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वायु

मोदीनगर में प्रदूषण का कहर जारी, देश के टॉप-10 प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर शामिल

27 जून 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 18.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। 62.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 19.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

Lalit Maurya

  • देश में वायु प्रदूषण का संकट एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मोदीनगर पर सबसे भारी पड़ा है। 27 जून 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार मोदीनगर लगातार दूसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 261 दर्ज किया गया।

  • स्थिति इतनी गंभीर है कि यहां पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से 52 गुना अधिक पहुंच गया, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।

  • चिंता की बात यह भी है कि देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर—मोदीनगर, ग्रेटर नोएडा, मेरठ और बुलंदशहर—शामिल हैं।

  • हालांकि देश के अधिकांश 62.6 फीसदी शहरों में हवा संतोषजनक रही और 18.3 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता बेहतर दर्ज की गई, लेकिन करीब 19 फीसदी शहर अब भी खराब या मध्यम प्रदूषण की चपेट में हैं।

  • दिल्ली और फरीदाबाद में भी पिछले 24 घंटों में प्रदूषण बढ़ा है, जबकि पानीपत और ग्रेटर नोएडा भी 'खराब' श्रेणी में बने हुए हैं।

  • आंकड़े बताते हैं कि मानसून के आगमन के बावजूद उत्तर भारत के कई शहरों में प्रदूषण की चुनौती अभी भी बरकरार है और महीन कण (पीएम2.5) तथा पीएम10 प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 27 जून 2026 को देश में एक बार फिर मोदीनगर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 261 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। कल मोदीनगर में एक्यूआई 259 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में दो अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि मोदीनगर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

मोदीनगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 52 गुणा अधिक है।

दूसरी तरफ देश में अंबरनाथ की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 25 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मोदीनगर की तुलना अंबरनाथ से करें तो वहां स्थिति 10.4 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 127 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 130 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में तीन अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 178 दर्ज किया गया, जो आज बढ़कर 181 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 3 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 27 जून 2026 को 246 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 18.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 62.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 19.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 11.8 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 13.2 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 22.8 फीसदी की कमी आई है। हालांकि खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस तस है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पानीपत (207) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (204) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मेरठ (193) चौथे स्थान पर है। धनबाद (192) – फरीदाबाद (181) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

सिलीगुड़ी (180) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बुलंदशहर (171), सहरसा (169) और भिवानी (166) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (मोदीनगर, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मोदीनगर, मेरठ, फरीदाबाद, भिवानी, करनाल, बहादुरगढ़, जींद, गुरुग्राम, वातवा, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, हाजीपुर, सागर, बर्नीहाट (असम), काशीपुर, मानेसर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं पानीपत, ग्रेटर नोएडा, धनबाद, बुलंदशहर, सहरसा, बल्लभगढ़, बागपत, गाजियाबाद, कुरुक्षेत्र, मुजफ्फरनगर, अंबाला, हिसार, मुरादाबाद, भिवाड़ी, पाली, कैथल, सिरसा, छपरा, मथुरा, सिंगरौली, बीड, चेन्नई, जयपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 18.3 फीसदी यानी 45 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बैरकपुर, बेलापुर, भिलाई, चामराजनगर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, पंपोर, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, सांगली, सतारा, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, कोल्लम, कोटा, लखनऊ आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 44 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अंबाला, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बीड, भिवाड़ी, भिवानी, बुलंदशहर, बक्सर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गुरुग्राम, हाजीपुर, हिसार, जयपुर, जींद, कैथल, करनाल, काशीपुर, खोरा, कुरुक्षेत्र, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पाली, सागर, सहरसा, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिरसा, सुआकाती, तालचेर, वातवा आदि शामिल हैं।

इसी तरह मोदीनगर (261), पानीपत (207) और ग्रेटर नोएडा (204) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 246 में से 45 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 154 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 26 जून को यह आंकड़ा 136 दर्ज किया गया था।

44 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर मोदीनगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 261 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। इससे पहले कल मोदीनगर में एक्यूआई 259 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में दो अंकों की बढ़ोतरी हुई है।    

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 127 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 130 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में तीन अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 178 दर्ज किया गया, जो आज बढ़कर 181 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 3 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 27 जून को मेरठ (193) चौथे स्थान पर है, वहीं पानीपत (207) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (204) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 84, गाजियाबाद में 153, गुवाहाटी में 80, गुरूग्राम में 140, नोएडा में 161, ग्रेटर नोएडा में 204 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 85, चेन्नई में 102, चंडीगढ़ में 59, हैदराबाद में 58, जयपुर में 101 और पटना में 85 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 45 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, बैरकपुर, बेलापुर, भिलाई, चामराजनगर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, पंपोर, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, सांगली, सतारा, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा, यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, कोल्लम, कोटा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मैंगलोर, मेहसाणा, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नाहरलागुन, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यमुना नगर आदि 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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