधार के साथ बर्नीहाट में सूचकांक 232 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वहां आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में उछाल आया है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 151 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 55 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 126 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 108 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 14 जून को गाजियाबाद (197) चौथे स्थान पर है, वहीं बर्नीहाट (मेघालय) (232) दूसरे, जबकि पंचगांव (206) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 77, गाजियाबाद में 197, गुवाहाटी में 45, गुरूग्राम में 194, नोएडा में 176, ग्रेटर नोएडा में 183 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 56 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 83, चेन्नई में 47, चंडीगढ़ में 60, हैदराबाद में 57, जयपुर में 107 और पटना में 82 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 48 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, बेतिया, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, चामराजनगर, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, डूंगरपुर, गडग, गंगटोक, गुवाहाटी, जलना, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नवी मुंबई, पंपोर, परभणी, पुडुचेरी, रायबरेली, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दरी, छपरा, चित्तूर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मंगलौर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नासिक, पलवल, पंचकुला, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सतना, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, तुमकुरु, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यमुना नगर आदि 143 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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