वायु

प्रदूषण के बदले समीकरण: दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ी हवा, नोएडा में 281 पर पहुंचा एक्यूआई

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सहरसा (268) दूसरे जबकि बुलंदशहर (260) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गजरौला चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद (248) – फरीदाबाद (224) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है

Lalit Maurya

  • 04 अक्टूबर 2026 को देश में वायु प्रदूषण के समीकरण तेजी से बदलते नजर आए। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक नोएडा 281 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। एक दिन पहले यहां एक्यूआई 204 था, यानी महज 24 घंटे में 77 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • नोएडा के बाद सहरसा (268), बुलंदशहर (260), गजरौला (255), गाजियाबाद (248) और फरीदाबाद (224) सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। खास चिंता की बात यह है कि देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में सात उत्तर प्रदेश के हैं, जिससे दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण का दबाव साफ दिखाई देता है।

  • दिल्ली में भी हवा कल के मुकाबले और खराब हुई और एक्यूआई 171 से बढ़कर 187 पहुंच गया। वहीं फरीदाबाद में 139 से बढ़कर 224 होने के साथ हवा ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। नोएडा में पीएम10 प्रदूषण का प्रमुख स्रोत रहा और वहां प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से करीब पांच गुना अधिक दर्ज किया गया।

  • हालांकि देशभर की तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। 246 शहरों में 21 की हवा ‘बेहतर’ और 123 की ‘संतोषजनक’ रही। कैथल 31 के एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा।

  • कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का दबाव अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि एनसीआर और छोटे शहरों में भी हवा तेजी से जहरीली हो रही है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 04 अक्टूबर 2026 को देश में नोएडा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 281 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (03 अक्टूबर) को नोएडा में सूचकांक 204 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 77 अंकों का इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में कैथल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 31 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर नोएडा की तुलना कैथल से करें तो वहां स्थिति 9 गुणा खराब है।

इससे पहले देश में यमुना नगर की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 228 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में यमुना नगर का जिक्र नहीं है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 171 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 187 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 16 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 139 दर्ज किया गया था, जो आज 85 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 224 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी से 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 04 अक्टूबर 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 8.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 50 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 41.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

प्रदूषण के बदले समीकरण

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 23.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 20.4 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती चार से बढ़कर 12 पर पहुंच गई है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सहरसा (268) दूसरे जबकि बुलंदशहर (260) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गजरौला (255) चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद (248) – फरीदाबाद (224) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

हापुड़ (222) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवाड़ी (219), बागपत (212) और शामली (212) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के सात शहर (नोएडा, बुलंदशहर, गजरौला, गाजियाबाद, हापुड़, बागपत और शामली) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गजरौला, गाजियाबाद, हापुड़, भिवाड़ी, शामली, मोदीनगर, मेरठ, खोरा, बद्दी, मुरादाबाद, ग्रेटर नोएडा, अंबाला, चंद्रपुर, गुम्मिडीपूंडी, मथुरा, मोतिहारी, धारूहेड़ा, मंडी गोबिंदगढ़, चरखी दादरी, हावड़ा, हिसार, कोलकाता, बारीपाड़ा, अररिया, हाजीपुर, बैरकपुर, वाराणसी, हिंगोली, कानपुर, लखनऊ, जालंधर, समस्तीपुर और पूर्णिया आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं नोएडा, सहरसा, बुलंदशहर, फरीदाबाद, बागपत, मुजफ्फरनगर, बहादुरगढ़, दिल्ली, अगरतला, वृंदावन, सासाराम, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, सिरसा, तालचेर, ब्रजराजनगर, खुर्जा, मंडीदीप, बर्नीहाट (मेघालय), पारादीप, श्री गंगानगर, गोरखपुर, दौसा, अंबरनाथ, परभणी, पीथमपुर, डोंबिवली, टोंक, बरेली, फतेहपुर सीकरी, सवाई माधोपुर, अंकलेश्वर, सीकर, भावनगर, मंगुराहा, बिलाईपाड़ा, फतेहाबाद, भिवानी, देवास, नारनौल, पटियाला, नागौर, सूरत, जलना, रोहतक, ग्वालियर, रायरंगपुर, जैसलमेर, टेन्सा, उदयपुर, अहमदाबाद, बूंदी, बीकानेर, उल्हासनगर, हल्दिया, जयपुर, जोरापोखर, लुधियाना, हनुमानगढ़, बालासोर, भोपाल, नागपुर और सतारा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 8.5 फीसदी यानी 21 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोल्हापुर, कुरनूल, मदिकेरी, नाहरलागुन, पुडुचेरी, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, शिलांग, सिलचर, सिलीगुड़ी, तिरुवनंतपुरम, विजयवाड़ा आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें कोयंबटूर, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करौली, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सागर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 90 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अंबाला, अंबरनाथ, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, बद्दी, बहादुरगढ़, बालासोर, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, भागलपुर, भावनगर, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, कटक, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, डोंबिवली, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जोरापोखर, कानपुर, खोरा, खुर्जा, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंगुराहा, मथुरा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, पारादीप, परभणी, पटियाला, पीथमपुर, पूर्णिया, रायरंगपुर, रोहतक, समस्तीपुर, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, टोंक, उदयपुर, उल्हासनगर, वाराणसी, वातवा और वृंदावन शामिल हैं।

वहीं देश में आज नोएडा, सहरसा, बुलंदशहर, गजरौला, गाजियाबाद, फरीदाबाद, हापुड़, भिवाड़ी, बागपत, शामली, मोदीनगर और मेरठ में स्थिति खराब है। इन शहरों में सूचकांक 200 से ऊपर दर्ज किया गया है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से 21 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 123 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 03 अक्टूबर को यह आंकड़ा 118 दर्ज किया गया था।

90 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 281 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (03 अक्टूबर) को नोएडा में सूचकांक 204 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 77 अंकों का इजाफा हुआ है।

इससे पहले देश में यमुना नगर की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 228 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में यमुना नगर का जिक्र नहीं है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 171 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 187 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 16 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 139 दर्ज किया गया था, जो आज 85 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 224 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी से 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 04 अक्टूबर को गजरौला (255) चौथे स्थान पर है, वहीं सहरसा (268) दूसरे, जबकि बुलंदशहर (260) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 111, गाजियाबाद में 248, गुवाहाटी में 73, गुरूग्राम में 166, नोएडा में 281, ग्रेटर नोएडा में 171 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 92 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 117, चेन्नई में 75, चंडीगढ़ में 89, हैदराबाद में 73, जयपुर में 105 और पटना में 90 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 21 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में बदलापुर, बेतिया, चामराजनगर, दमोह, गंगटोक, कैथल, कलबुर्गी, करनाल, कोल्हापुर, कुरनूल, मदिकेरी, नाहरलागुन, पुडुचेरी, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, शिलांग, सिलचर, सिलीगुड़ी, तिरुवनंतपुरम और विजयवाड़ा शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करौली, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पंपोर, पंचगांव, पंचकुला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सांगली, सतना, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सोनीपत, श्रीनगर, ठाणे, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विरार और यादगीर आदि 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं