बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक 
वायु

प्रदूषण का शिकंजा: 264 एक्यूआई के साथ पहले पायदान पर गुरुग्राम, हापुड़-बेतिया में भी स्थिति खराब

दूसरी तरफ देश में कोयंबटूर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 27 रिकॉर्ड किया गया।

Lalit Maurya

  • देश के कई शहरों में सांस लेना आज भी जोखिम भरा बना हुआ है। 10 जून 2026 को गुरुग्राम 264 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता ‘खराब’ दर्ज की गई।

  • वहां स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 480 फीसदी अधिक पहुंच गया है और पीएम10 कण हवा में सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं।

  • हापुड़ (259) और बेतिया (250) भी प्रदूषण के मामले में शीर्ष तीन शहरों में शामिल रहे, जबकि मेरठ में कुछ सुधार के बावजूद हवा अब भी खराब बनी हुई है।

  • दूसरी ओर कोयंबटूर ने महज 27 एक्यूआई के साथ देश की सबसे स्वच्छ हवा का दर्जा हासिल किया, जिससे साफ और प्रदूषित शहरों के बीच बढ़ती खाई उजागर होती है।

  • आंकड़ों के अनुसार देश के केवल 15.1 फीसदी शहरों में हवा साफ रही, जबकि एक-तिहाई से अधिक शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में दर्ज की गई।

  • दिल्ली और फरीदाबाद में भी प्रदूषण बढ़ा है, जो बताता है कि मानसून के आगाज के बावजूद उत्तर भारत के कई शहर अब भी प्रदूषण के शिकंजे में जकड़े हुए हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 10 जून 2026 को देश में गुरुग्राम सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 264 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल भी गुरुग्राम में सूचकांक 264 ही रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि गुरुग्राम की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गुरुग्राम में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 480 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में कोयंबटूर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 27 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गुरुग्राम की तुलना कोयंबटूर से करें तो वहां स्थिति 9.8 गुणा खराब है।

बता दें कि कल मेरठ में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 274 तक पहुंच गया। आज 32 अंकों के भारी सुधार के साथ मेरठ में सूचकांक 242 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।      

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 164 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 169 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 5 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 132 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 158 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 10 जून 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 15.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 35.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 7.7 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 1.7 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम और खराब हवा वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में हापुड़ (259) दूसरे जबकि बेतिया (250) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मेरठ (242) चौथे स्थान पर है। बागपत (240) – रूपनगर (231) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

ग्रेटर नोएडा (225) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मुजफ्फरनगर (215), बीकानेर (210) और बुलंदशहर (208) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (हापुड़, मेरठ, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरनगर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बेतिया, पंचगांव, अंबाला, बर्नीहाट (मेघालय), बहादुरगढ़, करनाल, भिवानी, कैथल, फरीदाबाद, मानेसर, धारूहेड़ा, पंचकुला, सिंगरौली, अमृतसर, चरखी दादरी, बिलीपाड़ा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं गुरुग्राम, हापुड़, मेरठ, बागपत, रूपनगर, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरनगर, बीकानेर, बुलंदशहर, गाजियाबाद, पानीपत, जैसलमेर, हनुमानगढ़, दिल्ली, धनबाद, चूरू, बल्लभगढ़, पाली, कुरुक्षेत्र, सिरसा, लखनऊ, यमुना नगर, हिसार, विशाखापत्तनम, मुरादाबाद, पटियाला, नोएडा, सोनीपत, सीकर, उदयपुर, अंगुल, बांसवाड़ा, रोहतक, भिवाड़ी, बाड़मेर, वातवा, खुर्जा, सिरोही, सवाई माधोपुर, पीथमपुर, दौसा, फतेहाबाद, जयपुर, बारबिल, बारीपदा, झुंझुनू, लुधियाना, रायरंगपुर, भीलवाड़ा, खन्ना, भोपाल, ग्वालियर, जालोर, जोधपुर, बालासोर, धुले, गया, अगरतला, जोरापोखर, नागौर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 15.1 फीसदी यानी 36 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेगूसराय, बेंगलुरु, भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कामगलुरु, कोयंबटूर, धौलपुर, गंगटोक, गुवाहाटी, हुबली, जलना, कलबुर्गी, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, पंपोर, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रामनगर, सहरसा, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, देहरादून, देवास, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मैंगलोर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सिवान, सोलापुर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 74 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अंबाला, अमृतसर, अंगुल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चूरू, कटक, दौसा, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, धुले, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गया, गाजियाबाद, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, करनाल, खन्ना, खुर्जा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मानेसर, मुरादाबाद, नागौर, नोएडा, पाली, पंचकुला, पानीपत, पटियाला, पीथमपुर, रायरंगपुर, रोहतक, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, तालचेर, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में बागपत, बेतिया, बीकानेर, बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पंचगांव, रूपनगर में स्थिति खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से 36 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 118 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 09 जून को यह आंकड़ा 120 दर्ज किया गया था।

74 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गुरुग्राम में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 दर्ज किया गया। हालांकि कल भी वहां एक्यूआई 264 ही दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में गुरुग्राम में प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है।

इससे पहले कल मेरठ में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 274 तक पहुंच गया। आज 32 अंकों के भारी सुधार के साथ मेरठ में सूचकांक 242 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।         

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 164 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 169 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 5 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।    

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 132 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 158 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 10 जून को मेरठ (242) चौथे स्थान पर है, वहीं हापुड़ (259) दूसरे, जबकि बेतिया (250) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 104, गाजियाबाद में 199, गुवाहाटी में 48, गुरूग्राम में 264, नोएडा में 134, ग्रेटर नोएडा में 225 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 69 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 151, चेन्नई में 56, चंडीगढ़ में 94, हैदराबाद में 54, जयपुर में 111 और पटना में 90 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 36 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबरनाथ, अररिया, बेगूसराय, बेंगलुरु, भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कामगलुरु, कोयंबटूर, धौलपुर, गंगटोक, गुवाहाटी, हुबली, जलना, कलबुर्गी, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, पंपोर, पेरुंदुरई, पुडुचेरी, रामनगर, सहरसा, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।

वहीं आगरा, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, बदलापुर, बारां, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेलगाम, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, देहरादून, देवास, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मैंगलोर, मेहसाणा, मिलुपारा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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