29 अगस्त 2026 को जारी 251 शहरों के सरकारी वायु गुणवत्ता आंकड़ों के विश्लेषण से देश में प्रदूषण की असमान तस्वीर सामने आई है।
उत्तर प्रदेश का बड़ौत 262 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां हवा ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। पीएम2.5 के महीन कणों का दबदबा इतना ज्यादा था कि प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,640 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
इसके उलट छत्तीसगढ़ का कोरबा 18 एक्यूआई के साथ सबसे साफ रहा और बड़ौत की तुलना में वहां प्रदूषण 14.6 गुना कम था।
बुलंदशहर, लेह, बद्दी, भागलपुर और गुम्मिडीपूंडी भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
दिल्ली में भी एक्यूआई 128 से बढ़कर 130 पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में मामूली सुधार हुआ।
कुल मिलाकर 28.7 फीसदी शहरों में हवा साफ, 52.6 फीसदी में संतोषजनक और 18.7 फीसदी में स्थिति चिंताजनक रही। यानी अधिकांश शहरों में हवा संतोषजनक रही, लेकिन कई इलाकों में बढ़ता प्रदूषण अब भी गंभीर चिंता का विषय है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 29 अगस्त 2026 को देश में बड़ौत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 262 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (28 अगस्त) को सरकारी आंकड़ों में बड़ौत का जिक्र नहीं था।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बड़ौत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बड़ौत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,640 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में कोरबा की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 18 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बड़ौत की तुलना कोरबा से करें तो वहां स्थिति 14.6 गुणा खराब है।
वहीं कल देश में लेह की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 189 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज लेह में एक अंक के मामूली उछाल के साथ सूचकांक बढ़कर 190 पर पहुंच गया। इसके साथ ही गुणवत्ता आज भी ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 128 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 130 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में दो अंकों का मामूली इजाफा हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-29 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 139 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 137 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 2 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 29 अगस्त 2026 को 251 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 28.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 52.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 18.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 16 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 0.8 फीसदी की कमी आई है। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 22.4 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बुलंदशहर (202) दूसरे जबकि लेह (190) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बद्दी (171) चौथे स्थान पर है। भागलपुर (170) – गुम्मिडीपूंडी (167) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
नोएडा (153) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा (151), गजरौला (150) और अंबाला (149) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (बड़ौत, बुलंदशहर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गजरौला) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बड़ौत, गुम्मिडीपूंडी, भिवानी, चरखी दादरी, हापुड़, जींद, यमुनानगर, फतेहाबाद, गोरखपुर, खोरा और समस्तीपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बुलंदशहर, बद्दी, भागलपुर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गजरौला, अंबाला, दौसा, श्री गंगानगर, फरीदाबाद, मोदीनगर, नयागढ़, मेरठ, सीकर, दिल्ली, शामली, मुजफ्फरनगर, भिवाड़ी, टोंक, बेगूसराय, कुरुक्षेत्र, पाली, जोरापोखर, मथुरा, नारनौल, विशाखापत्तनम, अजमेर, छपरा, अलवर, गाजियाबाद, अमृतसर, नागौर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), सिवान और भीलवाड़ा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 28.7 फीसदी यानी 72 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, गया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, कारवार, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, शिलांग आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 132 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें धौलपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गांधीनगर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलना, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, रूपनगर, सागर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, श्रीकाकुलम, श्रीनगर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 45 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बेगूसराय, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, चरखी दादरी, छपरा, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, हापुड़, जींद, जोरापोखर, खोरा, कुरुक्षेत्र, लेह, मथुरा, मेरठ, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नारनौल, नयागढ़, नोएडा, पाली, समस्तीपुर, शामली, सीकर, सिवान, श्री गंगानगर, टोंक, विशाखापत्तनम और यमुनानगर आदि शामिल हैं।
वहीं बड़ौत (262) और बुलंदशहर (202) में स्थिति खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 251 में से 72 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 132 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 28 अगस्त को भी यह आंकड़ा 133 दर्ज किया गया था।
45 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बड़ौत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 262 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (28 अगस्त) सरकारी आंकड़ों में बड़ौत का जिक्र नहीं था।
वहीं कल देश में लेह की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 189 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज लेह में एक अंक के मामूली उछाल के साथ सूचकांक बढ़कर 190 पर पहुंच गया। इसके साथ ही गुणवत्ता आज भी ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 128 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 130 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में दो अंकों का मामूली इजाफा हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 139 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 137 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 2 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 29 अगस्त को बद्दी (171) चौथे स्थान पर है, वहीं बुलंदशहर (202) दूसरे, जबकि लेह (190) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 66, गाजियाबाद में 109, गुवाहाटी में 63, गुरूग्राम में 86, नोएडा में 153, ग्रेटर नोएडा में 151 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 39 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 63, चेन्नई में 72, चंडीगढ़ में 64, हैदराबाद में 50, जयपुर में 96 और पटना में 70 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 72 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, बेलगाम, भिलाई, भिवंडी, बिलासपुर, चामराजनगर, छाल, कुड्डालोर, दमोह, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, कारवार, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाद, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, शिलांग, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा, विरार और यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अकोला, अंबरनाथ, अनंतपुर, अंगुल, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारां, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गांधीनगर, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलना, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, रूपनगर, सागर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, तालचेर, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा और वृंदावन आदि 132 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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