मौसम के बदलते मिजाज के चलते देश के अधिकांश हिस्सों में प्रदूषण के स्तर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 5 जून 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार 242 शहरों में से करीब 74 फीसदी शहरों की हवा ‘बेहतर’ या ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रही, जबकि केवल एक चौथाई शहरों में हालात चिंताजनक दर्ज किए गए।
हालांकि राहत के इस दौर में भी फरीदाबाद 198 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बना रहा, जहां पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से लगभग 12 गुना अधिक दर्ज किया गया।
दूसरी ओर अंबरनाथ देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा। सबसे बड़ी राहत हरियाणा के चरखी दादरी में देखने को मिली, जहां एक दिन पहले 310 एक्यूआई के साथ बेहद खराब स्थिति थी, लेकिन महज 24 घंटे में 215 अंकों के सुधार के साथ यह 95 पर पहुंच गया।
दिल्ली में भी प्रदूषण 33 अंक घटकर 131 पर आ गया। आंकड़े संकेत देते हैं कि फिलहाल मौसम प्रदूषण पर भारी पड़ रहा है, लेकिन पीएम2.5 और पीएम10 जैसे घातक कण अब भी कई शहरों में स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 05 जून 2026 को देश में फरीदाबाद सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 198 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल फरीदाबाद में सूचकांक 216 दर्ज किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में 18 अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि फरीदाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
फरीदाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,200 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में अंबरनाथ की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 24 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर फरीदाबाद की तुलना अंबरनाथ से करें तो वहां स्थिति 8.2 गुणा खराब है।
बता दें कि इससे पहले कल चरखी दादरी में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 310 तक पहुंच गया। हालांकि आज 215 अंकों के भारी सुधार के साथ चरखी दादरी में सूचकांक 95 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से सीधे संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 164 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 131 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 33 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 216 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 198 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 05 जून 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 17.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 25.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 30.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 10.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 17.3 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मेरठ (185) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (183) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बाड़मेर (182) चौथे स्थान पर है। भिवानी (181)- अंगुल (178) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बिलीपाड़ा (178) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बागपत (177), ग्रेटर नोएडा (173) और बीकानेर (171) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, ग्रेटर नोएडा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि फरीदाबाद, भिवानी, बिलीपाड़ा, नलबाड़ी, हाजीपुर, पानीपत, गाजियाबाद, दिल्ली, पंचगांव, मानेसर, बर्नीहाट (असम), वातवा, बठिंडा, धारूहेड़ा, नारनौल, रूपनगर, किशनगंज, भिवाड़ी, जालंधर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, बाड़मेर, बागपत, ग्रेटर नोएडा, बीकानेर, सोनीपत, बुलंदशहर, गुरुग्राम, छपरा, श्री गंगानगर, धनबाद, विशाखापत्तनम, मुजफ्फरनगर, चूरू, नोएडा, सिंगरौली, पाली, सिरसा, मेहसाणा, अमृतसर, जैसलमेर, फतेहाबाद, तालचेर, कटनी, मुरादाबाद, पटना, खन्ना, बहादुरगढ़, उदयपुर, जालोर, जोरापोखर, यमुना नगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 17.8 फीसदी यानी 43 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गुवाहाटी, जलना, झांसी, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, मदिकेरी, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, नाहरलागुन, नासिक, पंपोर, पुणे, रामनगर, ऋषिकेश, समस्तीपुर, सांगली, शिवमोगा, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उज्जैन, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बूंदी, बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दौसा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 62 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अमृतसर, अंगुल, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, भिवाड़ी, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), छपरा, चूरू, कटक, दिल्ली, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, जोरापोखर, कल्याण, कटनी, खन्ना, किशनगंज, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नलबाड़ी, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पटना, रूपनगर, सिंगरौली, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, तुमडीह, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से 43 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 137 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 04 जून को यह आंकड़ा 124 दर्ज किया गया था।
62 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज फरीदाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 198 दर्ज किया गया। हालांकि कल वहां एक्यूआई 216 दर्ज किया गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में फरीदाबाद में प्रदूषण के स्तर में 18 अंकों का सुधार आया आया है।
इससे पहले कल चरखी दादरी में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 310 तक पहुंच गया। हालांकि आज 215 अंकों के भारी सुधार के साथ चरखी दादरी में सूचकांक 95 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से सीधे संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 164 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 131 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 33 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 216 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 198 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 05 जून को बाड़मेर (182) चौथे स्थान पर है, वहीं मेरठ (185) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (183) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 74, गाजियाबाद में 134, गुवाहाटी में 45, गुरूग्राम में 150, नोएडा में 127, ग्रेटर नोएडा में 173 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 59 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 76, चेन्नई में 61, चंडीगढ़ में 57, हैदराबाद में 68, जयपुर में 84 और पटना में 108 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 43 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, बागलकोट, बैरकपुर, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, भोपाल, बोइसर, चामराजनगर, कोयंबटूर, देहरादून, गंगटोक, गुवाहाटी, जलना, झांसी, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, मदिकेरी, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, नाहरलागुन, नासिक, पंपोर, पुणे, रामनगर, ऋषिकेश, समस्तीपुर, सांगली, शिवमोगा, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उज्जैन, उल्हासनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बूंदी, बर्नीहाट (मेघालय), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दौसा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुंटूर, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मदुरई, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नवी मुंबई, नेल्लोर, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सासाराम, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिवान, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुमाला, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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